बॉय से कॉलबॉय का सफर-4

(Hindi Chut Kahani: Boy Se Callboy Ka Safar Part-4)

मेरी कामुकता से भरपूर हिंदी चुत कहानी के पिछले भाग
बॉय से कॉलबॉय का सफर-3
में अभी तक आपने पढ़ा..

मैं मधु के घर उसका मामा का लड़का बन कर पहुँचा और मैंने मधु की तरफ देखा तो देखता ही रह गया क्योंकि अब तो वो कॉलेज टाइम से भी ज्यादा सुन्दर लग रही थी। तब बिल्कुल पतली सी थी.. लेकिन अब उसका शरीर बिल्कुल फिट था। उसने हल्के गुलाबी रंग की पारदर्शी साड़ी पहन रखी थी जो उसकी सुन्दरता में चार चाँद लगा रही थी। ब्लाऊज गहरे गले का होने के कारण उसकी लगभग 34 इंच की आधी चूचियां साड़ी से साफ दिख रही थीं; मेरा तो देख कर बुरा हाल हो रहा था और चूचियों से नजर ही नहीं हट रही थी।

मधु ने मेरा हाथ पकड़ा और धीरे से बोली- क्या देख रहे हो?
मैंने हाथ उसकी चूचियों पर रख कर बोला- इन्हें।
मधु एकदम से चिहुंक उठी।

अब आगे..

मेरे हाथ रखते ही मधु पीछे को हट गई और बोली- धत बेशर्म..
उसके कहने का अन्दाज इतना मोहक था.. कि मेरी जान सी निकल गई।

अब जाकर कहीं मैंने उसके चेहरे की तरफ गौर से देखा। उसका चेहरा शर्म से बिल्कुल लाल हो गया और उसके होंठों पर साड़ी की मैचिंग की लिपिस्टिक लगी थी। कुल मिलाकर उसकी तारीफ के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं।

मैं बोला- इसमें बेशर्म वाली कौन सी बात है?
मधु बोली- क्यों.. अपनी दीदी को गन्दी नजर से देखते हो.. शर्म की बात तो है।
“ठीक है नहीं देखूगा.. पर दीदी से गले तो लग सकता हूँ।”

कहते हुए एक हाथ उसकी कमर में और गर्दन में डालकर सीने से लगा लिया। मधु की लम्बाई लगभग मेरे ही बराबर थी.. इसलिए उसकी चूचियां बिल्कुल मेरे सीने से दब गईं। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं मखमल के तकिया या रजाई से लिपटा हूँ। मैं अपने होंठ उसकी गर्दन पर रख दिए। उसके बदन की खुशबू से मुझे नशा सा चढ़ गया और ये भी भूल गया कि हम अभी गेट पर ही खड़े हैं। मेरा उसे छोड़ने का मन ही नहीं कर रहा था और मैं उसे बाँहों में भींचता ही जा रहा था। मेरा लण्ड खड़ा होकर उसकी जाँघों में दब रहा था। शायद मधु को भी महसूस हो रहा था।

वो कसमसा के धीरे से बोली- राज छोड़ो, कोई देख लेगा।
अब मुझे कुछ होश सा आया और अलग हो गया। उसकी तरफ देखा तो चेहरा बिल्कुल लाल हो रहा था और शर्म के कारण आँखें नीचे झुकाये खड़ी थी।
मैं उसके मासूम से चेहरे को देखता ही रहा।

तभी अन्दर से आवाज आई- बेटी, क्या दरवाजे पर ही सारी बात कर लोगी.. या अपने भाई को अन्दर भी बुलाओगी।
मधु बोली- माँ जी मैंने तो बोला.. पर इन्होंने ही बातों में लगा लिया।
वो मुस्कराने लगी।

मुझे ऐसा लग रहा था.. जैसे कहानियों से कोई परी निकलकर मेरे सामने आ गई हो।
मधु ने बैग उठाया और बोली- माँ जी उस कमरे में हैं.. तुम चलो मैं आती हूँ।
और वो आगे चल दी।
मैं बोला- वाशरूम बताओ.. मेरे “इसका” बुरा हाल है।

मैं लण्ड की तरफ इशारा करते हुए बोला। जैसे ही मधु ने मेरी उंगली के इशारे की तरफ देखा.. तो शर्मा कर मुँह फेर लिया।
उसने नौकरानी को आवाज लगाई।

नौकरानी- जी दीदी।
“भईया को वाशरूम बता दो।”
“जी…”

नौकरानी मेरे आगे-आगे चल दी। मैं नौकरानी के पीछे पीछे चल दिया। वो बता कर वापिस आ गई। मैंने जल्दी से मुठ्ठ मारी और हाथ-मुँह धो कर बाहर आ गया। इसके बाद मैं मधु के बताए कमरे में चला गया.. जहाँ उसकी सास थीं।

मैंने उनके पैर छुए और हाल-चाल पूछा।
उन्होंने बताया- आज सुबह मैं बाथरूम में फिसल गई.. जिससे मेरे पैर में मोच आ गई है.. और मैं अब खड़ी भी नहीं हो पा रही हूँ।

यह सुनकर मैं खुश था कि चलो ये भी ठीक हुआ। अब इस बात का भी कोई डर नहीं कि ये हमें डिस्टर्ब करेंगी.. क्योंकि वो बिस्तर से ही नहीं उठ सकती थीं। थोड़ी देर इधर-उधर की बातें की, जब तक मधु चाय-नाश्ता ले आई और हमारे पास बैठकर बातें करने लगी।

थोड़ी देर बाद मैं बोला- मैं सफर से थक गया हूँ.. तो थोड़ा आराम कर लेता हूँ।
सास बोली- हाँ बेटा, तुम आराम करो।
मधु बोली- चलो.. मैं आपका रूम दिखा देती हूँ। मैंने अपने कमरे के साइड वाले कमरे में ही आपका इन्तजाम किया है।

वो जल्दी से खड़ी होकर चल दी। मैं भी उसके पीछे चल दिया। अब मेरा ध्यान सिर्फ उसके चूतड़ों पर था.. जो उसके चलने से मटक से रहे थे। मेरा दिल कर रहा था कि पकड़कर मसल दूँ। ये सोचते सोचते मेरा लण्ड फिर खड़ा हो गया।

वो पहली मन्जिल पर एक कमरे के सामने रुकी और बोली- ये है आपका रूम.. अब आप आराम कीजिए और किसी चीज की जरूरत हो, तो मुझे बताना।
मैं बोला- एक चीज की जरूरत है।
“क्या?”
मैं उसके उठे हुए चूचों पर हाथ रखते हुए बोला- इनकी।
वो शर्माते हुए बोली- बहुत बेशर्म हो गए हो आप।
मैं बोला- यार मैं तो हूँ.. पर तुम्हें भी बना दूँगा।
यह कहते हुए मैंने लण्ड को उसकी गाण्ड पर चिपका दिया और हाथ आगे ले जाकर पेट को सहलाने लगा।

वो बोली- जनाब थोड़ा वेट करो.. इतनी जल्दी क्या है।
मैं बोला- मैं तो कर लूँ.. पर इसका क्या.. जो तुम्हें देखते ही खड़ा हो जाता है।
ये कहते हुए लण्ड को गाण्ड पर दबा दिया और गर्दन पर चुम्बन करने लगा।

वो बोली- राज छोड़ो.. कोई आ जाएगा।
मैंने एक हाथ से दरवाजा खोला और वैसे ही चिपके हुए मधु को अन्दर कमरे में ले आया और दरवाजा बन्द कर दिया।
वो बोली- राज अभी नहीं बाद में.. मैं कहीं भागी नहीं जा रही।
मैं बोला- नहीं.. मैं दोबारा मुठ्ठ नहीं मार सकता।

मैंने उसे दीवार से लगा कर खड़ा कर दिया। शायद उसे भी मजा आ रहा था इसलिए ज्यादा विरोध नहीं कर रही थी। मैंने उसके दोनों हाथों को दीवार से लगा कर ऊपर करके पकड़ लिए.. जिससे उसकी चूचियां बाहर को उभर आईं और बिल्कुल उसके चेहरे के पास अपना चेहरा ले गया।

अब उसकी चूचियां मेरी छाती से थोड़ा दब गईं; उसकी साँसें तेज होती जा रही थीं.. जिससे चूचियां ऊपर-नीचे हो रही थीं। चूचियां साँस के साथ ऊपर होतीं.. तो मेरी छाती से और ज्यादा दब जातीं। मुझे बहुत मजा आ रहा था; उसका चेहरा बिल्कुल लाल हो रहा था। मैं उसकी आँखों में देखने लगा.. तो उसने शर्म से आँखें बन्द कर लीं।

दिल कर रहा था बस मैं इस मासूम सी गुड़िया को देखता रहूँ। मैंने उसके माथे और आँख पर चुम्बन किया। फिर अपने होंठ उसके होंठों के पास ले जाकर रुक गया। उसकी गर्म साँसें मेरी साँसों में मिलने लगीं। वो चुपचाप आँखें बन्द किए खड़ी थी। फिर मैंने उसके गुलाबी होंठों पर छोटा सा चुम्बन किया। जैसे ही मेरे होंठ उसके कोमल होंठों से छुए.. तो उसकी साँस एक पल के लिए रुक गई। अब उसकी साँसें पहले से भी तेज चलने लगीं। उसके चहरे पर कुछ पसीने की बूँदें भी छलक आई थीं और होंठ धीरे-धीरे फड़कने लगे थे.. जैसे वो मुझसे कह रहे हो कि आओ चूमो और चूस लो हमारा रस।

मैंने एक हाथ छोड़कर उसके माथे से पसीना पोंछा और मैं उसके गालों को चूमने लगा।

मधु ने शर्म से अपना मुँह नीचे कर लिया। लेकिन मैंने उसकी ठोड़ी पकड़कर ऊपर किया और अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए और मधु के नरम और रसीले होंठों को चूसने लगा।

शायद मधु के लिए ये नया अनुभव था और वो धीरे-धीरे वासना के नशे में डूबती जा रही थी। कुछ मिनट मधु के होंठों को चूसने के बाद मैंने धीरे से उसको बिठा लिया और दाँया पैर ऊपर उठा कर तकिया बना लिया और मधु का सिर उस पर रख दिया। अब मधु का सिर पीछे को लटक गया और उसकी दोनों बड़ी चूचियां आगे की ओर उभर आईं। मैंने उसकी साड़ी का पल्लू हटाया और चूचियों को ब्लाऊज के ऊपर से मसलने लगा।

फिर मैं उसके ब्लाऊज के बटन खोलने लगा। मधु ने हाथ रोकने की कोशिश की, पर मैंने उसके सारे बटन खोल दिए। अब उसकी बड़ी और सुडौल चूचियां काली ब्रा से बाहर आने को बेचैन लग रही थीं।

मैंने उसे थोड़ा सीधा बिठाया और जल्दी ही उसकी चूचियों को ब्रा और ब्लाऊज से आजाद कर दिया। फिर मधु को उसी पोजिशन में लिटा लिया और चूचियों को मसलने लगा।
मधु के मुँह से हल्की सी आवाज निकलने लगी “अआआहहह…”

मैं उसकी चूचियों को मसलता रहा और साथ में उसके गुलाबी चूचकों को भी मसलने लगा। चूचकों को मसलने से कुछ ही पलों में उसके निप्पल और ज्यादा कड़क हो गए। मैं समझ गया कि मधु को भी मजा आ आ रहा है। अब मैं बुरी तरह उत्तेजित हो गया था और चूचियों को मसलना छोड़ कर निप्पल को मुँह में लेकर चूसने लगा और दाँए हाथ से दूसरी चूची को बुरी तरह मसलने लगा।

मधु की साँसें तेज होती जा रही थीं और उसका पेट भी बुरी तरह हिल रहा था। मधु ने अपने दोनों पैर फैला दिए और कामुकता, उत्तेजना के मारे इधर-उधर करने लगी। अब उसका खुद पर नियंत्रण खत्म हो गया था। उसके मुँह से लगातार मादक सिसकारियाँ निकल रही थीं।

“अआह.. आह आह्ह उई ममाँ.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… उफ ओ आह्ह..”

अब मैंने चूची को मसलना बन्द करके हाथ को उसकी साड़ी और पेटीकोट के अन्दर डालने लगा। मधु ने पेट अन्दर को कर लिया.. जिससे मेरा हाथ सीधा उसकी हिंदी चुत पर चला गया। चूत बिल्कुल चिकनी थी.. शायद मधु ने आज ही झाँटें साफ की थीं।

मैं उंगली से चूत के दाने को रगड़ने लगा। मधु को मानो करन्ट लग गया हो.. वो बुरी तरह झटपटाने लगी। मैं मधु के कान में बोला- मैं तेरी इसी चूत में अपना लण्ड डालूँगा और तुझे अपना बनाऊँगा.. आह्ह कितनी नरम है तेरी चूत.. मैं तो तुझे पाकर धन्य हो गया जान.. ला अब तेरी इस रसीली चूत को चूम लूँ।

मधु कुछ नहीं बोली.. बस आँखें बन्द करके सिसकारियाँ लेती रही। मैंने उसे खड़ा किया और साड़ी निकाल कर फेंक दी और पेटीकोट का नाड़ा खींच दिया। जिससे वो ढीला होकर नीचे पैरों में गिर गया।

अब मधु के गोरे बदन पर सिर्फ काली पैन्टी रह गई। उसके बाल खुले थे और चूचियां बिल्कुल सीधी खड़ी थीं। कुल मिलाकर वो कयामत लग रही थी। मैं उसके होंठ.. गर्दन और चूचियों को चूमता हुआ घुटनों पर बैठ गया। मैं अपने होंठ मधु के पेट पर रखकर चूमने लगा और जीभ को नाभि में फिराने लगा।

उत्तेजना के कारण मधु का पेट ऊपर-नीचे हो रहा था। फिर मैं हाथों से उसके दोनों बड़े चूतड़ों को मसलने लगा और पेट चूमते हुए नीचे की तरफ बढ़ने लगा। फिर पैन्टी को दाँतों से पकड़ कर नीचे खींच कर उतार दी।

चूत मेरे रगड़ने से बिल्कुल लाल हो गई थी और बाल का नाम निशान नहीं था। ऐसे लग रही थी जैसे किसी बच्ची की चूत हो.. दो फाँकें बिल्कुल चिपकी हुई थीं। जिसके बीच से दाना बाहर को निकला हुआ था। ऐसा लग रहा था जैसे आज तक उसे किसी ने छुआ ही नहीं हो। मुझसे संयम नहीं हुआ और अपने होंठों में चूत का दाना भर लिया.. जो बाहऱ निकला हुआ था और चूसने लगा।

मधु को एक करन्ट सा लगा। उसने अपने पैरों को थोड़ा चौड़ा दिया और अपने हाथों से मेरे सिर को दबाने लगी। मैं कभी दाने को पकड़कर खींचता.. तो कभी फांकों को होंठों में लेकर चूसने लगता और चूतड़ों को लगातार मसल रहा था।

उसकी चूत से एक अलग ही खुशबू आ रही थी.. जिससे मुझ पर नशा सा छा रहा था। मेरा दिल कर रहा था कि मैं चूत को खा ही जाऊँ। कभी-कभी मेरे दाँत चूत पर गड़ जाते, तो मधु एकदम तड़प उठती। मुझे उसे तड़पाने में मजा आ रहा था.. इसलिए बार-बार उसकी चूत पर दाँत गड़ा देता, पर वो कुछ न बोलती।

फिर मैं एक उंगली चूत के छेद पर रखकर अन्दर डालने लगा। चूत काफी गीली थी.. शायद मधु झड़ चुकी थी।

मैंने दाने को चाटते हुए उंगली अन्दर डाल दी और आगे-पीछे करने लगा। मधु तड़प उठी और अपनी हिंदी चुत को भींच दिया और मेरे सर को चूत पर दबा दिया। मैंने उंगली की रफ्तार बढ़ा दी जिससे थोड़ी देर में ही मधु के पैर काँपने लगे और चूत ने पानी छोड़ दिया, मधु के मुँह से “आह..” निकल गई।

मधु की हिंदी चुत चुदाई का रस कहानी के अगले भाग में मिलेगा।
तब तक अपने ईमेल मुझ तक जरूर भेजिएगा।
[email protected]
हिंदी चुत कहानी जारी है।

कहानी का अगला भाग : बॉय से कॉलबॉय का सफर-5

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