बस में मिली औरत ने घर बुलाया

(Bihari Aunty Ki Chudai)

बिहारी आंटी की चुदाई कहानी मेरे बस के सफर से शुरू होती है. बस में एक आंटी से मेरा परिचय हुआ। उन्होंने मुझे अपने घर बुलाया। उसके बाद क्या हुआ?

हैलो फ्रेंड्स, मेरा नाम विशाल है। मेरी उम्र 24 साल है।
मैं 7 इंची धाकड़ लंड का मालिक हूं जो किसी भी भाभी या आंटी की चूत का बैंड बजा सकता है। मैं किसी भी चुदासी प्यासी भाभी या आंटी को अच्छे से खुश कर सकता हूं।

आज मैं आपको ये गर्म सेक्स से भरी बिहारी आंटी की चुदाई कहानी बताने जा रहा हूं।

यह बात 6-7 महीने पहले की है जब मैं कुछ काम के सिलसिले में धनबाद गया हुआ था।
जैसा कि आपको तो पता ही है कि लॉकडाउन में बसें कम चल रही थीं और जो चल रही थीं उनमें बहुत ही कम लोग सवार होते थे।

ऐसे ही मैंने भी रांची से बस का टिकट करवाया और तय समय पर स्टैंड पहुंच गया.
पता चला कि बस आने ही वाली थी।
तो मैं बस का इंतज़ार करने लगा।

इतने में एक 35-37 साल की महिला पर मेरी नजर चली गयी।
वो थोड़ी मोटी तो थी लेकिन गजब की सेक्सी लग रही थी।

मैं उनको देखने लगा।
एक दो बार उन्होंने भी मुझे देखा लेकिन ऐसा कुछ खास इशारा मुझे उसकी ओर से मिला नहीं।

फिर मुझे याद आया कि मेरे पास पीने का पानी खत्म हो चुका है तो मैं पानी की बोतल खरीदने निकल पड़ा।

जब मैं अपनी पानी की बोतल खरीद कर वापस लौटा तो तब तक हमारी बस अपने स्टैंड पर आ चुकी थी।

सभी लोग बस में सवार हो चुके थे. मैं भी अपनी सीट के पास जाकर खड़ा हो गया और बैग रख दिया।
फिर मैंने यहां वहां देखा तो वो आंटी भी वहीं पर थी। मेरी नजर उस पर गई तो वो मुझे ही देख रही थी।

मैंने हल्के से आंटी को स्माइल किया तो उन्होंने भी मेरी तरफ स्माइल कर दिया।
इससे ज्यादा उस पल में कुछ और नहीं हो पाया और फिर ये बात वैसे ही आयी-गयी हुई।

बस चल पड़ी और मैं अपने फोन में टाइम पास करने लगा।

कुछ दूर जाने के बाद किसी ने मुझे आवाज लगायी और मैंने गर्दन उठाकर देखा।
मैंने पाया कि वही आंटी हाथ हिलाकर मुझे बुला रही थी।

जब मैंने उनसे पूछा तो बोली- पीने का पानी दे दो।
मैंने उनको पानी दे दिया।

पांच मिनट के बाद वो उठकर मेरे पास आई और मेरी बोतल लौटा दी।

इत्तेफाक से उसी वक्त एक सवारी उठकर दूसरी सीट पर चली गयी थी और मेरे बगल वाली सीट खाली हो गयी थी।
खाली सीट देखकर वो बोली- मैं दो मिनट यहां पर बैठ सकती हूं क्या?
मैंने कहा- जी हां, बैठ जाइये, कोई दिक्कत नहीं है।

इस तरह हम दोनों के बीच में बातें होने लगीं।

बातों ही बातों में पता चला कि वो आंटी बिहारी थी, बोकारो से थी।
फिर हम दोनों में काफी हंसी मजाक भी हुआ और इसी बीच उन्होंने अपने फोन से मेरा नम्बर पूछ कर मेरे फोन पर मिसकाल भी लगा दी।

उस सफर में आंटी के साथ इससे आगे कुछ बात नहीं हो पाई।

उस घटना के ठीक एक सप्ताह के बाद मेरे पास एक अनजाने नम्बर से कॉल आया।
मैंने पूछा तो दूसरी तरफ से एक मीठी सी आवाज आई।

वो बोली- मैं आपसे बस में मिली थी। मैंने आपसे पानी मांगा था और हमारी बातें भी हुई थीं।
उसके बताने पर मुझे बिहारी आंटी याद आ गयी।

मैंने उनसे हाल-चाल पूछा और उन्होंने भी मेरे बारे में पूछा।
इतना होने का बाद मैं फिर से अपने काम में लग गया।

फिर रात में मेरे व्हाट्सएप्प पर हैलो का मैसेज आया। देखने पर पता चला कि ये वही बिहारी आंटी थी।

मैंने अब तक नाम भी नहीं पूछा था उनका, तो व्हाट्सएप पर मैंने नाम भी पूछा। उन्होंने अपना नाम श्वेता (बदला हुआ) बताया।

उस दिन तकरीबन 1 घंटे तक हम दोनों के बीच में इधर उधर की बातें चलती रहीं।

बीच बीच में हम दोनों थोड़ी सेक्सी बातें भी कर रहे थे।

फिर ऐसे ही होते होते हम खुल गए।
अब काफी नॉन-वेज बातें होने लगीं।

आंटी ने फिर एकदम से पूछा- और बताओ विशाल, तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है क्या?
मैंने कहा- नहीं आंटी।
वो बोली- क्यों?
मैं बोला- अभी तक पसंद की कोई मिली ही नहीं है।

उन्होंने पूछा- कैसी लड़की पसंद है तुम्हें?
मैं बोला- आप बुरा मत मानना लेकिन मुझे लड़कियों की बजाय भाभियां और आंटियां ज्यादा पसंद आती हैं।

इस बात पर वो कुछ देर चुप सी हो गयी।
फिर बोली- ऐसा क्या कारण है जो तुम्हें जवान लड़कियां पसंद नहीं आती हैं?
मैंने कहा- जवान लड़कियां सेक्स का असली मजा नहीं देती हैं। उनके वे (बूब्स) भी ज्यादा बड़े नहीं होते हैं। आंटियों के दबाने में ज्यादा मजा आता है। उनका शरीर भरा भरा होता है।

वो बोली- तुम तो बड़े शौकीन किस्म के लड़के हो विशाल!
आंटी के साथ इस तरह की बातें करते हुए मेरा लंड तो पहले से ही खड़ा हो गया था।
मैं आंटी को चोदने के ख्याल ले रहा था।

फिर चलती बात पर मैंने पूछ लिया- आप अकेली रहती हो क्या?

वो बोली- हां, फिलहाल तो अकेली ही रहती हूं। मेरे पति रांची में रहते हैं।
उस रात फिर काफी देर तक बातें हुईं।
ये सिलसिला कई दिनों तक चला।

अब मैं आंटी की चुदाई के लिए तड़प सा गया था।
मैं आंटी से सीधे नहीं कह पा रहा था।

मगर वो कहते हैं कि किस्मत में लिखी चीजें चलकर अपने पास आ जाती हैं।
एक दिन आंटी का कॉल आया और वो बोली- बोकारो आओगे क्या आजकल में?

उनसे मैंने पूछा- नहीं, अभी तो नहीं। क्या हुआ, सब ठीक तो है?
वो बोली- हां, वैसे तो बस ठीक है, बस थोड़ा अकेलापन महसूस कर रही हूं।
ये सुनते ही मैं समझ गया कि आंटी की चूत लंड मांग रही है।

फिर वो बोली- देख लो, अगर तुम कल आ सको तो?
मैंने झट से हां करते हुए कहा- अरे … क्यों नहीं आंटी, आपके मैं किसी काम ही नहीं आया तो फिर कैसी दोस्ती, मैं आ जाऊंगा।

अगले दिन मैं उनके बताए पते पर पहुंचा और घंटी बजाई।
सामने से आंटी ने दरवाजा खोल मुझे अंदर बुलाया।

वो उस दिन ऐसी पटाखा लग रही थी कि मैं अपनी आंखों पर विश्वास ही नहीं कर पा रहा था।

आंटी ने लाल रंग की साड़ी पहन रखी थी और पूरा मेकअप बिठाया हुआ था; बिल्कुल माल लग रही थी जैसे कि मेरे लिए तैयार होकर बैठी हो।
मैं तो उनके सेक्सी बदन को देखता रह गया।

मुझे खोया हुआ देख वो बोली- क्या हुआ, क्या देख रहे हो ऐसे?
मैं बोला- आपका ये रूप नहीं देखा था इसलिए। आप बहुत खूबसूरत लग रही हो आज!

वो ये सुनकर मुस्करायी और मुझे बैठने को कहा।

फिर उन्होंने चाय पानी के लिए पूछा और हमने नाश्ता करते हुए काफी सारी बातें कीं।
उसके बाद उन्होंने खाना लगा दिया। हम दोनों ने साथ में खाना खाया।

जब वो मेरे साथ टेबल पर बैठी थी तो उनकी साड़ी का पल्लू नीचे गिर गया।
आंटी के बूब्स की वो घाटी देखकर मेरा तो मुंह खुला रह गया।

लाल साड़ी लाल ब्लाउज में गोरी गोरी मोटी चूचियों की वो दरार … मुझे तो पागल कर गयी।

मैं तो उसी में घूरने लगा।
वो भी जानती थी कि मैं कहां देख रहा हूं।
मगर मैंने नजर नहीं हटाई, न उन्होंने मुझे टोका।

जहां तक मैं समझ पा रहा था उन्होंने खुद ही पल्लू गिराया था।

वो देखकर मुस्कराते हुए बोली- इनको बाद में देख लेना, पहले खाना खा लो विशाल!
मेरा चेहरा शर्म से लाल हो गया।

मैं खाना खाने लगा लेकिन आंटी की चुदाई के बारे में सोचकर लंड खड़ा का खड़ा ही रहा।

मेरी पैंट में कसाव था, लंड ने तम्बू उठा रखा था।
मैं सोच रहा था कि उठकर हाथ धोने कैसे जाऊं।

फिर आंटी उठकर बर्तन ले गयी और मैंने मौका देखकर हाथ धोने की सोची और उठ कर चला गया।

मेरा लंड साफ मेरी पैंट में खड़ा दिख रहा था।
आंटी ने आते हुए मुझे देख लिया।
मैं लंड को छुपा नहीं सकता था इसलिए वो मुस्कराने लगी।

बीच में ही उन्होंने मुझे टोक लिया और मेरे लंड पर हाथ फेरकर बोली- कोई लड़की पटा लो बाबू, वरना ये ऐसी ही परेशान करेगा।
ये कहते हुए वो मेरे लंड को सहला रही थी।

अब मेरे लिए तो लाइन क्लियर ही थी।
मैं बोला- आप ही दूर कर दो ना आंटी इसकी परेशानी?
बस इतना कहना था कि हम दोनों वहीं पर खड़े खड़े एक दूसरे के होंठों को चूमने लगे।

वो मुझसे लिपटने लगी और मैं उनकी गांड को दोनों हाथों से उनकी साड़ी के ऊपर से ही दबाते हुए उसके होंठों को चूसने लगा।

श्वेता आंटी की चूचियां बहुत बहुत बड़ी बड़ी थीं।
मुझे उनके बूब्स को दबाए बिना रहा नहीं जा रहा था और मैंने गांड से हाथ हटाकर उनकी चूचियों को पकड़ लिया।

मैं जोर जोर ब्लाउज के ऊपर से ही उनके बड़े बड़े स्तनों को भींचने लगा।

मैं दोनों हाथों से उनकी चूचियों को दबा रहा था और वो मेरी पैंट को खोलने लगी। उन्होंने पैंट खोलकर नीचे कर दी और मेरा अंडरवियर नीचे करते हुए मेरे घुटनों के सामने बैठ गयी।

उन्होंने मेरे लंड को देखा और उनके चेहरे पर एक मुस्कान तैर गई।
अगले ही पल आंटी के लाल लिपस्टिक वाले होंठ मेरे लंड पर कस गए।
वो बिहारी आंटी मेरे लंड को पूरा मुंह में लेकर चूसने लगी।

मैं आह्ह … आह्ह … करते हुए उसको लौड़ा चुसवाने लगा।
बहुत मजा आ रहा था दोस्तो! लग रहा था जैसे कि वो बहुत समय से प्यासी है।

उन्होंने एक-दो मिनट मेरे लंड को चूसा और मैं अब तक बेकाबू सा हो गया था। मैंने उसको कंधों से पकड़ कर उठाया और उनके होंठों को चूसते हुए उनके ब्लाउज पर हाथ फिराने लगा।

पीछे हाथ ले जाकर उसके हुक खोल दिए। आंटी ने नीचे से ब्रा भी नहीं पहनी थी। उनकी आधी खुली लाल साड़ी में अब वो ऊपर से नंगी हो गई थी।

मैंने चूचियों को चूमना शुरू किया। फिर बारी बारी से दोनों चूचों को पीया।
वो बोली- बेडरूम में चलो प्लीज … अब खड़ी नहीं रह सकती। लिटाकर चूस लो इनको!

हम दोनों जल्दी से बेडरूम में गए और दोनों नंगे होकर एक दूसरे पर टूट पड़े।
वो मेरे लंड को चूसने लगी और मैं आंटी की गीली चूत को चाटने लगा। उनकी चूत बहुत मादक खुशबू दे रही थी।

मैं लगातार उनकी चूत में जीभ देकर चूसता रहा।
वो मदहोश होने लगी और तड़प उठी।

फिर बोली- डाल दो विशाल … अपना विशाल लंड मेरी चूत में डाल दो … जल्दी से इसकी प्यास बुझा दो।

तो मैंने भी तड़पाने के लिए बोला- आंटी … पहले गांड मरूँगा फिर चूत.
तो उन्होंने बोला- नहीं, पहले चूत मारो फिर गांड दूंगी।
मैंने थोड़ा नाटक किया और फिर मान गया।

फिर मैंने आंटी को पीठ के बल लिटा दिया और उनकी टांगें फैला दीं। मैंने उनकी चूत में उंगली करना शुरू किया और वो एकदम से मछली के जैसे तड़पने लगी।

उन्होंने मेरे हाथ को पकड़ लिया और तेजी से अपनी चूत में अंदर बाहर करवाने लगी।
उनकी चूत की आग अब हद से ज्यादा बढ़ गयी थी।
जब उनसे रहा न गया तो उन्होंने मुझे अपने ऊपर खींच लिया और खुद ही मेरा लंड अपनी चूत में लगवाकर मेरे होंठों को चूसने लगी।

तब मैंने हल्का सा धक्का दिया और मेरा लंड आंटी की गीली चूत में प्रेवश कर गया।
मैंने एक और धक्का मारा और एक आह्ह … के साथ आंटी की चूत में आधा लंड उतर गया।

अब मैं आंटी को चोदने लगा और धीरे धीरे आंटी की चूत ने मेरा पूरा लंड जड़ तक अपनी चूत में समा लिया।
अब हम दोनों सेक्स के नशे में डूबते चले गये।

वो गांड उठाकर चुदती रही और मैं उसको चोदता रहा।

मेरी स्पीड अब काफी बढ़ गयी थी। पांच मिनट चोदने के बाद मैंने आंटी को घोड़ी बना दिया और पीछे से आंटी की चूत चुदाई करने लगा।

इस बीच आंटी झड़ गयी।
वो ढीली पड़ गयी तो मैंने उसकी गांड में लंड लगा दिया।

मैंने उसकी कमर पकड़ कर जोर लगाया और लंड उसकी गांड में उतार दिया।
आंटी आगे खिसक कर छुड़ाने लगी लेकिन मैंने उसको कस कर पकड़ लिया।

उन्होंने थोड़ी देर छुड़ाने की कोशिश की लेकिन मैंने धीरे धीरे उसकी गांड को चोदना शुरू कर दिया।
फिर उसको मजा आने लगा और वो आराम से गांड की चुदाई करवाने लगी।

मैंने अगले दस मिनट तक आंटी की गांड चोदी।

जब मैं झड़ने को हुआ तो बोली कि मुंह में पिलाना।
मैंने उसकी गांड से लंड निकाला।
उन्होंने अपनी पैंटी से मेरे लंड को पौंछा और फिर उसको चूसने लगी।

कुछ पल के बाद मेरा वीर्य उसके मुंह में गिरने लगा।
उन्होंने सारा माल पी लिया और हम दोनों थक कर गिर पड़े।

उसके बाद मैंने उनको एक राउंड और चोदा।

आंटी बहुत ज्यादा प्यासी थी।
करीब तीन बार झड़ने के बाद भी वो नहीं मानी और फिर बोली- आज यहीं रुक जाओ।
मैं वहीं रुक गया और रात भर में 2 बार आंटी की चूत की चुदाई चली और एक बार गांड चुदाई हुई।

अगले दिन वो बोलने लगी- एक दिन और रुक जाओ।
मगर दोस्तो, मुझे काम के सिलसिले से वापस रांची जाना पड़ा।

फिर जब भी मौका मिला मैंने उसे चोदा।
अभी भी जब वो बुलाती है तो मैं जाकर उसकी चुदाई करके आ जाता हूं।

उस गर्म आंटी जैसी औरत मुझे अभी तक दोबारा नहीं मिली।
मैंने कई भाभियों की चुदाई भी की है लेकिन इन बिहारी आंटी की चुदाई की बात अलग ही है।

दोस्तो, आप भी कमेंट्स में बतायें कि आपको लड़की की चुदाई, भाभी की चुदाई या आंटी की चुदाई में से किसमें सबसे ज्यादा मजा आता है।

आपको ये बिहारी आंटी की चुदाई कहानी कैसी लगी मुझे कमेंट्स में या ईमेल में जरूर बताना।
मेरा ईमेल आईडी है- [email protected]

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