एक उपहार ऐसा भी- 9

(Ek Uphar Aisa Bhi- Part 9)

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आपने अब तक की इस मस्त कर देने वाली कहानी में जाना था कि हीना मेरे लंड को चूसने के लिए तैयार ही हो रही थी कि मैंने उससे 69 में होकर उसकी चुत चाटने की इच्छा जाहिर कर दी.

वो मेरी बात से एकदम से चौंक गई थी. उसने बताया कि अब तक उसकी चुत कभी नहीं चाटी गई थी. वो रूमाल से अपनी चुत पौंछने को हुई, तो मैंने उसे चुत पौंछने से रोक दिया.

अब आगे:

हीना ने मुझे आश्चर्य से देखा पर शर्माते हुए उसने रूमाल एक तरफ फेंक दिया. अब वो 69 की पोजीशन में आ गई और मेरे लंड को हाथों में लेकर सहलाने लगी … चूमने लगी.

फिर सबसे पहले उसने लंड के सुपारे को अपनी जीभ से जी भरके चाटा और लंड को मुँह में भर कर बहुत मस्त तरीके से चूसा.

मैं लंड चुसाई का मजा लेने लगा था. मेरी नाक के नथुनों में उसकी चुत की मस्त महक मुझे भड़का रही थी.

उसने थोड़े ही देर में मेरे लंड को अपने गले तक ले जाना शुरू कर दिया. मेरा लंड बड़ा था. इस कारण मुँह में जाने पर भी आधा ही समा पाता था. हीना जितने लंड को अपने मुँह में गले तक ले सकी, वो उतने से ही अपने काम में तल्लीनता से लग गई.

इधर मेरे सामने उसकी चूत लपलप कर रही थी, जिसकी फांकें आज भी एक दूसरे से जुदा नहीं हुई थीं. ये इस बात का सबूत था कि हीना की चुदाई ढंग से हुई ही नहीं है.

मैंने अपनी जीभ को हीना की गुलाबी और गीली चूत पर नीचे ऊपर फिराया, तो हीना एकदम से कांप उठी. ‘उउहहह..’ कहते हुए उसने एक बार कमर उचका ली.

मैंने अब सर को थोड़ा उठाते हुए चूत में जीभ फंसाकर चूत की एक फांक को अलग किया और मुँह में भर कर चूसने लगा. हीना को अब जो आनन्द मिल रहा था, उसका बखान उसके अलावा और किसी के वश में नहीं हो सकता था.

कुछ ही पलों में आनन्द का सैलाब बढ़ा, तो हीना ने अपने पैरों को और फैला दिया. वो अपनी गांड पटक कर चूत को मेरे मुँह में ऐसे टिकाने लगी, जैसे वो भी मेरे मुँह को चोदना चाहती हो. मैंने भी अपनी कला और अपने अनुभव को हीना की चूत में पूरा झोंक दिया.

हीना अपनी चुत चूसने से जितनी बेचैन होती, वो लंड को मुँह के उतने ही ज्यादा अन्दर डाल कर चूसने लगती थी.

कुछ ही देर में हीना की सहन शक्ति ने जवाब दे दिया था. वो अब मेरे ऊपर से उठी और सीधे होकर लंड की घुड़सवारी के लिए तैयार हो गई.

उसने मेरा लंड चूत में डालने से पहले पूछा- सर कंडोम लगाना है क्या?
मैंने उसकी नशीली आंखों में देखकर कहा- मुझे तो बिना किसी रूकावट के तुम्हें पाना है, तुम अगर मुझे बुरका (कंडोम) पहनाना चाहो, तो मेरे बैग में रखा है.

इस बात पर उसने एक मुस्कान बिखेरी और जवाब के तौर पर लंड को यूं ही अपनी चूत में सैट कर लिया. फिर वो आंखें बंद करके मेरे लंड पर बैठना शुरू कर दिया. अगले पल ही उसने लंड का टोपा चूत में फंसा लिया था. मेरा लंड मोटा था इसलिए एक बार में धच्छ से बैठ पाना हीना की चुत के वश का नहीं था.

लंड का सुपारा चुत की फांकों में फंसा, तो उसके कंठ से एक ‘इस्स्स..’ की आवाज निकल पड़ी.
उसने एक पल रुक कर लम्बी सांस ली और बोली- आह … सर … मुझे आपका लंड बिना बुरके के ही क़ुबूल है … क़ुबूल है … क़ुबूल है.

शायद उसने ये कहते हुए अपनी दम साधी थी. क्योंकि तीसरी बार क़ुबूल है कहते ही अगले एक झटका दे मारा और पूरे लंड को गटक गई.

हालांकि उसकी चीख निकल गई और तेज स्वर में ‘आहहह..’ कहते हुए उसने चेहरा आसमान की ओर कर दिया. उसकी आंखें दर्द से मुंद गई थीं, होंठ भिंच गए थे. और चेहरे पर पीड़ा साफ़ झलक उठी थी. मगर हीना ने अपने दोनों हाथ मेरे सीने पर रख दिए और अपनी मुट्ठियों को भींच लिया, जिससे मेरे सीने के कुछ बाल उसके हाथों में आ गए.

मैंने भी दर्द और मजे से ‘आहहह…’ की आवाज कर ही डाली. अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था, तो मैं हीना को पकड़ने की कोशिश करने लगा.

पर तभी हीना ने मुझे टोका- सर आप मेंहदी खराब नहीं करोगे … मैं हूँ ना सर!

ये कहते हुए उसने मेरा सर उठाया और पीछे एक तकिया और लगा दिया. फिर खुद ही झुक कर अपना खूबसूरत एक स्तन मेरे मुँह में दे दिया और कमर चलाने लगी. मेरा लंड हीना की चूत में बहुत रगड़ कर चल रहा था. मुझे हीना की चूत में एक अलग ही मजा मिल रहा था. उसकी चुत में एक अलग ऊर्जा और अलग तरह की गर्मी थी. मैंने आनन्द के भंवर में खुद को खो जाने दिया और खुद को हीना के हवाले कर दिया.

हीना लंड पर हिलने लगी थी और ‘इइस्स्स आहह उउहहह..’ की आवाजें निकालने लगी. इस वक्त हीना अपने होंठों को खुद काट रही थी.

मैं उत्तेजनावश उसके दोनों चुचूकों को बारी बारी से अपने दांतों से काटने लगा था. मैंने उसके भरे हुए स्तन पर भी दांत गड़ाए. जब भी मैं उसके आधे से ज्यादा स्तन को अपने मुँह में भर कर गांड उठाता था … तो वो मजे से और भी ज्यादा सिहर उठती थी.

उसकी कसमसाहट से लग रहा था मानो वो युगों-युगों से लंड की प्यासी थी.

अब उसकी कमर की थिरकन में तेजी आ गई थी. वो एक लय में अपनी कमर हिलाने लगी. मेरा लंड चूत में पूरी तरह अन्दर जाता और हीना की बच्चेदानी पर ठोकर मार कर बाहर आ जाता था. फिर हीना कमर ऊपर ले जाकर चूत को लंड के आखिरी छोर तक वापस लाती और फिर उसी तेजी से पूरा लंड दुबारा गटक जाती.

‘आहह उउहह इस्स्स..’ की कामुक आवाजों के साथ हमारी ताबड़तोड़ चुदाई तेज और बहुत तेज होती चली गई. मेरे लंड को चुदाई का नया अनुभव और अद्भुत आनन्द मिल रहा था. वहीं हीना की चूत को बड़े लंड की रगड़ और जवानी का भरपूर प्रसाद मिल रहा था.

कुछ ही देर के इस मदमस्त युद्ध में हीना अब मदहोशी के शिखर पर पहुंच चुकी थी. वो कामोत्तेजक अवस्था में आकर बड़बड़ाने लगी, हांफने लगी- ओहहह सर आपने आज मुझे जन्नत दिखा दी … थैंक्यू सर … आह आई लव यू सर … आहहह. … उहहह. … इइस्स्स … क्या चोदते हो सर.

मैंने भी अब नीचे से धक्के मारने शुरू कर दिए थे. मेरा भी कामरस छूटने ही वाला था. मुझसे भी रुक पाना बर्दाश्त नहीं हो रहा था, लेकिन हीना की पकड़ में मुझे छटपटाने का ज्यादा अवसर नहीं मिल रहा था.

मैं हीना का ध्यान भंग भी नहीं करना चाहता था, लेकिन मैं अंतिम क्षणों में कांपने लगा था. मेरे तन में झुरझुरी सी होने लगी.

तब मैंने हीना को कहा- हीना लव यू डार्लिंग … तुमने मुझे बहुत अच्छा चोदा … अब मैं आने वाला हूँ.

मैंने उसको ये इसलिए बताया था … क्योंकि ज्यादातर कुंवारी लड़कियां अपनी चुत के अन्दर लंड का पानी नहीं लेती हैं.

इधर नजारा ही उल्ट था.
मेरी बात पर हीना ने कहा- तो क्या हुआ सर … आप मेरे अन्दर ही समा जाइए न … बाकी मैं संभाल लूंगी.
ये कह कर हीना अपनी गति तेज पर तेज करने लगी.

मैं तो कुछ धक्कों के बाद अकड़ कर अपना वीर्य त्यागने लगा, पर हीना की गति में कोई फर्क ना आया. मेरे लिए ये भी एक अनोखा अनुभव रहा कि आप झड़ भी रहे हैं … और कोई आपको निरंतर चोद रही है. मेरे ख्याल से इस अनुभव से महिलाएं भली-भांति परिचित होती होंगी.

ति हुई.

हीना कुछ देर धीमी गति से कमर हिलाती रही, फिर शांत होकर उसने मेरे सीने पर सर टिका दिया.

थोड़ी देर बाद संयत होकर मुझसे नजरें मिलाकर हीना ने कहा- क्यों सर, खास मेहमान की खातिरदारी में कोई कमी तो नहीं रह गई?
मैंने कहा- नहीं हीना डार्लिंग तुमने तो मुझे सारे जहां का सुख दे दिया. मैं तुम्हारा ये अहसान जिंदगी में नहीं भूलूंगा.

हीना ने हंस कर कहा- उपहार याद है ना सर?
मैंने कहा- हां याद है, मैं इंतजार करूंगा कि कब तुम उपहार मांगो.

कुछ पल बाद हीना मेरे ऊपर से उतर गई और उसने अपने रूमाल से मेरे लंड को साफ कर दिया. अब मुझे सचमुच शूशू लगी थी, तो मैं बाथरूम में जाकर निपट आया.

तब तक हीना कपड़े पहन चुकी थी और अपना सामान समेट चुकी थी.

फिर उसने कहा- मैं आपको कपड़े भी पहना देती हूँ सर.
मैंने कहा- हां अब उतारे हैं, तो पहनाना भी पड़ेगा. लेकिन एक काम करो अलमारी से निकाल कर एक पजामा ही पहना दो.

उसने वैसा ही किया और बिस्तर भी ठीक कर दिया. मेरे कपड़ों को सही जगह रखा और हम एक बार फिर बहुत लंबे चुम्बन में डूब गए.

फिर हीना ने कहा- सर शाम हो गई है … मैं चलती हूँ.

मैंने भी घड़ी देखी छह से ज्यादा का समय हो गया था. मैंने उसे विदा किया.

उसने जाते-जाते मुझे उपहार का वादा याद दिलाया.

मैंने उसे दरवाजे तक छो़ड़ा. अभी मैंने दरवाजा लॉक नहीं किया. दरअसल मुझसे बन ही नहीं रहा था.

मैं वापस आकर बिस्तर पर लेट गया. अब लेट क्या गया सीधे नींद ही लग गई, जो रात नौ बजे खुली.

जब नींद खुली तो मेरे शरीर ने कहा कि बेटा चुदाई बहुत हो गई … चल कुछ खा पी भी ले.

मैं चाहता, तो खाना रूम में ही मंगा लेता. पर मन में होटल वाली लड़की नेहा के लिए एक पछतावा था. मैंने सोचा कि अगर वो किसी बहाने मिल जाएगी, तो माफी मांग लूंगा. कॉल तो मैं उसे यहीं से भी कर सकता था. मगर मुझे कॉल करके माफी मांगना अच्छा नहीं लग रहा था. साथ ही मन में शादी के माहौल का आनन्द लेने की भी इच्छा थी.

तो मैंने मेंहदी धोई और हीना को याद करके मेंहदी को चूम लिया और कपड़े बदल कर नीचे चला गया.

नीचे मुझे हॉल से गुजरते हुए खुशी की छोटी बहन पायल दिखी. अचानक ही उससे मेरी नजरें मिलीं, तो हम दोनों के चेहरे पर मुस्कान बिखर गई.

फिर वो मेरे पास आ गई और कहा- अरे आप कहां थे, आप यहां बोर तो नहीं हो रहे हैं ना! भई आपसे हमारा समधी समधन का रिश्ता है, आप लड़के वाले हैं. आपकी खातिरदारी में कोई कमी रह गई, तो हम जीजू को क्या मुँह दिखाएंगे.

पायल महज 18-19 साल की लड़की थी, पर उसकी वाकपटुता के आगे मैं नतमस्तक था.

मैंने कहा- वैसे मैं यहां बोर तो नहीं हुआ, पर मैं यहां किसी को जानता नहीं हूँ, तो ज्यादा व्यस्त रहने लायक भी कुछ नहीं है.
पायल ने आंख मारते हुए कहा- हम हैं ना … आप हमारे में व्यस्त रहिए.

मैंने भी थोड़ा खुल कर कहा- तुमको देखकर तो नहीं लगता कि तुम मुझे ज्यादा देर तक व्यस्त रख पाओगी.
अब उसके चेहरे पर शर्म की लकीरें उभर आई थीं.

वो अपने से दोहरे उम्र के आदमी से बात कर रही थी, पर आजकल के नौजवान किसी से हार मानना पसंद ही नहीं करते.

उसने कहा- बात चैलेंज की है … तो मैं बताना चाहूँगी कि मैंने उम्र भर व्यस्त रखने की हिम्मत रखती हूँ.
मैंने उसकी उम्र पर तरस खाया और बात आगे ना बढ़ाकर हाथ जोड़ लिए- अच्छा बाबा तुम ही जीती, मैं हारा. अब इजाजत हो तो मैं डिनर कर आऊं!
उसने हंस कर कहा- आपको रोका किसने है … जाइए भोजन कीजिए और अगर सादे खाने से मन भर जाए, तो कनीज़ को जरूर याद कीजिएगा.

मैं जब तक कुछ कह पाता, तब तक वो अपनी बात बोल कर बलखाती और गांड मटकाती हुई दूर भाग निकली.

उसकी हिम्मत देखकर मैं इतना तो समझ गया कि ये मेरी असलियत जानती है.
पर क्या ये मुझे खुशी का दीवाना समझती है?
या जिगोलो?
और इसे ये पता कैसे चला होगा?

इन सवालों को मैंने जेहन में ही किसी कोने पर दबा दिया और मैं नीचे स्टॉल पर भोजन करने चला गया.

उधर मेरी नजर नेहा को तलाश रही थी, पर वो मुझे कहीं नहीं दिखी.

हालांकि मुझे भोजन के वक्त हीना दिख गई. वो दूर से मुस्कुरा रही थी पर नजरें भी चुरा रही थी. इसी आंख मिचौली के बीच मैंने भोजन किया और ऊपर अपने कमरे में आ गया.

अपने कमरे तक पहुंचने से पहले ही मुझे भाभी मिलीं. उन्होंने मुझसे मोबाइल नम्बर मांगा और रात को मोबाइल चालू रख कर सोने को कहा.

मैं समझ गया था कि आज की रात कयामत की रात है. मैंने अपने बैग के अन्दर छुपा रखा टैबलेट का पत्ता निकाला और उसमें से एक गोली निकाल कर खाकर सो गया.

ये कामशक्ति वर्धक गोली थी, जिसे सिर्फ 50 एमजी खाकर मैं दिन-रात चुदाई कर सकता हूँ. मुझे जब लगातार बहुत बार चुदाई करनी होती है, तभी मैं इसका सेवन करता हूँ. वैसे हीना की चुदाई के वक्त मैंने किसी प्रकार की दवा का सेवन नहीं किया था.

हीना की मदमस्त जवानी चखने के बाद अब भाभी के जिस्म की गर्मी से परिचित होने का अवसर भी आने वाला है.

मेरी कामुक कहानी का अगला भाग जल्द ही आपकी निगाहों से चुदने के लिए तैयार रहेगा. बस मेल करना न भूलिएगा.

ये सेक्स कहानी आपको रोमांचित कर रही है या नहीं … आप अपनी राय इस पते पर दे सकते हैं.
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कहानी जारी है.

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