योग के बहाने भोग तक का सफर- 2

(Meri Pyasi Chut Ki Kahani)

सनी वर्मा 2021-05-24 Comments

मेरी प्यासी चुत की कहानी में पढ़ें कि कैसे मैंने पड़ोसी के लंड से चुदने के लिए योग, व्यायाम करने का बहाना किया. दोनों ही एक दूसरे के जिस्मों के प्यासे थे.

दोस्तो, आप प्रकाश और अनीता की गर्म चुदाई वाली कहानी पढ़ रहे थे.
मेरी प्यासी चुत की कहानी के पहले भाग
ना बुझने वाली मेरी अन्तर्वासनाhttps://www.antarvasnax.com/indian-wife/sex-chudai-kahani/
में रमण नामक जिम ट्रेनर की एंट्री हो चुकी थी. अनीता रमण के साथ अगले दिन से वर्कआउट शुरू करने वाली थी लेकिन उसकी पहली रात को उसने प्रकाश के साथ अपनी जोरदार चुदाई की पूरी तैयारी कर ली थी.

अब आगे मेरी प्यासी चुत की कहानी:

प्रकाश शॉप से घर आया तो अनीता ने उसे दरवाजे पर ही चूम लिया।
वह समझ गया कि मैडम आज मूड में हैं.

प्रकाश कपड़े बदल कर मुँह-हाथ धोकर आया तो उसे चाय तैयार मिली; साथ में गर्म गर्म पकौड़े।

अनीता उसकी गोदी में बैठ गयी।
प्यार की चुस्कियों के बीच चाय-पकौड़े निबटाकर दोनों टीवी देखने लगे।
कब नौ बज गए, पता ही नहीं चला।

अनीता ने प्रकाश से कहा कि चलो नहा लेते हैं।

कपड़े उतार कर जब दोनों बाथरूम में पहुंचे तो गुलाब की खुशबू से पूरा बाथरूम महक रहा था।
बाथटब के निकट मोमबत्तियां जल रहीं थीं।

अनीता ने लाइट बंद कर दी।

मोमबत्ती की धीमी रोशनी में दोनों गुलाब की पत्तियों वाले पानी के टब में उतरे।

प्रकाश ने अनीता को खुशी से चूम लिया; दोनों पानी में लेट गए।

अनीता नागिन की तरह प्रकाश से लिपट गयी. उसके हाथ में प्रकाश का लंड मचल रहा था।

प्रकाश ने अपनी छाती से अनीता के मम्में भींच रखे थे। दोनों के होंठ मिले हुए थे।
अनीता प्रकाश की जीभ अपनी जीभ से चुभला रही थी। अनीता ने हाथ बढ़ाकर बीयर की केन उठा ली।

दोनों आधे घंटे तक एक दूसरे के बदन को चूमते चूसते हुए बीयर पीते रहे। अब बाहर निकलने का समय था।

अनीता उठी और बोली- मुझे पेशाब जाना है।
प्रकाश बोला- मेरे ऊपर ही कर दो।

अनीता झिझकी मगर दोनों को ही एक दूसरे पर पेशाब करना अच्छा लगता था।
उसने प्रकाश के कंधे पर अपना पैर टिका लिया और अपनी अमृत वर्षा प्रकाश के ऊपर कर दी।
पेशाब की गर्म धारा प्रकाश के चेहरे और सीने पर पड़ने लगी।

प्रकाश अनीता के पेशाब से पूरा नहा गया।
उसने बाद में अनीता की चूत को चूमा और खड़ा हो गया और दोनों चिपट कर शावर लेकर बाहर आए। दोनों ने सिर्फ टॉवल लपेट रखा था।

अनीता ने फटाफट डिनर माइक्रोवेव में गर्म किया और टेबल पर ले आई।
प्रकाश ने उसका टॉवल खींच दिया तो अनीता ने प्रकाश को भी नंगा कर दिया।
टॉवल तो उतरने ही थे क्योंकि गीले टॉवल पहन कर बैठते कैसे।

फिर अनीता उसे खाना परोसने के लिए जैसे ही झुकी, प्रकाश ने उसके मम्में मुँह में ले लिए।
अनीता बोली- ऐसे तो डिनर कर लिया हमने डिनर!! फटाफट डिनर कर लो, फिर बेड पर देखूँगी तुम्हारी जवानी।

डिनर निबटा कर प्रकाश बेड रूम में चला गया और अनीता टेबल उठा कर किचन को व्यवस्थित करने लगी।

तभी प्रकाश आ गया।
उसने अनीता को गोदी में उठाकर ले जाने की कोशिश की तो अनीता बोली- अब मैं मोटी हो गयी हूँ; कल से जिम करूंगी। दो महीने बाद उठा कर ले जाना।

वो दोनों बेड रूम में चले गए।
प्रकाश ने अनीता को आहिस्ता से लिटाया और उसके मम्में चूसने लगा।

अनीता भी मचल उठी; उसने प्रकाश के कान के पीछे जीभ से चाटना शुरू किया।

प्रकाश और उत्तेजित हो गया और नीचे होकर उसने अनीता की टांगों के बीच में अपना मुंह दे दिया।
अनीता इस सेक्स सेशन को जल्दी खत्म करना चाहती थी क्योंकि दस बज चुके थे। ज्यादा लेट होने से प्रकाश सुबह घूमने नहीं जाता और फिर उसका जिम भी शुरू नहीं हो पाता।

तो अनीता ने प्रकाश को नीचे लिटाया और उसका लंड पूरा मुंह में लेकर सुपारा खूब दबाकर चूसने लगी।
प्रकाश को तो लगा कि जैसे वो अनीता के मुंह में ही छूट जाएगा। उसने अनीता से कहा कि अंदर करना है।

अनीता प्रकाश के ऊपर चढ़ गयी और खूब ज़ोर ज़ोर से उछलने लगी।
वो बहुत गंदे बोल लेती थी तो वो बोली- ले जानी … मेरी चिकनी चूत का मजा ले। देख आज तेरा लंड का जूस निकालती हूँ अभी! घुसा अपने लंड को जितना घुसा सकता है … नीचे से धक्के लगा मेरे शेर … और ज़ोर से … आज फाड़ दे मेरी मुनिया को। बुझा दे प्यास … देखूँ ताकत तुम्हारे लौड़े की।

थोड़ी ही देर में ही प्रकाश का लावा फूट गया।
अनीता झटके से उसके ऊपर से उतरी और पास रखे टॉवल से अपनी चूत से निकलते वीर्य को पौंछा और वाशरूम में चली गयी।

अनीता को इतना ही चाहिए था. हालांकि उसकी चूत प्यासी थी लेकिन अब वो दूसरे राउंड के प्लान में रात काली नहीं करना चाहती थी.

सुबह प्रकाश 6 बजे घूमने चला गया।

उसके जाते ही अनीता ने रमण को फोन मिलाया।
रमण उठा हुआ था और बोला- आ जाइए।

अनीता ने टी शर्ट और लेगिंग पहनी। चेहरे मोहरे को चमकाया और हल्का सा बॉडी स्प्रे लगाकर ऊपर चली गयी।

रमण ने मुस्कराकर उसका स्वागत किया। रमण ने पहले तो उसे वार्म-अप एक्सर्साइज़ कारवाई फिर अपने साथ योगाभ्यास करने को कहा।

अनीता रमण को देखकर योग करने लगी।
वह रमण से बोली- मुझे तो वजन कम करना है, तो उसके लिए एक्सर्साइज़ बताओ।

रमण ने उसे खड़े होकर और बैठकर बिना कमर मोड़े पंजे छूने की एक्सर्साइज़ बताई।
अनीता उसे नहीं कर पा रही थी तो रमण ने बड़े संकोच से कहा- भाभी जी, मुझे आपकी कमर और पेट को थामना होगा।

इस पर अनीता मुस्करा कर बोली- आप कहीं भी छू लो, मुझे कोई ऐतराज नहीं। बस आप मुझे अनीता कहो, भाभी जी नहीं।
दोनों में ये तय हुआ कि वो एक दूसरे का नाम लेकर ही बुलाएंगे.

अब रमण ने अनीता की कमर को और घुटनों को मुड़ने से रोकने के लिए साधा।
अनीता को व्यायाम करने में दिक्कत तो हो रही थी, मगर पहले दिन के हिसाब से वो अच्छा कर पा रही थी।

उसको लेगिंग में कसाव लग रहा था। उसने रमण से पूछा कि क्या वो शॉर्ट्स पहन ले?
रमण ने कहा कि इससे बढ़िया क्या है अगर उसको संकोच नहीं है तो।

अनीता भागकर नीचे गयी और एक शॉर्ट्स पहन आई।
शॉर्ट्स ज्यादा टाइट तो नहीं थी, पर ज्यादा ढीली भी नहीं थी।
पर अब रमण को उसकी पैंटी की झलक मिल जाती थी।

अनीता थोड़ी देर में थक गयी तो वो आराम करने बैठ गयी।
रमण ने उसे कुछ मर्दाना वर्जिश और योगासन करके दिखाये।

थोड़ी देर में ही रमण का शरीर पसीने से चमकने लगा। अनीता को उसकी मर्दानगी भा रही थी।

अनीता ने उससे कुछ हाथों की एक्सर्साइज़ पूछी तो रमण ने उसे बाहें चारों ओर घुमाने की एक्सर्साइज़ बताई।

अनीता से हो नहीं पा रहा था, तो रमण ने पीछे से अनीता की बांहों को पकड़ा और खुद ही करवाने लगा।
अब उसके और अनीता के बदन आपस में एक दूसरे को छू रहे थे.

अनीता को उसके लंड का उभार भी महसूस हुआ।
जब अनीता को लगा कि वो अपना आपा खो देगी तो वो रमण से बोली- अब बस … अब थक गयी मैं!

रमण ने उसे सुस्ताने को कहा और दो गिलास में जूस ले आया।
अनीता नीचे ही बैठ गयी।

प्रकाश के आने का समय हो रहा था। अनीता ने रमण से इजाज़त ली और नीचे चली गयी।

उसने सबसे पहले तो शॉर्ट्स बदली, फिर सिगरेट सुलगाई।

अगले दिन सुबह अनीता को पैरों और जांघों में दर्द सा महसूस हुआ, मगर फिर भी वो ऊपर चली गयी।
आज उसने एक कॉटन की टी शर्ट डाली, बिना ब्रा के, मगर शॉर्ट्स के नीचे पैंटी पहन ली।

वार्म-अप के दौरान उसके मम्में झूल रहे थे, इसका उसे ध्यान ही नहीं रहा था।
रमण ने उसकी बात समझ ली और कहा- तुम एक स्पोर्ट्स ब्रा ले लेना।
अनीता बोली- ठीक है, जब भी बाजार जाऊँगी तब ले लूँगी।

इस पर रमण बोला- मुझे साइज़ बता दो मैं लेता आऊँगा।
साइज की बात सुनकर अनीता के गाल लाल हो गए तो रमण हंस दिया।
अनीता हाथों की एक्सर्साइज़ कर रही थी और रमण ट्रेडमिल पर था।

रमण काफी पहले से कसरत कर रहा था, तो उसे पसीना आ गया था।

उसने अनीता को कल की तरह पहले पीछे से हाथ पकड़ कर करवाया, फिर वो आगे आ गया और अनीता के दोनों हाथ मिला कर कसरत कराई।

अनीता ज्यादा व्यायाम के कारण अपना संतुलन खो बैठी और रमण की बांहों में जा गिरी।
उसके मम्में रमण की बलिष्ठ छाती से जा टकराए।

रमण ने उसे संभाला और आराम से नीचे बैठाया।
अनीता ने सॉरी बोलते हुए कहा कि आज उसकी जांघों में बहुत दर्द हो रहा है।

रमण ने उससे कहा कि अगर वो बुरा न माने तो वो मसाज दे सकता है।
अनीता तो यही चाहती थी। वो ना-नुकुर करते हुए लेट गयी।

रमण ने एक मसाज ऑइल से उसकी गोरी गोरी जांघों को मसाज देना शुरू किया।

अनीता को मजा आ रहा था, रमण का हाथ ऊपर जाने की हिम्मत नहीं कर रहा था।

रमण ने अनीता के कंधों को भी टी शर्ट के ऊपर से दबाया।
अनीता ने एक कातिलाना स्माइल देकर कहा कि तुम मसाज तो बहुत अच्छी कर लेते हो, आज छुट्टी ले लो, दिन में ढंग से कर देना।

इतना कहकर अनीता ने रमण के बाल पकड़कर उसे नीचे खींचा और उसके होंठों पर अपने होंठ मिला दिये।
रमण तो जैसे पागल हो गया।

वो उसकी टी शर्ट के अंदर हाथ डालना चाह रहा था मगर अनीता ने रोक दिया.
वो बोली- प्रकाश के आने का वक़्त हो गया। मुझे शॉर्ट्स भी चेंज करनी है।

ये बोलकर अनीता नीचे चली गयी और रमण इस जुगाड़ में लग गया कि कैसे आज की छुट्टी ली जाये।

तभी अनीता का फोन रमण के पास आया और वो बोली- आज रात को प्रकाश की ड्रिंक पार्टी है घर पर, तो मैं प्रकाश को झूठ बोल दूंगी मुझे मूवी देखने जाना है. फिर मैं किसी भी तरह से छुपकर बाहर के जीने से ऊपर आ जाऊंगी.

रमण ये सुनकर खुश हो गया. फिर दिन में अनीता ने भरपूर नींद ली। उसे मालूम था कि आज रात को मसाज का केवल बहाना ही है, रमण उसे चोदे बिना नहीं छोड़ेगा.

अनीता को चिंता थी तो इस बात की कि बिना कॉन्डम के चुदाई वो करवाएगी कैसे?
और रमण से वो कैसे कहे कि कॉन्डम लेकर आना?
खुद बाज़ार से कॉन्डोम लाने में उसे शर्म आती थी।

अब जो होगा देखा जाएगा, ये सोच कर उसने दिमाग शांत किया।
असल में जब औरत बेवफाई करके चुदासी हो जाये तो वो हर तरह का खतरा लेने को तैयार हो जाती है।

शाम को प्रकाश शॉप से टाइम से आ गया।
मूड बढ़िया था, आज दारूबाजी जो होनी थी।

अनीता जींस और टॉप में तैयार थी और बोली- मैं निकल रही हूँ. तुम्हारी टेबल और स्नैक्स तयार हैं। मैंने मेड को बोल दिया है कि वो आज रात 9 बजे तक रुक जाएगी, तुम लोगों के लिए गर्म पकौड़ी सेक देगी। विजय भैया जब जाएँ तब मुझे फोन कर देना मैं तुरंत आ जाऊँगी।

ये बोलकर वो निकल पड़ी।
उसका दिल ज़ोर से धडक रहा था। उसने एक शॉल रख लिया था।

एक मॉल में थोड़ी देर घूम घामकर उसने रमण को फोन किया, वो उसे आकर गाड़ी में ले गया।

घर पहुँचकर रमण ने जीना खोला और बाहर की लाइट बंद कर दी।
अनीता शॉल लपेटकर तुरंत जीने से ऊपर चली गयी।

बाहर विजय की गाड़ी भी खड़ी थी, मगर उसके ड्राइवर ने उनकी ओर ध्यान नहीं दिया।
थोड़ी देर में रमण भी गाड़ी खड़ी करके आ गया।

इस बीच अनीता ने कामवाली को फोन करके पूछ लिया कि विजय आ गया है और उन दोनों की पार्टी चालू है।

रमण ने आते ही अनीता को अपनी बांहों में भींच लिया।
अनीता कटी बेल की तरह उससे लिपट गयी; दोनों के होंठ मिल गए; दोनों एक दूसरे में समा जाने को बेताब थे।

अनीता को अंदाज़ा नहीं था, रमण भी फ्रेंच किस में उसका पूरा साथ दे रहा था।
थोड़ी देर चिपटम चिपटा होने के बाद दोनों अलग हुए।

जल्दी तो उन्हें थी नहीं; अनीता ने कह दिया था कि रात दस बजे तक का समय उनके पास है।

रमण ने बीयर की केन निकाली।
अनीता ने अपने पर्स से सिगरेट निकालकर और सुलगा कर रमण को भी पेश की।
रमण के लिए ये एक अचंभा था। वो सिगरेट पी लेता था, मगर शौकीन नहीं था।
आज तो अनीता उसे अपना मूत भी पिलाती तो वो पी लेता, सिगरेट क्या चीज है।

रमण ने सिगरेट ले ली। अनीता ने आगे झुककर रमण के होंठों से लगी सिगरेट सुलगवा दी।

एक दो कश लगाने के बाद रमण ने फिर अनीता को गले के पास और कान के पीछे चूमना शुरू किया।
वो अनीता के हर अंग को चूमना चाहता था।

उसने अनीता का टॉप उठाया और नीचे से हाथ डालकर उसके पेट पर हाथ फिराने लगा।

अनीता समझ गयी कि अब रमण का लंड बेकाबू हो रहा है।
उसने हाथ नीचे करके उसे टटोला तो वो तो रमण के ट्रेक पैंट से बाहर आने को बेताब था।

अनीता ने महसूस किया कि रमण ने अंदर अंडरवियर नहीं पहना है।
लंड को अनीता ने उसकी लोअर के ऊपर से ही दबा दिया.

रमण को हरी झंडी मिल गयी.
वो अनीता को बेड पर ले आया और दोनों लेटकर फिर से एक दूसरे के होंठों को पीने लगे.

रमण ने अनीता का टॉप निकाल दिया और धीरे से जींस भी नीचे कर दी।
गोरे और सुनहरे बदन की मल्लिका अनीता रेड ब्रा-पैंटी सेट में कयामत लग रही थी।

पैरों में सुनहरी पायल … होंठों पर लाल लिपस्टिक, चेहरे पर लाली … कुल मिलाकर रमण का नसीब आज छप्पर फाड़ कर आया था … बाकी तो उसके लंड को ही फाड़ना था।

अनीता ने रमण के कपड़े खींच दिये।

रमण तो पूरी तैयारी में था।
उसने लोअर व टीशर्ट ही पहनी हुई थी. उसका कसा हुआ बलिष्ठ बदन चमक रहा था।

रमण ने अनीता की ब्रा को नीचे करके एक निप्पल निकाला और दबा कर चूसने लगा।
अब अनीता ने खुद ही दूसरा निप्पल निकाल कर कहा- इसे कौन चूसेगा?

रमण ने अनीता की ब्रा और पैंटी दोनों उतार दीं।
अब हुस्न की मल्लिका अनीता निपट नंगी रमण के आगोश में थी।

रमण बारी बारी से दोनों निप्पल चूसने लगा और अपना हाथ वो नीचे अनीता की चूत की ओर ले गया।
चिकनी और मखमली चूत में गंगा जमुना बह रही थी।

रमण ने आहिस्ता से एक उंगली अनीता की रेशमी चूत में अंदर कर दी।
उंगली चूत में जाते ही अनीता सिहर गयी।

रमण ने अपनी जीभ से अनीता की जीभ चुभलाने के साथ साथ अपनी उंगली की गति बढ़ा दी।

थोड़ी देर में अनीता नीचे सरकी और रमण का लंड अपने मुंह में ले लिया।
रमण को इसकी उम्मीद नहीं थी।

अनीता ने उसकी पूरी चमड़ी नीचे करके उसके सुपारे को थूक में लपेट कर टोपे की उँगलियों से मालिश शुरू की।

रमण तो एक मिनट में ही पागल हो गया।
वो अनीता से गिड़गिड़ाने लगा कि वो उसका लंड छोड़ दे वर्ना माल उसके हाथ या मुंह में ही निकल जाएगा।

अनीता ने हंस कर कहा कि बस इतना ही दम है तुम्हारे औज़ार में? चलो अब मेरी मुनिया को चूस दो।

कहकर उसने अपनी चूत रमण के मुंह की तरफ करके टांगें चौड़ी कर दीं।
रमण ने अपनी जीभ पूरी घुसा दी उसकी चूत में।

अनीता ने अपनी पतली पतली उँगलियों से मेरी प्यासी चुत का मुंह और चौड़ा कर दिया।
रमण ने भी जितना हो सकता था उतनी देर तक उसकी चूत को खूब चूसा।

चूसते चूसते उसने थोड़ा थूक चूत से बाहर आने दिया और अनीता की गांड में उस थूक की मदद से एक उंगली घुसानी चाही।

अनीता हटकर बोली- मेरी प्यासी चुत ही फाड़ लो, गांड की सोचो भी मत!
अब रमण ने उसकी टांगें ऊपर करके चौड़ी कर दीं और अपना फनफनाता लंड उसकी चूत में पेल दिया।

लंड चूत में जाते ही अनीता कसमसा उठी।
रमण का लंड उसके कसरती जिस्म की तरह ही मोटा और सॉलिड था। अनीता को लगा कि किसी हब्शी का लंड उसने ले लिया है।

अब रमण ने उसकी पायलों के पास से उसकी टांगों को पकड़ कर चौड़ी किया और अपने धक्के और गहरे कर दिये।

अनीता अपनी गंदी जुबान पर पूरा काबू रखे हुए थी; न ही वो ज्यादा सीत्कारें लगा रही थीं।
नीचे से प्रकाश और विजय के ठहाके उसे सुनाई दे रहे दे।

वाह री प्रकाश की किस्मत … उसकी बीवी किसी गैर मर्द से चुदवा रही थी।
इधर वो सीत्कारें निकाल रही थी; उधर उसका पति दारू के नशे में इन सबसे अन्जान ठहाके लगा रहा था।

रमण ने अनीता को खूब पेला.
अब उसने अपने हाथ उसकी टांगों से हटाकर उसके मम्मों पर टिका दिये थे, मसल मसल कर उसने उन्हें लाल कर दिया था।

अब अनीता की बारी थी।
उसने रमण को नीचे किया और उसके लंड के ऊपर चढ़ गयी। उसने अपने हाथ रमण के सीने पर टिकाकर उसकी जमकर घुड़सवारी की।
रमण का मूसल लंड उसकी बच्चेदानी को स्पर्श कर रहा था।

तभी अनीता को कॉन्डोम का ध्यान आया।

उसने रमण से कहा कि उन्होंने कोई सावधानी तो ली नहीं, कोई गड़बड़ हो गयी तो?
रमण बोला- आगे से मैं कॉन्डोम ले लूँगा, मगर आज तो दवाई ही लेनी होगी।

अनीता बेफिक्र होकर और उछलने लगी।
अनीता अब रमण से चुदते हुए पूरा मजा ले रही थी.
कुछ देर के बाद वो ज़ोर से बोली- जानू … मेरा होने वाला है.

रमण बोला- मेरा भी होने वाला है, अंदर ही निकाल दूँ?
अनीता घबरा गयी और उछलकर हट गयी।
इतनी देर में ही रमण का फव्वारा छूट गया और उसी के लंड के चारों ओर गिर गया।

रमण ने चौंककर अनीता से कहा- ये क्या किया तुमने?
अनीता बोली- प्रकाश का ऑपरेशन हो चुका है, अगर कोई गड़बड़ हो गयी तो मेरी ज़िंदगी बर्बाद हो जाएगी। प्रकाश मुझे घर से निकाल देगा.

रमण को उसकी चिंता समझ आई मगर अब भी अनीता को दवाई तो लेनी ही थी।
दस बज चुके थे।

तभी प्रकाश का फोन आ गया। वो कह रहा था कि थोड़ी देर में विजय चला जाएगा।
उसकी आवाज़ लड़खड़ा रही थी।
वो बोली- आती हूँ।

अनीता ने रमण को एक जोरदार किस किया।
रमण बोला- एक राउंड और प्लीज!!

मन तो अनीता का भी कर रहा था लेकिन अब उसको प्रकाश का फोन आ चुका था इसलिए वो दस मिनट से ज्यादा लेट नहीं हो सकती थी. वहां से जाना उसकी मजबूरी थी.

अनीता बोली- अभी नहीं, अब कल करेंगे. मुझे जाना है. तुम सो जाना। कल बात करते हैं.

दोस्तो, ये रोचक सेक्स कहानी आपको पसंद आई होगी. अपने संदेशों में जरूर लिखें. आप कहानी पर कमेंट करना बिल्कुल न भूलें.
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मेरी प्यासी चुत की कहानी का अगला भाग: योग के बहाने भोग तक का सफर- 3

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