मासूम बुर, बेदर्द लौड़ा

(Masoom Bur Bedard Lauda)

माइसेल्फ 2019-11-01 Comments

आदाब दोस्तो, एक बार फिर से आपके लिए एक गरमागरम कहानी लेकर हाज़िर हूँ।
मेरी पिछली कहानियों के बारे में आपसे बड़ी प्रशंसा मिली, प्यार मिला, उसका धन्यवाद।
मेरी पिछली कहानी थी
औरतों की गांड मारने की ललक
तो चलिए, हम इस नयी कहानी की शुरुआत करते हैं। उम्मीद है मेरी पिछली कहानियों की तरह यह कहानी भी आपको पसंद आएगी, और भरपूर उत्तेजना देगी।

मैं शहर का एक रसूखदार व्यक्ति हूँ, और लोग अक्सर मेरे पास अपनी समस्या लेकर आते हैं। ऐसे ही एक लड़की राम्या मेरे पास आई। दरअसल उसे उसके गाँव की मुखिया लेकर मेरे पास आई थी।
मुखिया को चुनाव में काफी मदद की थी मैंने, और वह जीत गई थी। तब से वह मेरी मुरीद हो गई थी और उसने मुझे अपनी चूत चोदने का मौक़ा दिया था। तब से उसके मेरे संबंध बन गए थे और हर महीने दो महीने में हम मिलकर चुदाई करते थे। वह मेरे लिए कभी कभार कोई लड़की या औरत को भी लेकर आती थी। जो मज़े के लिए चुदने को तैयार हों।

राम्या एक लड़के के साथ भाग गई थी पर उसके परिवार वालों ने उसे ढूंढ निकाला था और तीसरे दिन उसे वापस ले आए थे. क्योंकि एक सप्ताह बाद उसके भाई की शादी थी।

पर हुआ कुछ यूं कि उसकी भाभी ने आते ही राम्या पर ज़ुल्म करना शुरू कर दिया। उसके घर से भागने, अपने प्रेमी के साथ रंगरलियाँ मनाने और बेशर्मों की तरह फिर से घर समाज में रहने की बात को लेकर भाई-भाभी दोनों उसे ताने मारते, गालियाँ देते, घर और खेत के सारे काम करवाते थे. विरोध करने पर पीटते भी थे।

उसके पिता ने मरने से पहले एक अच्छा काम किया था कि बेटे के साथ साथ बेटी के नाम भी खेती की ज़मीन कर दी थी। ताकि बेटा न भी पूछे, तो बेटी खेती करके अपना पेट पाल सके। अब राम्या को खेती करनी थी और अलग रहना था।
पर इसके लिए न उसके पास पैसे थे, न कोई सरकारी मदद!

तो मुखिया उसे मेरे पास लेकर आई थी। उसने राम्या को बताया था कि मैं उसे पैसों के साथ साथ सरकारी मदद भी दिलवा सकता हूँ।
मैं ऐसे लोगों की मदद करता हूँ, ये मेरी फितरत है। तो मैंने राम्या की भी मदद की। उसे खेती के लिए लोन भी दिलवा दिया, खाद और बीज भी।

इस सिलसिले में हमारी कई बार मुलाक़ात हुई। मुखिया के साथ भी, अकेले भी। वह मुझसे काफी खुलकर बातें करने लगी थी और मुझे देखते ही हंस देती थी। उसकी खेती अच्छी हुई थी और उसे काफी मुनाफा भी हुआ था। तो वह मुझसे लिए पैसे लौटाने मेरे घर आई थी।

उस दिन मैं घर पर अकेला था। हमने थोड़ी देर बातचीत की। वह उस दिन काफी खुलकर बोल रही थी। खुश थी, तो उसके चेहरे पर रौनक थी और वह चहक रही थी। उसकी आँखों में मैंने मेरे लिए पसंद की भावना देख ली थी और समझ गया था कि वह मुझसे चुदने को तैयार है।

मैं दीवान पर बैठा था, और वह मेरे सामने कुर्सी पर।
मैंने उससे पूछा कि क्या उसके प्रेमी से वह कभी नहीं मिली, तो उसने बताया कि उसके प्रेमी ने दो दिन उसके साथ मज़े लिए और तीसरे दिन अपने एक दोस्त के साथ सोने को बोला। तब उसे उसके झूठे प्यार का पता चला और वह उसे छोड़कर भाग आई। रास्ते में उसके परिवार वाले मिले, जो उसे ढूंढ रहे थे, तो उनके साथ वह घर लौट गई। उसके बाद उस झूठे प्रेमी से उसने कोई वास्ता नहीं रखा। हालाँकि वह कई बार उसे मनाने आया था।

मैंने राम्या से सीधे पूछ लिया, दो दिन सेक्स का मज़ा चखने के बाद उसे फिर मन नहीं होता?
वह पहले हंसी, फिर सोचते हुए बोली- होता है कभी कभी। पर क्या किया जा सकता है।
मैंने मज़ाक़ किया- कोई पसंद कर लेती।
उसने बेबाकी से कहा- पसंद तो किया है।
मैंने पूछा- किसे?
तो वह बस मुझे देखने लगी, कुछ बोली नहीं।

मैंने कहा- देखो, मैं तो शादीशुदा आदमी हूँ। हमारी ज़ात बिरादरी भी अलग है। मैं तुमसे शादी थोड़ी न कर सकता हूँ। ज़्यादा से ज़्यादा हम मज़े उठा सकते हैं। जब तक तुम चाहो। कोई बंधन नहीं, कोई वादा नहीं। हाँ, मैं तुम्हारी मदद करता रहूँगा, जब भी तुम्हें ज़रूरत हो। चाहे तुम मुझसे संबंध रखो, या न रखो।
उसने कहा- मैं भी शादी करना नहीं चाहती। आपको पाना चाहती हूँ। आपके सिवा कोई मेरी नज़र में आया ही नहीं।

मुझे और क्या चाहिए था, मैंने उसे इशारे से मेरे पास आकर दीवान पर बैठने को कहा। वह आकर मेरी बगल में बैठ गई।

राम्या कोई 20 साल की युवती थी; देहाती, ठेठ देसी। बिना किसी बनावटी मेकअप के भी वह सुंदर लग रही थी। काला रंग, मझोले मम्मे, दुबली थी, पर चूतड़ उभरी हुई थी। क़द छोटा था। कुल मिलाकर उसका शरीर मुझसे आधा था।

एक बार को मैंने सोचा भी कि क्या यह मेरे प्रहार झेल पाएगी?
फिर ख्याल आया, वह कोई कुंवारी कन्या थोड़े ही है, खेली खाई है। हो सकता है उस प्रेमी के अलावा भी कितनों के साथ।

बहरहाल, मैंने उसके गालों पर हाथ फेरा, फिर होंठों पर। धीरे धीरे मैंने उसके कंधों से होते हुए पीठ तक सहलाया।
उसका शरीर थोड़ा सिहरा।

मैं उसके सामने खड़ा हो गया और उसे कंधों से पकड़ कर खड़ा किया।
वह मुझसे लिपट गई।

मैं उसके सारे शरीर पर हाथ फेरने लगा। पीठ सहलाते सहलाते मैंने उसके नितम्बों को सहलाया, दबाया। फिर उसके नितम्बों के बीच उँगलियाँ फेरते फेरते उसकी उसकी गांड से लेकर आगे बुर तक रगड़ते हुए सहलाया।
वह कसमसाने लगी।

अब मैंने उसके जम्पर को ऊपर उठाया, उसने ब्रा की जगह शमीज़ पहन रखी थी। मैंने उसे भी ऊपर उठाया, तो उसकी छोटी, पर कड़क चूचियाँ मेरे सामने नंगी थीं। मैंने उन्हें दोनों हथेलियों से धीरे धीरे मसलना शुरू किया। वह कसमसाने लगी। मैंने उसकी घुंडियों को उँगलियों से दबाया, फिर ज़रा ज़ोर से उसकी चूचियों को मसलने लगा। साथ ही एक हाथ से उसकी गांड को सहलाना जारी रखा।
वह जोश में आ गई और अपने शरीर को मेरे शरीर से रगड़ने लगी। एक हाथ से वह मेरे गाल, गर्दन को सहलाने लगी।

मैंने अपना हाथ उसकी सलवार में डाल दिया, उसने अंदर पैंटी नहीं पहनी थी। मैं हाथ से उसकी गांड और बुर को सहलाने लगा।
वह अब बेचैन होने लगी थी; अपनी टांगों को थोड़ा फैला कर वह मेरे हाथ को अपनी चूत तक पहुँचने की जगह दे रही थी।

उसकी सांसें बहकने लगी थीं। मेरा लंड तनकर खड़ा हो गया था और पैंट पर उसका सख़्त उभर उसके शरीर से रगड़ने लगा था।
अब चुदाई शुरू करने का सही समय था।

मैंने उसे दीवान पर लिटा दिया और एक एक कर उसके सारे कपड़े उतार दिए। उसकी चूत पर छोटे छोटे बाल थे, उसकी क्लाइटोरिस तो दिख रही थी, पर अंदर के होंठ छोटे छोटे थे, और अंदर को दबे हुए थी। चूत बर्गर के बन की तरह काफी उभरी हुई थी।

मैंने बड़ी नज़ाकत से उसकी चूचियों को सहलाया, फिर उसकी चूत पर नरमी से हाथ फेरा।
उसने आँखें बंद कर लीं।

मैंने एक उंगली से उसकी बुर की घुंडी को सहलाया, फिर दो उँगलियों से उसे मसला। उसके शरीर में सिहरन होने लगी।

मैंने धीरे धीरे अपनी एक उंगली उसकी बुर में घुसा दी। उसकी बुर गीली हो रही थी, पर टाइट थी।
धीरे धीरे मैंने उसकी बुर में उंगली अंदर बाहर करना शुरू किया तो उसके गले से ‘ऊँह … उम्म्म …’ की आवाज़ निकलने लगी।

थोड़ी देर उसके सरे शरीर पर हाथ फिरने, उसे गरम करने के बाद मैंने उसे उठाकर बैठा दिया। अब उसके सामने खड़े होकर मैंने अपना पैंट खोला। मेरा आधा खड़ा लंड बाहर निकला, और झटके मारने लगा।
मेरे लंड पर उसकी नज़र पड़ते ही, उसके चेहरे का रंग बदल गया। उसके माथे पे बल पड़ गए, आँखें फ़ैल गईं। उसने हैरत से मेरे चेहरे को देखा, फिर से मेरे लौड़े को; उसके मुंह से बेसाख्ता निकला- ये … ये क्या है?
मैंने ठहाका लगाया और बेबाकी से बोला- ये लौड़ा है … हा हा हा। तुम्हारी भाषा में क्या कहते हैं इसे?

पर मेरे मज़ाक़ से उसे कोई हंसी नहीं आई। वह वैसे ही गंभीर बानी रही। चिंता भरे स्वर में बोली- पर … पर … इतना बड़ा?
मैं फिर से हंसा- अरे मेरी जानेमन, यह तो अभी आधा खड़ा है। पूरा खड़ा होगा तो और बड़ा होगा। इतना ही बड़ा होता है सबका! पागल।

वह फिर भी चिंतित नज़र आई- नहीं, नकुल का तो छोटा था; इससे आधा मोटा।
वह बुदबुदाई।
नकुल उसके प्रेमी का नाम था।

मैंने उसके हाथ को पकड़ा और उसमे अपना लंड थमा दिया।
उसने मेरे लंड के चारों ओर मुट्ठी बांध कर उसकी मोटाई नापी। उसकी मुठ्ठी में मेरा लौड़ा नहीं आया- देखिये, मेरे हाथ में भी नहीं आ रहा है, कितना मोटा है। मैं तो मर जाऊंगी; फट जाएगी मेरी!
“कुछ नहीं होगा।” मैंने कहा- चलो, इसे सहलाओ।
कहते हुए मैंने उसकी मुट्ठी को आगे पीछे किया अपने लंड पर।

तो वह अपने हाथ मेरे लंड पर चलाने लगी। पर उसके चेहरे पर ऐसे भाव साफ नज़र आ रहे थे, जैसे वह सोच रही हो, बेकार में इस आदमी के साथ इतना आगे बढ़ी। कुछ मिनट उसने मेरे लंड को सहलाया, तो मेरा लौड़ा पूरी तरह खड़ा हो गया।

अब उसकी आँखें फट गईं। मैंने देखा कि वह असमंजस में है। इससे पहले कि वह इरादा बदल कर भाग खड़ी हो, मैंने उसकी टांगों को पकड़ कर दीवान के किनारे खींच लिया और उसे इस तरह लिटा दिया कि उसकी चूत मेरे सामने दीवान के किनारे पर रहे। मैंने खड़े खड़े अपने लंड को थूक से गीला किया और उसकी चूत के छेद पर रगड़ने लगा।

उसकी बुर भी गीली हो रही थी तो मैंने उसके छेद पर मेरा सुपारा टिकाया और धीरे से उसे अंदर धकेला। मेरे लंड का सुपारा भी अंदर नहीं घुसा और वह चीख पड़ी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’

मैंने उसके बूब्स को सहलाया, दबाया, उसके गालों को सहलाया, फिर धीरे से लौड़े को उसकी टाइट चूत में अंदर धकेला।
थोड़ा सा लंड अंदर गया और उसके गले से घुटी घुटी सिसकारी निकल गई।

मैंने उसकी टांगों को थोड़ा और फैलाया, लंड को बाहर निकाल कर उसकी छेद पर रगड़ा, ढेर सा थूक अपने लंड पर लगाया, फिर से सुपारे को उसकी छेद पर रगड़ा और ठीक जगह टिका कर अंदर धकेला।
इस बार मेरे सुपारा अंदर चला गया। उसकी बुर सच में बड़ी कसी हुई थी। न जाने साले नकुल ने उसे कैसे चोदा था कि उसकी चूत ज़रा भी खुली नहीं थी।

उसके गले से चीख निकल गई पर उसने अपने होंठों को भींच लिया। मैं धीरे धीरे लंड को अंदर धकेलने लगा। जब मेरा लंड आधा उसकी बुर में घुस गया तो मैं ठहर गया।
उसने जैसे राहत की साँस ली।

थोड़ी देर मैं उसी तरह लंड को स्थिर रखे हुए उसकी चूचियों को सहलाने दबाने लगा, उसके शरीर पर हाथ फेरने लगा।
वह कुछ सामान्य हुई तो मैंने अपने लंड को थोड़ा बाहर खींचा और फिर से अंदर धकेला। उसकी चूत मेरे लंड के चारों ओर शिकंजा कस रही थी। मैंने इस बार उसकी चीखों की परवाह नहीं की और पूरा लंड उसकी चूत में घुसा दिया।

उसका सारा शरीर थरथरा गया; उसने टांगों को खींचते हुए पीछे हटने की कोशिश की पर मैंने उसे सख्ती से पकड़ लिया। थोड़ी देर मैंने उसे राहत दी, फिर धीरे धीरे लंड को अंदर बाहर करने लगा। उसकी चूत गीली होने के बावजूद मेरा लंड मुश्किल से अंदर जा पा रहा था।

कुछ मिनटों तक मैं उसी तरह धीरे धीरे उसे चोदता रहा। फिर जब मैंने देखा कि वह गहरी गहरी सांसें लेने लगी है तो मैंने अपनी रफ़्तार बढ़ाई। मैंने अपने एक पैर को दीवान पर टिकाया और पूरे ज़ोर से लंड को उसकी बुर में ठूंस दिया।

इस बार वह बुरी तरह छटपटाई और अपने हाथ को मेरे पेट पर टिका कर पीछे धकेलने लगी। मैंने लंड को थोड़ा बाहर निकला, फिर ज़ोरदार झटके से अंदर घुसा दिया। अब मैं ज़ोर ज़ोर से उसकी चुदाई करने लगा।

राम्या के गले से अजीब अजीब आवाज़ें निकलने लगीं; उसके माथे पर पसीना चुहचुहा आया; होंठ सूखने लगे और सांसें रुक रुक कर आने लगीं।
मैं उसकी टाइट बुर की मज़े से ठुकाई करने लगा। मेरे लंड को उसकी चूत की तंगी बहुत मज़ा दे रही थी। एक अरसे बाद मुझे ऐसी बुर मिली थी जो कुंवारी चूत जैसी थी।

मैंने चोदन रफ़्तार बढ़ा दी थी और अब खचाखच उसकी बुर को चोद रहा था। चोदते चोदते एक बार मैं थोड़ा रुका, और उसकी टांगों को फैलाते हुए अपने लंड को उसकी चूत में पूरे अंदर तक धकेला। मेरा लौड़ा अंदर उसकी बच्चेदानी तक पहुँच गया. और जब मेरे लंड ने उसकी बच्चेदानी को धक्का लगाया, तो वह दर्द से ज़ोर से चीख पड़ी। साथ ही उसने छटपटा कर अपनी गांड को पीछे खींच लिया, जिससे मेरा लंड बाहर निकल गया।

थोड़ी देर वह बैठ कर लम्बी लम्बी सांसें लेने लगी, जैसे मीलों दौड़ कर आई हो। मेरे लौड़े को वह ऐसे देख रही थी, जैसे वह ज़िंदा बम हो, और उसके कभी भी फट कर सब कुछ उड़ा देने का अंदेशा हो।

मैंने उसे प्यार से पुचकारा, फिर उसे सहलाते हुए फिर से लिटा दिया। फिर से मैंने अपने लौड़े को उसकी बुर पर रगड़ा, और इस बार बिना नरमी बरते उसकी छेद में झटके से घुसेड़ दिया। अब मेरा जोश सातवें आसमान पर था, इसलिए मैं पूरी रफ्तार से उसकी मासूम बुर को चोदने लगा।

हमारे शरीर के टकराने से ‘फट … फट’ की आवाज़ें निकलने लगी थीं। उसकी बुर से लगातार पानी झर रहा था। अब उसकी बुर कसने लगी थी मेरे लंड के इर्द गिर्द। मतलब उसका चरम आने वाला था।
तो मैंने एक उंगली से उसकी बुर की लिबलिबी को सहलाते हुए लय के साथ उसकी बुर में लंड पेलना जारी रखा।

थोड़ी देर में ही वह सर धुनने लगी; उसके होंठों से ऊँह उम्म्म हम्प जैसे आवाज़ें निकलने लगीं, सांसें धौकनी की तरह चलने लगी, और वह अपनी टांगों को सिकोड़ने लगी। साथ ही उसने मुझे धकेल कर अलग करना चाहा, पर मैं बिना रुके उसे चोदता रहा।

वह मुझे रुकने को बोलने लगी पर उसके होंठों से आवाज़ नहीं निकल पाई।
मैं कहाँ रुकने वाला था, घपाघप उसकी मासूम बुर में अपना बेदर्द लौड़ा पेलता चला गया।

अचानक जैसे उसके शरीर में बिजली दौड़ गई और उसकी चूत से ढेर सा पानी फव्वारे की तरह निकला। मेरा लंड अपने आप बाहर निकल गया। दरअसल उसकी बुर मेरे लंड की मार सह नहीं पाई, और उसका पेशाब निकल गया था।

मैंने परवाह न करते हुए फिर से उसकी बुर में लौड़ा डाल दिया और पूरे जोश से उसकी चुदाई करने लगा। अब उसकी चूत के ऊपर का पेट का हिस्सा फूलने पिचकने लगा था, जिससे ज़ाहिर था कि वह झड़ रही है। उसके गले से अजीब अजीब आवाजें निकलने लगीं और सारा शरीर ऐंठने लगा।

मैंने बुर चोदन जारी रखा। उसकी चूत मेरे लंड पर इतनी ज़ोर से कसने लगी कि उसका अंदर बाहर होना मुश्किल लग रहा था।
और इस कारण मेरा भी चरम आने लगा था।

आखिर कुछ मिनट और चोदने के बाद मेरा चरम आ गया। मैंने अपने लंड को उसकी बुर से बाहर खींचा और गुर्राहट के साथ अपने हाथ से रगड़ने लगा। मेरे लंड से सफ़ेद गाढ़ा रस निकल कर उसके पेट पर गिरने लगा। मेरी पिचकारी से कुछ हिस्सा उसके चेहरे पर भी गिरा।

मेरा रस निकल गया तो मैं निढाल होकर उसकी बगल में लेट गया। दोनों काफी देर तक हांफते रहे।
थोड़ी देर आराम करने के बाद दोनों उठे। मैंने मुस्कुरा कर उसके गालों को सहलाया, बालों में हाथ फेरा।
तो वह भी मुस्कुराई।
मैंने पूछा- कैसा लगा?
उसने मेरे लंड को देख कर कहा- बहुत बेदर्द है ये!

मैंने शरारत से पूछा- ये कौन?
सकुचाते हुए वह बोली- ये … ये … ये … आपका … लौ … लौ … लौड़ा! और वह अपने कपड़े लेकर बाथरूम की तरफ दौड़ गई।

कपड़े पहन कर वह बाहर आई। मैं भी कपड़े पहन चुका था।
जाते जाते वह बोली- बहुत दर्द हुआ। पर बहुत अच्छा लगा। फिर आऊंगी।

उसके बाद 2 सालों तक हमारा सम्पर्क रहा। कई बार मैंने उसे चोदा। हर बार वह उसी तरह छटपटाती, पर फिर भी मुझसे चुदने की उसकी ललक काम नहीं हुई।
दोस्तो, आपको मेरी यह कहानी कैसे लगी, ज़रूर बताइएगा। अगली बार फिर से हाज़िर होऊंगा एक नहीं कहानी के साथ।
धन्यवाद।
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