एक दिल चार राहें- 18

(College Girl Sexy Kahani)

This story is part of a series:

कॉलेज गर्ल सेक्सी कहानी में पढ़ें कि मेरी पड़ोसन की जवान बेटी मेरे पास प्रोजेक्ट के लिए आयी. उसका फोन मेरे पास रह गया. मैंने फोन में मेसेज और फोटो देखी तो …

लौंडिया जिस प्रकार मुझे आशा भरी नज़रों से देख रही थी आप अच्छी तरह सोच सकते हैं अब उसे ना कहना मेरे लिए कितना मुश्किल था। मैंने सुहाना पर अहसान जताते हुए हामी भर दी।

अब तो वह नई चिड़िया भी चहचहाने लगी थी। केबिन से जाते समय जिस प्रकार उसने ‘थैंक यू सर’ कहने के बाद हाथ मिलाया था मैं बहुत देर तक अपने हाथ को सहलाता रहा था। साला यह मन तो हमेशा ही बेईमान ही बना रहेगा।

अब आगे की कॉलेज गर्ल सेक्सी कहानी:

मैं बंगलुरु ट्रेनिंग के प्रोग्राम के बारे में सोचने लगा। साली यह किस्मत भी अजीब है जिन्दगी झंड हो गई है। एक बेचारा दिल और चार राहें। अजीब इत्तेफाक है चारों दिल फरेब हसीनाएं सामने खड़ी MPK(मुझे प्यार करो) बोल कर जैसे ललचा रही हैं।

मैं अभी अपने ख्यालों में खोया हुआ ही था कि मोबाइल की घंटी बजी.
मैंने अपना मोबाइल देखा वह तो खामोश था।

ओह … यह तो मेज पर पड़ा कोई दूसरा मोबाइल बज रहा था? लगता है सुहाना अपना मोबाइल यहीं भूल गई है।

मैंने फ़ोन को उठाया तो उधर से सुहाना की आवाज आई- सॉरी सर … मैं सुहाना बोल रही हूँ।
“ओह … हाँ … बोलो डिअर?”
“सर … वो मेरा मोबाइल …?”
“अरे हाँ … तुम अपना मोबाइल यही भूल गई लगती हो?”
“सॉरी सर! आप रख लेना. मैं शाम को ले लूंगी.”
“इट्स ओके डिअर!”
सुहाना ने फोन काट दिया। मैं बाद में बहुत देर तक उसी के बारे में सोचता रहा और फिर ऑफिस के रूटीन कामों में लग गया।

कोई दोपहर के दो बजे का समय रहा होगा। सुहाना का मोबाइल फिर से बजने लगा। सुहाना ने शायद पीहू के मोबाइल से कॉल किया था।

“सर मैं सुहाना बोल रही हूँ.” सुहाना की वही मीठी आवाज फिर से मेरे कानों में पड़ी।
“ओह … हाँ … बोलो बेबी?”
“सॉरी … आपको डिस्टर्ब किया … इस मोबाइल में एक मेसेज और ओटीपी भी आया है देखकर मुझे बता दें प्लीज …”
“ओके … इसका लोक ओपन करने का पास वर्ड बताओ?”
“ओह …?” मुझे लगा शायद सुहाना कुछ झिझक सी रही है।
“क्या हुआ?”
“ना … कुछ नहीं … ठीक है नोट करें …”
फिर उसने पासवर्ड बताया तो मैंने उसमें आया मेसेज और ओटीपी उसे बता दिया।

जिस प्रकार सुहाना मोबाइल ओपन करने का पासवर्ड बताने में झिझक रही थी मेरी उत्सुकता उसके दूसरे मेसेज पढ़ने के लिए बढ़ने लगी। हालांकि किसी दूसरे के मोबाइल के मेसेज बिना उसकी इजाजत के पढ़ना और देखना अच्छी बात तो नहीं है पर मेरे लिए अब अपने आप को रोक पाना कहाँ संभव था।

मैंने उसका मोबाइल फिर से ओपन किया और मेसेज बॉक्स देखा। बहुत से मेसेज थे। ज्यादातर तो उसके प्रोजेक्ट से सम्बंधित थे पर एक फोल्डर का नाम (टॉम) मुझे अजीब सा लगा। साला यह टॉम नामक गुलफाम कौन हो सकता है?

मैंने उस फोल्डर को खोला तो मेरी आँखें फटी की फटी रह गई। उसमें तो सुहाना की अलग-अलग अंदाज़ में बहुत सी फोटो थी। हैरानी वाली बात थी साथ में किसी लंगूर की भी बहुत सी फोटो सुहाना के साथ थी।

और आगे तो और भी कमाल था। सुहाना और उस लंगूर के बहुत से अन्तरंग फोटो थे। हे भगवान्! एक फोटो में तो सुहाना ने अपनी जीन पैंट को थोड़ा नीचे करके गुलाबी पैंटी को अपनी अँगुलियों से थोड़ा हटाते हुए भी दिख रही थी जिसमें उसकी बुर नज़र आ रही थी। आह … मेरे कानों में सांय-सांय होने लगी। जैसे गला सूखने सा लगा और साँसें तेज होने लगी।

याल्ला … उसके चुकंदर जैसी बुर का चीरा साफ़ दिख रहा था। ट्रिम किये हुए रेशम से हल्के-हल्के बाल आह … जैसे जन्नत मेरी आँखों के सामने हो। और भी बहुत से फोटो थे।

मैंने उन सारे फोटो और मैसेज को अपने मोबाइल में कॉपी कर लिया। लैला तो बताती है यह सोनचिड़ी बड़ी पढ़ाकू है पर यह चिड़िया तो कॉलेज में बड़े गुल ही नहीं साथ में चुग्गा भी खिला रही है। अब तो थोड़ा सा चुग्गा हमें भी मिल ही जाएगा। अब तो इस कबूतरी का मेरे शिकंजे से बचा पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है।
मेरी आँखों इसी ख्याल से चमकने लगी।

मेरे कंजूस पाठको और पाठिकाओ, आज तो आप सभी को भी एक बार आमीन नहीं तो कम से कम लिंगदेव की जय तो बोलनी ही पड़ेगी।

आप लोग अब मेरी हालत का अंदाज़ा बखूबी लगा सकते हैं। सारी रात करवटें बदलते ही बीती और सुहाना की रेशम जैसी बुर ही आँखों के सामने घूमती रही।

आज सन्डे तो नहीं था पर छुट्टी का दिन था सुबह कोई 7 बजे मेरी आँख खुली। मैं फ्रेश होकर सानिया का इंतज़ार करने लगा। कोई 8 बजे सानिया का फोन आया। उसने बताया कि आज सुबह उसपर छिपकली गिर गई है।

लग गए लौड़े!
सारे प्रोग्राम की मा … बहन कर दी साली ने। अब तो वह अगले 3 दिन नहीं आने वाली।

मेरा मन तो कर रहा था उसे कह दूं कोई बात नहीं तुम रसोई का ना सही दूसरे काम तो कर ही सकती हो पर साली यह मधुर भी कितनी दकियानूसी सोच रखती है. उसने जरूर समझाया होगा कि माहवारी में दिनों में काम पर नहीं आना और बेचारी सानू जान उसके फरमान को कैसे टाल सकती है।

आज कितने प्रोग्राम बनाए थे। बाथरूम में पहले उसकी बुर और कांख के बालों की सफाई करनी थी। हे भगवान्! उसकी चुकंदर सी गंजी चूत को चाटने और चूमने में कितना मज़ा आता। और फिर रसोई में दोनों नंगे होकर नाश्ता बनाते और फिर उसे कोई गरमा गर्म ब्लू फिल्म भी दिखाता और उसकी कुंवारी गांड का उद्घाटन करने में कितना मज़ा आता … पर सब गुड़ गोबर हो गया।

अब मैं थके मन से और बोझिल कदमों से रसोई में चाय बनाने के लिए जाने ही वाला था कि फिर से फोन की घंटी बजने लगी। मैंने स्क्रीन पर देखा लैला का फोन था।

“ओह … हाय … गुड मोर्निंग!”
“गुड मोर्निंग प्रेम जी … आपने तो हमें याद ही नहीं किया?”
“ओह … हाँ बोलिए मैडम?”
“आज छुट्टी का दिन है … आप भी हमारे यहाँ आ जाइए साथ में नाश्ता करते हैं।”

मुझे लगा आज लैला जान का फिर से चुदवाने का मन हो रहा है। हे भगवान्! आज अगर मौक़ा मिल जाए तो कसम से आज उसकी गांड तो जरूर मारूंगा।

“और हाँ वो … सुहाना बोल रही थी उसके प्रोजेक्ट को फाइनल भी करना था तो आप उसकी भी हेल्प कर देना!”

लग गए लौड़े! साला ये भगवान् भी पता नहीं लौड़े लिए मेरे ही पीछे क्यों पड़ा रहता है। सुहाना के होते लैला के साथ तो कुछ भी नहीं किया जा सकता।

और फिर तो जैसे मेरे दिमाग की बत्ती ही जल उठी। हे लिंग देव! तेरी लीला अपरम्पार है … तेरी जय हो।
“क्या हुआ.. प्रेमजी क्या सोचने लगे … आपने तो जवाब ही नहीं दिया?”
“ओह.. हाँ … स.. सॉरी … वो.. ठीक है।” पता नहीं खूबसूरत लौंडिया हो या औरत उनकी आवाज सुनते ही जबान हिचकोले खाने लगाती है।

“वो … आप एक काम करें सुहाना को यहीं भेज दें मेरे पास लैपटॉप में उसके प्रोजेक्ट से सम्बंधित डाटा हैं तो मैं आज उसका प्रोजेक्ट जरूर फाइनल कर ही दूंगा।”
“ठीक है मैं थोड़ी देर में सुहाना को आपने यहाँ भेज देती हूँ और साथ में आपके लिए नाश्ता भी भेज रही हूँ। और हाँ … आज का लंच आप हमारे साथ ही करेंगे।”

हे लिंगदेव! आज तो तेरी सच में ही जय हो। अब तो मेरे होंठों पर मुस्कान और आँखों में नई चमक थी। मैं बेसब्री से सुहाना का इंतज़ार करने लगा।

कोई 9 बजे का समय था। कॉल बेल बजी तो मैं झट से दरवाजे पर गया। सामने सुहाना खड़ी थी। उसकी एक हाथ में लैपटॉप बैग और दूसरे हाथ में टिफिन था।
उसने लम्बी सलेटी रंग का धारियों वाला पायजामा और गुलाबी रंग का छोटा कुर्ता पहन रखा था। नाईके की टोपी पहने बालों की चोटी में रबड़ बैंड डाल रखा था।

एक बार तो मुझे लगा जैसे मेरी सिमरन ही सामने खड़ी हुयी है। हे भगवान् जिस प्रकार उसकी जाँघों का संधि स्थल आगे से फूला और कसा हुआ लग रहा था उसकी बुर के पपोटों का अंदाज़ा लगाना कतई मुश्किल नहीं था।

मुझे लगता है उसने काली या गुलाबी रंग की वैसी ही पैंटी पहनी होगी। और उसकी छोटी सी कुर्ती में झांकते हए दो नन्हे परिंदे ऐसे लग रहे थे जैसे थोड़ा सा ढीला छोड़ते ही उड़ जायेंगे। मुझे लगता है उसने कुर्ती के नीचे ब्रा नहीं पहनी है केवल समीज पहनी है। हे भगवान्! इन 2 महीनों में तो इसके उरोज कितने बड़े और रसीले हो चले हैं। मैं तो बस आँखों से ही जैसे उनका सारा अमृत पी जाना चाहता था।

“अरे सुहाना … आओ.. आओ डिअर … अन्दर आ जाओ!”
“थैंक यू सर!”

मैं दरवाजा बंद करके सुहाना को लिए अन्दर आ गया और उसे हॉल में पड़े सोफे पर बैठने को कहा। सुहाना ने हाथ में पकड़ा बैग और नाश्ते का टिफिन सोफे के पास रखे टेबल पर रख दिया।
“मॉम ने आपके लिए नाश्ता भेजा है।”

“ओह … इतनी तकलीफ की क्या जरूरत थी डिअर … थैंक यू.”
“थैंक यू सर.” सुहाना तो बस मुस्कुराती ही रही।
शायद वो मुंह में रखी च्युइंगम चबा रही थी। एक मीठी सी महक मेरे स्नायु तंत्र को जैसे शीतल सी करती चली गई। सुहाना सोफे पर बैठ गई और हाल में इधर उधर देखने लगी।

“चलो ठीक है … आज का नाश्ता तो हम दोनों साथ ही करते हैं।”
“सर.. आप कर लो मैं घर से करके आई हूँ.”
“कोई बात नहीं नाश्ता बाद में करते हैं … पहले तुम्हें चाय पिलाता हूँ.”
“इट्स ओके सर … मैं चाय नाश्ता करके आई हूँ.”
“ऐसा कैसे हो सकता है … मेरे साथ चाय तो पीनी ही पड़ेगी.” मैंने हंसते हुए कहा।

और फिर मैं रसोई से दो कप चाय बना कर ले आया। मेरा मकसद उसे सहज (नॉर्मल) बनाने का था।

मुझे लगता था उस दिन मोबाइल का लोक ओपन करने के पासवर्ड वाली बात उसे जरूर याद होगी। और मैं तो इस संबंध में कोई जल्दबाजी करने के मूड में कतई नहीं था अलबत्ता पूरी योजना बनाकर ही इस प्रोजेक्ट को पूरा करना चाहता था।

पर अभी थोड़ी देर तो सुहाना के प्रोजेक्ट की बात करनी जरूरी थी।

“लो भई.. सुहाना डिअर … पहले चाय पीओ और फिर मुझे अपने प्रोजेक्ट के बारे में ब्रीफ करो। सबसे पहले तो जो सैंपल और डाटा तुमने कलेक्ट किए हैं उनका एनालिसिस करना होगा और फिर उसके बेस पर समरी बनानी पड़ेगी।”

सुहाना ने भी बैग में रखा अपना लैपटॉप और फाइल्स निकाल लिए। सुहाना ने लगभग काम पूरा कर ही रखा था उसे फाइनल करने में ज्यादा समय नहीं लगने वाला था। बस उसमें कुछ प्रोजेक्ट और प्रोडक्ट से सम्बंधित फोटो, चार्ट और ग्राफ आदि डालने बाकी थे।

मैं स्टडी रूम से अपना लैपटॉप ले आया और उसमें से कुछ फोटो और डाटा सुहाना के लैपटॉप में ट्रान्सफर कर दिए। उसे समझा दिया कि अब आगे और क्या करना है। उसे यह भी बता दिया कि कल मैं उसका प्रोजेक्ट से सम्बंधित प्रपत्र (सर्टिफिकेट) भी तैयार कर दूंगा उसके बाद इस प्रोजेक्ट को कॉलेज में सबमिट किया जा सकता है।

दोस्तों! सुहाना का कॉलेज का प्रोजेक्ट तो लगभग पूरा हो गया था पर अभी मेरा और सुहाना का असली प्रोजेक्ट पर काम करना बाकी था।

“सुहाना तुम एक काम करो?”
“क्या?”
“इस फोल्डर में हमारी कंपनी के पिछले 2-3 साल के ऑडिटेड एकाउंट्स,सेल्स और प्रोडक्शन प्रोसेस से सम्बंधित डाटा हैं। ये तुम्हारे प्रोजेक्ट में हेल्प करेंगे तुम उनको अपने लैपटॉप में कॉपी कर लो तब तक मैं वाशरूम होकर आता हूँ।“
“ओके सर.”

उसके बाद मैं बेडरूम में बने बाथरूम में आ गया। मैंने जिस फोल्डर से फाइल्स और डाटा कॉपी करने के लिए सुहाना को बोला था उसका रीनेम (बदलकर) टॉम कर दिया था और उसमें सुहाना और उस लंगूर के कुछ फोटो और वीडियोज भी सेव कर दिए थे।
अब तो मेरी सुहाना नामक बुलबुल उन्हें देखकर इस्सस … ही कर उठेगी।

कॉलेज गर्ल सेक्सी कहानी का मजा लेते रहें.
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कॉलेज गर्ल सेक्सी कहानी जारी रहेगी.

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