दो जवान बेटियों की मम्मी की अन्तर्वासना- 1

(Ladki Ki Choot Ki Kahani)

राजेश्वर 2020-08-27 Comments

This story is part of a series:

लड़की की चूत की कहानी में पढ़ें कि कैसे मैंने एक दिन अपने सामने वाले घर में एक 19 साल की लड़की को अपनी चूत को खीरे से सहलाते देखा. तो मैंने क्या किया?

मेरा नाम राजेश्वर है, मुझे राज भी कहते हैं. मेरी हाइट 5 फुट 8 इंच है, मैं शरीर से स्वस्थ हूँ और मेरी बॉडी एथेलीट टाइप है.

यह कहानी उस समय की है जब मैं 22 वर्ष का था और यूनिवर्सिटी में एमबीए की पढ़ाई कर रहा था.
इस कहानी में बताया गया है कि परिवार में शारिरिक बनावट और सेक्स वंशानुगत होता है. यदि नानी में सेक्स की इच्छा अधिक रही है तो उसकी बेटियों में … और बेटियों की बेटियों में भी उतना ही सेक्स होगा, वही रूप और शारीरिक बनावट होगी.

यह पारिवारिक कहानी थोड़ी लम्बी है अतः मेरा आप सभी से अनुरोध है कि कहानी से जुड़े रहें, आपको आनन्द आएगा.

एक बात और बताना चाहता हूँ कि मैं कोई साहित्यकार नहीं हूँ, बस अपनी बात अपने शब्दों में लिखने की कोशिश करता हूँ.
अब लड़की की चूत की कहानी:

मैं एक मकान की तीसरी मंजिल के एक कमरे में रहता था. मेरे सामने जो मकान था उसके ग्राउंड फ्लोर के आँगन में कई बार मैं दो तीन अलग अलग उम्र की लेडीज देखता था.
उस मकान की जो तीसरी मंजिल थी उसकी खिड़की में एक बहुत बड़ा शीशा लगा हुआ था जिस पर कई बार पर्दा लगा होता था और कई बार नहीं लगा होता था.

एक रोज शाम 7 बजे के करीब मैं अपनी बालकोनी में आया तो सामने वाली बड़ी खिड़की में से मुझे एक अजीब नजारा दिखाई दिया, जिसे देखकर मैं हैरान रह गया. उस कमरे में एक जवान लड़की जिसकी उम्र लगभग 19 – 20 साल थी, कुछ सेक्स क्रियाएं कर रही थी.

मैंने देखा कि लड़की बेड पर लेटी हुई थी. उसने अपनी स्कर्ट को ऊपर किया हुआ था. वो एक छोटे खीरे को अपनी टांगों के बीच रगड़ रही थी. बीच बीच में वह अपनी चूचियों को भी अपने हाथों से भींच रही थी.

उस दिन उस खिड़की पर पर्दा नहीं लगा था और अंदर लाइट जलने की वजह से सब कुछ साफ दिखाई दे रहा था.

मेरे कमरे और उस मकान के बीच में बस सड़क थी जो लगभग 8-10 फुट की ही थी अर्थात मेरी बालकोनी और उस कमरे की खिड़की के बीच का अंतर लगभग 8 फुट था.

उस लड़की ने घुटनों से ऊपर तक की एक छोटी सी स्कर्ट और उसके ऊपर टॉप पहन रखा था.
हालांकि लड़की ने अपनी जवानी में कदम रखा ही था परंतु उसकी चुचियों का साइज लगभग 34″ था. जिससे उसका टॉप उसके पेट पर छतरी की तरह तना रहता था.

उसके स्वस्थ और सुडौल पट्ट (जांघें) और टांगें साफ दिखाई दे रहे थे. लड़की बहुत सुंदर थी, एकदम भरा हुआ चेहरा, मोटी मोटी आंखें, भरा हुआ सुंदर गदराया शरीर, अच्छी फूली हुई गांड, हर तरह से लड़की पका हुआ फल थी.
इस उम्र की लड़कियों में शारीरिक बदलाव आता है और वह शरीर का आनंद लेने के लिए हमेशा तत्पर रहती है.

मैंने देखा, लड़की ने सामने से अपना टॉप उठाया और उसमें से अपने बड़े बड़े, गोल और दूधिया मम्मों को बाहर निकाला. उसके मम्मों के ऊपर बहुत ही छोटे छोटे लगभग न के बराबर गुलाबी निप्पल और उनके चारों ओर गुलाबी रंग का छोटा सा घेरा बना हुआ था. वह बार बार अपनी चूचियों के कोमल निप्पलों को अपने अंगूठे और उंगली से मसलती और जोर से आहें भरती.

मुझे एकदम लगा कि ये तो गलत काम कर रही है अतः इसके मां बाप को बताना चाहिए. परन्तु मैंने सोचा कि यदि मैं इसके बारे में बताऊंगा तो ये मुकर जाएगी और मुझे ही झूठा बना देगी. इसलिए सबूत रखने के लिए मैंने तुरंत ही अपना छोटा सा कैमरा उठाया और उसकी फोटो लेनी चाही. लेकिन उस कैमरे में रील ही नहीं थी.

कुछ देर बाद लड़की ने अपनी पैंटी भी एक झटके में निकाल दी और बैड पर चौड़ी टांगें करके लेट गई. मुझे उसकी चूत के दर्शन नहीं हुए क्योंकि उस लड़की का सिर मेरी तरफ था और टांगें दूसरी ओर.

करीब दो तीन मिनट तक अपनी चूत और चूचियों की इसी पोज में रगड़ाई करने के बाद उसने पोज बदला और पेट के बल लेट कर खीरे को अपनी जांघों में दबा लिया तथा अपनी छाती को जैसे ही ऊपर उठाया तो उसका मुंह मेरी ओर हो गया और उसने मुझे मेरी बालकोनी में कैमरा लिए हुए देखा.

लड़की एकदम घबरा गई और उसने भागकर खिड़की का पर्दा लगा दिया. पर्दा लगाते हुए हमारी नजरें अच्छी तरह मिल गई थीं.

कुछ ही देर में कमरे की लाइट बंद हो गई और वह लड़की नीचे आकर बाहर खड़ी हो गई और बार-बार मेरी बालकोनी की तरफ देखने लगी.

मैं बालकोनी में ही खड़ा रहा और उस लड़की की तरफ देखता रहा.
लड़की समझ चुकी थी कि मैंने उसको वह सब करते हुए देख लिया था. उसने मेरे हाथ में कैमरा देखकर यह भी अंदाजा लगा लिया कि मैंने फोटो ले ली हैं.

अब इस कहानी को मैं यहीं थोड़ा विराम दे कर उस लड़की और परिवार के बारे में आपको बता दूं.

यह परिवार अपने आपको बाकी लोगों से थोड़ा सुपीरियर समझता था और किसी से मिलना जुलना, बातें करना पसंद नहीं करता था. परिवार में पति पत्नी के अलावा दो बेटियां थीं.
परिवार का मुखिया विदेश में मर्चेन्ट नेवी में सर्विस करता था, अच्छा खासा पैसे कमाता था और इन्हें भेजता था, लेकिन उसके पास परिवार को देने के लिए वक्त नहीं था.
साल में 8-10 दिन के लिए अपने परिवार से मिलने आता था.

लगभग 41 साल की उसकी पत्नी का नाम सरोज रानी था. सरोज सारे घर का संचालन करती थी. बहुत ही सुन्दर बड़े बड़े चुचों वाली सरोज अपने आप को बेटियों और नई नवेली लड़कियों से अधिक सुंदर और स्मार्ट समझती थी. हर वक़्त फैशन और मस्ती में डूबी रहती थी.

लेकिन वो बहुत ही कड़क स्वभाव की थी, हर किसी से बहस करना और झगड़ना उसकी हॉबी थी. लड़कियों को पूरा खींच कर रखती थी. इस उम्र में भी सरोज के नयन नक्श और शरीर की बनावट किसी का भी लंड खड़ा करने के लिए बहुत थी. उसको देख कर लगता नहीं था कि वह दो जवान बच्चों की माँ है.

उसकी चुचियाँ इतनी बड़ी थी कि उसकी दोनों लड़कियों की बड़ी चुचियाँ भी उसी की देन थी. तीनों माँ बेटियों की चुचियाँ और चूतड़ अर्थात गांड अन्य लेडीज के मुकाबले काफी उभार लिए हुए थे.

सरोज कभी साड़ी पहनती, कभी सलवार कमीज़, तो कभी स्कर्ट टॉप पहने रहती थी. हर ड्रेस में वह सेक्सी लगती थी. जब चलती थी तो उसकी भारी गांड मटकती हुई हिलती थी. हाथ पांव की उंगलियों की बनावट बहुत ही सुंदर और सेक्सी थी. वह अपनी बेटियों की बड़ी बहन लगती थी, उसका साइज 36-34-38 होगा.

उसके ख़िलाफ़ जो बातें थीं वे ये थी कि एक तो वह दो जवान बच्चों की माँ थी. दूसरे उसका स्वभाव लड़ाका था, जिससे लोग उसके नजदीक नहीं जाते थे. सज संवर कर रहना और थिएटर में पिक्चर देखना उसका शौक था.
उस लोकैलिटी में सब उसे मैडम कहते थे.

उस घर में सरोज की 22 साल की बड़ी बेटी नेहा अपने 10 महीने के बेटे के साथ रहती थी.
नेहा सरोज की बिल्कुल कॉपी थी. बहुत ही सुन्दर नयन नक्श, बड़े बड़े मम्मे, बच्चा पैदा करने के बाद गदराया शरीर, नशीली आंखें यानी कि हर लिहाज से सुंदरता में अपनी माँ सरोज से इक्कीस थी.

वह अधिकतर टाइट पैंट या स्कर्ट टॉप में रहती थी. उसका साइज भी 36-34-36 होगा. दोनों लड़कियों की चुचियाँ अपनी मम्मी पर ही बड़ी बड़ी थीं.

नेहा की अपने हस्बैंड से नहीं बनती थी, प्रेग्नेंसी के बाद से झगड़ा होने के बाद अपनी माँ के पास आ गई थी और बच्चे की डिलीवरी भी यहीं हुई थी. लगभग डेढ़ साल से अपनी माँ के पास रह रही थी, अर्थात प्रेग्नेंसी के बाद से ही लगभग डेढ़ साल से पति से संसर्ग नहीं हुआ था.

छोटी लड़की जिसका जिक्र सबसे पहले किया था, उसका नाम बिन्दू था और वह प्लस टू करने के बाद एक कंप्यूटर के कोचिंग स्कूल में पढ़ती थी.

अब कहानी वहीं से जहां से मैंने बिन्दू को सेक्स करते देखा था.

जैसे ही बिन्दू ने मुझे अपनी बालकॉनी में कैमरा लिए हुए देखा तो उसने तुरंत अपने पर्दे लगा दिए और लाइट बन्द करके नीचे आ गई. बिन्दू सामने के आँगन में बाहर आकर खड़ी हो गई और सहमी सी बार बार मेरे कमरे की ओर देखती रही. मैं समझ गया था कि वह मेरा इंतजार कर रही है.

कुछ देर बाद मैं नीचे गया तो देखा कि उसकी बड़ी बहन नेहा भी वहाँ आ गई थी.
मैं उन दोनों को देखते हुए निकल गया.

कुछ देर बाद मैंने देखा बिन्दू भी मेरे पीछे पीछे आ रही थी. गली का मोड़ मुड़ते ही वह मेरे पास आई और साथ चलते हुए बोली- मुझे आपसे बात करनी है.
मैंने कहा- बोलो.
बिन्दू झिझकते हुए बोली- आपने मेरी फ़ोटो खींची है?
मैंने कहा- तुम वो सब क्या कर रही थी? तुम बहुत ही ग़लत काम कर रही थी.

बिन्दू डर गई और बोली- सॉरी, आगे से नहीं करूंगी, आप प्लीज किसी को मत बताना.
मैंने कहा- तुम्हारे घर वालों को तो बताना ही पड़ेगा.
बिन्दू बोली-प्लीज मैं रिक्वेस्ट करती हूँ ऐसा मत करना वर्ना मेरी मम्मी मेरी जान निकाल देगी.

हम चलते चलते एक छोटे से पार्क के पास पहुँच गए.

मैंने उससे कहा- ये सब तुम क्यों करती हो? और करना ही है तो अपने बॉयफ्रेंड के साथ क्यों नहीं करती?
बिन्दू बोली- मेरा कोई बॉयफ्रेंड नहीं है.

मैंने कहा- पर तुम करती ही क्यों हो?
बिन्दू- अब नहीं करूंगी.

मैंने पूछा- क्या तुम्हें यह सब करना अच्छा लगता है?
बिन्दू कुछ नहीं बोली.

मैंने फिर पूछा- बोलती क्यों नहीं? ये सब तुमने कहाँ से सीखा है?
बिन्दू बोली- मेरी एक सहेली ने ये सब बताया था, वह अपने बॉयफ्रेंड के साथ करती है.

मैंने कहा- क्या यह सब करना तुम्हें अच्छा लगता है?
बिन्दू ने मेरी तरफ देखा और हाँ में अपना सिर हिलाया.

मैंने बिन्दू से कहा- तुम भी कोई बॉयफ्रेंड बना लो?
बिन्दू कुछ देर सोचती रही और बोली- आप बनोगे मेरे बॉयफ्रेंड?

मैं तो यही चाहता था, मैंने बिन्दू की तरफ देखा और उससे कहा- चलो मैं सोचकर बताता हूँ.
बिन्दू- लेकिन आप प्लीज ये दोनों ही बातें मेरी मम्मी को नहीं बताना वर्ना वो मेरी जान निकाल देगी.
मैंने कहा- ठीक है, नहीं बताऊंगा.

बिन्दू ने अपना हाथ मेरी तरफ मिलाने को बढ़ाया और बोली- प्रॉमिस?
मैंने भी उसके हाथ को मिलाने के लिए पकड़ा और कहा- प्रॉमिस.
उसके चेहरे पर संतोष के भाव आ गए.

बिन्दू का हाथ इतना मुलायम और सेक्सी था कि मेरा लण्ड झटके खाने लगा. मैंने बिन्दू को कहा- थोड़ा पार्क के अंदर चलें?
बिन्दू ने कहा- देर हुई तो मेरी मम्मी गुस्सा करेंगी.
मैंने कहा- तुम्हारी मर्जी.
यह कह कर मैं पार्क के अंदर चला गया.

जवान लड़की की चूत की कहानी आपको कैसी लग रही है?
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लड़की की चूत की कहानी जारी रहेगी.

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