अकेली औरत की कामवासना का समाधान

(Old Aunty Sex Kahani)

ओल्ड आंटी सेक्स कहानी में पढ़ें कि एक बार बड़ी उम्र की आंटी ने मुझे मालिश के लिए बुलाया. वे एकदम अकेली रहती थी तो मैं उनसे सम्पर्क में रहने लगा.

मित्रो, मैं आपका अर्जुन फिर से आपके लिए एक सच्ची ओल्ड आंटी सेक्स कहानी लेकर आया हूँ.

मैं पंजाब राज्य के लुधियाना शहर से हूं.

जैसा कि मैंने अपनी पहली सेक्स कहानी में भी बताया था कि मैं एक स्पा केन्द्र में काम करता हूँ. अपने काम के सिलसिले में मेरा क्षेत्र सीमित नहीं है.

अपने काम के सिलसिले में मैं चंडीगढ़, जालंधर, अमृतसर, हिसार, दिल्ली तक आता-जाता रहता हूं.

मेरी उम्र सताइस साल है. कार्य की व्यस्तता के कारण जिम तो नहीं जा पाता हूं, परन्तु रोजाना सुबह चार बजे उठकर रनिंग करना मेरी बचपन से ही आदत रही है.

मैं एक सुंदर शरीर का मालिक हूँ और दूसरों की तरह मुझसे झूठ बोला नहीं जाता है कि मेरे लंड का साइज बारह इंच का है या इससे भी बड़ा है.
मेरा लंड 7 इंच लम्बा ही है परन्तु मोटाई में कुछ ज्यादा ही है.

मेरी पिछली सेक्स कहानी
पहला प्यार और पहला सेक्स
को लेकर आप सभी के मेल व सुझाव मुझे मिले.
मेरी कहानी को इतना प्यार और पसंद करने के लिए आप सभी पाठकों का धन्यवाद.

आज मेरी कहानी उत्तेजित न होकर एक सामाजिक और सत्य घटना को लेकर है.

आप सभी से निवेदन है सेक्स कहानी को पूरा जरूर पढ़िएगा और अपने विचार दीजिएगा.

एक दिन मैं ऐसे ही स्पा सेंटर पर अकेला था, तो मुझे एक कस्टमर की कॉल आयी और मसाज के लिए घर आने का आर्डर दिया गया.

वो कॉल एक 55 साल की प्रौढ़ औरत का था, ये मुझे बाद में पता चला.

जब ये फोन आया, तो उस आवाज से मुझे ये बिल्कुल भी नहीं लगा था कि वो इस उम्र की औरत होंगी.
उनकी आवाज में दर्द था, रूखापन था, परन्तु दिखने में उम्र जैसा कुछ नहीं था.

खैर … मुझे इन सब से लेना भी क्या होता है. मसाज करना मेरी आजीविका का साधन है. इसी से मेरा घर खर्च चलता है.

लेकिन मेरे अन्दर भी सिर्फ आजीविका के बारे में सोचना जैसी सोच से अलग है, ये मुझे बाद में पता चला.

कोरोना काल में अब लोग स्पा-सेंटर पर आने से घबरा भी रहे थे, तो काम नाममात्र ही आता था.
जितने भी आर्डर आते थे, वो सब घर पर काम के लिए ही आ रहे थे.

आप यकीन मानिए कोरोना की वजह से सम्भोग वासना का बहुत ज्यादा उदय हुआ है.
लोगों का ध्यान कार्य से हट गया और फ्री रहते हुए वासना पूर्ति के अलावा कुछ ज्यादा सोच ही नहीं पा रहे थे.

आर्डर आता है मसाज का, परन्तु वहां जाकर करना कुछ और ही पड़ जाता है.

मोहतरमा का आदेश आया, तो मैंने बाइक उठायी और बताए गए पते पर अपनी किट लेकर पहुंच गया.

उस घर में कोई नहीं था, बिल्कुल शांत वातावरण था.

मेरे दस्तक देने पर मैडम ने गेट खोला.
मैंने देखा कि वो एक सामान्य औरत थी.

उनके अधिकांश बाल सफेद हो चुके थे. चेहरे पर झुर्रियां साफ नजर आ रही थीं.
मतलब अगर आपके नजरिए से बोलूं, तो उनमें हॉट जैसा कुछ नहीं था, परंतु मुझे तो अपना काम करना था.

हम दोनों अन्दर आ गए.

मैडम ने मुझे सोफे पर बैठने को बोला और मेरे लिए पानी लेकर आईं.

उनका नाम आशा (काल्पनिक) था.

कुछ देर हमने बैठकर इधर उधर की बातें की और बातों ही बातों में मैडम ने बताया कि वो अकेली रहती हैं. उनकी एक सन्तान थी … वो भी एक दुर्घटना में चल बसी थी.

सॉरी बस इस से ज्यादा मुझसे भी नहीं बताया जा रहा था.
मतलब मैं सही बताऊं, तो उस समय मैं बहुत ज्यादा इमोशनल हो गया था और भूल गया था कि मैं यहां किस लिए आया हूं.

मैडम के पति भी दो साल पहले स्वर्ग सिधार गए थे. वो बहुत ही दर्द में अपनी जिंदगी जी रही थीं.
परंतु आज मेरी वजह से उनकी जिंदगी में थोड़ी बहुत खुशियां लौट आई थीं और मेरे लिए यह फक्र की बात थी कि मैं उनकी खुशियों का कारण बन सका था.

मैंने आंटी को दिलासा दी, उनको समझाया और कहा कि आपको किसी भी समय कोई जरूरत हो तो आप मुझे अपने बेटे की तरह समझकर बुला सकती हैं.

इस तरह मैंने उनके साथ चाय भी पी और उठकर चलने की आज्ञा मांगी.

सच बताऊं दोस्तो, इस हालत में अगर कोई भी हवस या फिर और नजरों से देखेगा, तो मैं उसको जानवर ही मानूँगा.

चूंकि मेरा काम मसाज का था इसलिए मेरे जमीर ने मुझको उनकी मसाज करने को भी अन्दर ही अन्दर मना कर दिया था.

मैं ऐसा कतई नहीं सोचता कि इसकी उम्र इतनी है, इसको मसाज वगैरह जैसी क्या जरूरत आन पड़ी है.

मगर ये सभी जानते हैं कि मसाज से तनाव दूर होता है और रिलैक्स अनुभव होता है और ये सब अनुभव करना हर उम्र में अच्छा लगता है.

मेरी भावनाओं को समझते हुए वो मुझे रोक ना पाईं और मुझे जाते हुए देखती रहीं.

उनका नम्बर मैंने सेव कर लिया था.
अब मैं जब भी फ्री होता, उनको कॉल कर लेता और बातें करता. उनको हंसाने की कोशिश करता.

धीरे धीरे हमारी रोज बात होने लगी. उनके घर जाना मेरा आम हो गया था.

ऐसे ही 15-20 दिन गुजर जाने के बाद अचानक रात के समय में उनकी कॉल आयी.
वो बीमार थीं, उनके लिए दवा लेकर आना था.

मैं रात को ही शहर के एक हस्पताल से दवा लेकर पहुंचा.

फिर उनको आराम लगने पर वापिस घर आ गया.

इस तरह से हम दोनों पूरी तरह से घुल-मिल गए थे.

फिर एक दिन उन्होंने मुझे ऐसा कुछ ऐसा बताया कि मेरे पैरों तले से जमीन निकल गयी.

हालांकि उनकी बात में सच्चाई थी जिसे समाज आज भी नहीं समझ पाता.

उन्होंने मुझसे बताया- मैं स्ट्रैस में रहती हूँ और मेरा अपना कोई भी ऐसा नहीं है, जिसके साथ मैं कुछ पल बिता सकूँ, अपना दुख बांट सकूँ. इसलिए मैंने तुमको उस दिन बुलाया था ताकि मसाज के बहाने तुमसे मिल सकूँ और तुम्हारे बारे में जान सकूँ. तुम मुझे बहुत अच्छे लगते हो बेटा अर्जुन. तुम मेरे बारे में सब जान चुके हो. आज मैं तुमको बोल रही हूं, शायद तुम्हें गलत लगे … परन्तु सच ये कि मुझमें भी कामवासना है.

मैं आंटी को सुनता रहा.

कुछ देर चुप रहकर और एक लंबी सांस लेते हुए आंटी आगे बोलीं- अर्जुन, क्या तुम मेरे साथ सम्भोग कर सकते हो?

यह सुनकर कुछ देर के लिए तो मैं सुन्न हो गया था. मैं क्या सोचता था इनके बारे में, क्या समझकर इनकी इज्जत करता था मैं … और आज इन्होंने मुझको ये क्या बोल दिया है.

मैं कुछ नहीं बोला और उठ कर चला गया.

फिर 3-4 दिन ऐसे ही सोचते सोचते निकल गए.
आंटी का भी कोई कॉल नहीं आया.

एक दिन मैंने खुद ने सोचा कि वो अपनी जगह सही हैं, उनकी भी इच्छा होना लाजिमी है क्योंकि वो भी एक औरत हैं … और सामाजिक डर के कारण घुट घुट कर जीने को मजबूर हैं.

मैंने कॉल करके उनको अपनी सहमति दे दी और रात को मिलने के लिए बोल दिया.

मैं रात को उनके घर पहुंचा.

वो रोज की तरह नार्मल दिखाई दे रही थीं. कुछ भी नया नहीं था, वो ही दुखी चेहरा … वो बस बेबस थीं तो शायद अपनी शारीरिक जरूरत से.

हमने कुछ देर नार्मल बातें ही की. दोनों में से शुरूआत करने की हिम्मत किसी में नहीं थी.

फिर उन्होंने लाइट ऑफ कर दी और धीरे से हाथ मेरे हाथ पर रख दिया. इसके बाद आंटी मेरे गले से लग गईं.

कुछ देर हम ऐसे ही पड़े रहे. मैंने उनका चेहरा ऊपर उठाया और उनको आंखों में देखकर धीरे धीरे किस करना शुरू कर दिया.

वो किस करते हुए मेरा पूरा साथ दे रही थीं.
उनके बूढ़ी त्वचा के होंठ अलग ही मजा दे रहे थे.

दोस्तो प्लीज आप मुझको गलत मत समझना. मैं उनकी जरूरत के हिसाब से ठीक था.

कुछ रोमांचक शब्द मैं आप लोगों के लिए और सेक्स कहानी को रोमांटिक करने के लिए जोड़ रहा हूं क्योंकि इस समय मेरे जहन में मजा जैसा कुछ नहीं था.
मैं सिर्फ एक इंसान होने के नाते उनका अकेलापन दूर करने में भरपूर साथ दे रहा था.

चूंकि मैं अपना ऐसा साथ उन सभी ऐसी महिलाओं का देता हूं, जो सामाजिक डर के कारण अपनी जरूरत को दबाए रहती हैं.
खासकर विधवा औरतें व बूढ़ी हो चुकी औरतें, जिनके पति उनकी भूख को सतुंष्ट करने में सक्षम नहीं होते और उनकी इच्छा अभी भी जागृत होती है.

खैर … हम दोनों सम्भोग की दुनिया में डूबे हुए एक दूसरे को खा जाने की तरह किस कर रहे थे.

आंटी ने अपनी शर्ट निकाल दी और ढीले पड़े मम्मों पर मेरा मुँह लगा दिया.

उम्र ज्यादा और चुचियां छोटी होने के कारण वो ब्रा नहीं डालती थीं.

मैं उनके बूब्स को पीने के साथ साथ उनकी सलवार में हाथ डालकर योनि में अपनी उंगली अन्दर बाहर कर रहा था.

सेक्स ना करने के कारण उनको हल्का दर्द भी हो रहा था.

उनकी योनि बड़े बड़े बालों से घिरी पड़ी थी.

हमने सम्भोग के दौरान लाइट ऑन नहीं की थी.

कोई 15-20 मिनट चुम्मा चाटी और स्मूचिंग करने के बाद मैंने उनको लंड मुँह में लेने को बोला क्योंकि मैं उनको किसी भी सुख से वंचित नहीं रखना चाहता था.

पर उन्होंने ये सब करने से मना कर दिया क्योंकि उनको इसकी आदत नहीं थी.

परंतु बाद में धीरे धीरे वो अब लंड को गपा गपा करके पूरा अन्दर लेने लगी थीं.
वो मेरे जोर देने के कारण अपने मुँह में पूरा का पूरा लंड लेना सीख गई हैं.

मैं सलवार को निकालकर उनकी योनि को चाटने लगा.

उनकी योनि रस से इतनी लबालब भरी थी कि जब जीभ को योनि से दूर ले जाता … तो कामरस का धागा दूर तक बन जाता.

पांच मिनट में उनकी योनि ने पानी छोड़ दिया जिसे मैंने पूरा पी लिया.

थोड़ी देर किस के बाद उनकी कामेच्छा दोबारा से जागने लगी और अब वो सम्भोग चाहती थीं.

मैंने लंड को योनि पर सैट किया औऱ हल्का सा धक्का दिया. उनको थोड़ा सा दर्द हुआ, जिसको वो आराम से झेल गईं.

थोड़ी किस करने के बाद मैंने एकदम से पूरा लंड योनि में डाल दिया. उनकी आंखों से दर्द साफ झलक रहा था परंतु साथ ही संतुष्टि की भाव भी टपक रहा था.
उन्होंने मेरे लंड की मोटाई की तारीफ की.

धीरे धीरे मैंने धक्के लगाना स्टार्ट कर दिया.

कुछ देर बाद हम सम्भोग में बिल्कुल खो चुके थे. मैं कभी उनके स्तन, तो कब उनके होंठों को चूस रहा था.
योनि के पानी के कारण धक्कों के साथ योनि और बालों की सयुंक्त ध्वनि ‘छप्पप छप्प छप्प ..’ आ रही थी.

कुछ देर बाद वो झुक गईं.

इस स्टाइल में मैंने जब लंड को उनकी योनि पर रखा, तो लंड मोटा होने की वजह से उनकी योनि में ‘परर्रर्रर्रर …’ की आवाज के साथ घुस गया.

मैंने उनको इस स्टाइल में पूरे दम से चोदा. मेरे टट्टे पट-पट की आवाज कर रहे थे.

ऐसे ही 15 मिनट की चुदाई के बाद मैंने उनकी योनि को अपने कामरस से भर दिया.

ऐसे कुछ देर हम एक दूसरे के साथ लेटे रहे.

थोड़ी देर बाद वो मुझसे गले लगकर रोने लग गईं और उनको समझाते हुए मेरा भी गला भर आया.
हम दोनों ही आंखों में पानी लिए एक दूसरे के गले लगकर सो गए.

दोस्तो, यह मेरी सच्ची सेक्स कहानी है

हम आज भी बातें करते हैं, मिलते हैं, सम्भोग करते हैं.

उनको पता है कि मैं और असहाय औरतों के साथ भी सम्भोग कर लेता हूं. वो भी एक अच्छी आदर्श महिला की सोच को समझती हुई उन असहाय और मजबूर महिलाओं के साथ मेरा सम्भोग करना जायज मानती हैं.

प्लीज आप भी मुझे समाज की तरह गलत मत समझना या गलत नजरों से मत देखना.

मैं इसे एक सही कार्य मानता हूं क्योंकि वो एक दुखी और असहाय औरत मेरी वजह से आज पूरी तो नहीं कहूंगा पर थोड़ा बहुत खुश हैं.

मुझे अपने इस मानवता भरे कार्य पर आपके सुझावों का मुझे इन्तजार रहेगा.
प्लीज आप ओल्ड आंटी सेक्स कहानी पर अपनी राय जरूर दीजिएगा.
और अगर आप एक स्त्री हैं, तो आप एक स्त्री होने के नाते अपनी मेल में मेरी इस सामाजिक पहल और मेरी इस सोच को जांचकर दो शब्द जरूर भेजना.
धन्यवाद.
[email protected]

What did you think of this story??

Comments

Scroll To Top