पड़ोसन कविता चाची की चुदाई

अमित 571 2014-03-15 Comments

प्रेषक : अमित मुख़र्जी

दोस्तो, मैं अमित मुख़र्जी आप सभी पाठक, पाठिकाओं का तहे दिल से सलाम करता हूँ। मैं कोलकाता से हूँ, मैं देखने में गोरा, नैन-नक्श ठीक, कसरत करने वाला 19 साल का तंदरुस्त लड़का हूँ। मेरे लण्ड का साइज़ सात इंच लम्बा और 3 इंच मोटा है। मेरी बहुत सारी गर्लफ्रैंड हैं और मैं उनको चोदता रहता हूँ। इससे पहले भी मैंने कई लड़कियों को चोदा है।

अब मैं असल मुद्दे की बात पर आता हूँ। यह पाँच महीने पहले की बात है, हमारे बिल्डिंग में एक नया परिवार रहने के लिये आया, वो लोग सिर्फ दो थे, माँ और बेटी, उनके पति नहीं थे, वो अलग रहता था। माँ का नाम कविता और बेटी का नाम सुनीता। मगर माँ और बेटी दोनों बहुत ही सेक्सी थी। माँ की उम्र करीब 35 साल और बेटी की उम्र करीब 18 साल। मैं पहले दिन से ही उन दोनों का दीवाना बन गया था। बेटी तो बेटी, माँ भी कुछ कम नहीं थी।

मैं आपने काम में लग गया और उन लोगों से बातें करने का मौका ढूँढ़ता रहा। मैं उनके घर गया और उनके बारे में पूछने लगा तो मालूम पड़ा कि वो लोग इस शहर में नए हैं। मेरा काम और भी आसान हो गया। उन लोगों ने खुद मुझसे मदद के लिये कहा तो मैंने उनका सामान लगाने में मदद कर दी और इस तरह मुझे उस घर में प्रवेश मिल गया।

अब एक महीने हो चुके थे, मैं उन लोगों से बहुत अच्छी तरह से घुल-मिल गया था और हम लोग अक्सर रात के 11-12 बजे तक बातें करते और पत्ते खेलते। इसी बीच मौका पाते ही मैं सुनीता की चूची देख लेता था और कभी-कभार कविता चाची की चूची भी दिख जाती।

मैं सुनीता को चोदने के लिये हमेशा मौके की तलाश में रहता था। सुनीता मुझसे बहुत खुलने लगी थे और कविता चाची भी मुझसे दोस्त की तरह बातें करती थीं।

फिर एक दिन बहुत बारिश हो रही थी और मैं कॉलेज नहीं गया, खिड़की से देखा तो सुनीता स्कूल जा रही थी, तो मैंने सोचा आज स्कूल जाने की क्या जरुरात है इसको? फिर मुझे याद आया कि उसके तो इम्तिहान चल रहे हैं।

और फिर मेरे शैतानी दिमाग में एक आईडिया आया। मैं तुरंत सुनीता के घर चला गया, जो कि हमारे बिल्डिंग के तीसरे माले पर है।

मैं अन्दर घुसा तो देखा कविता आंटी रसोई में काम कर रही हैं। वो उस समय पतली सी नाईटी पहन कर काम कर रही थीं, जिसके आर-पार सब कुछ दिख रहा था। यह भी दिख रहा था कि वो अन्दर बिलकुल नंगी हैं, उन्होंने अन्दर न ही ब्रा और न ही पैन्टी पहनी है। मैं तो देख कर दंग रह गया। मुझे पहले से पता था कि चाची अन्दर कुछ नहीं पहनती, मगर आज तो जैसे उन्होंने सब कुछ दिखाने के लिये ही यह पारदर्शी नाईटी पहनी है।

मैं उनको बहुत घूर-घूर कर उनकी तरफ देख रहा था और उनकी 36-34-36 की सेक्सी फिगर नाप रहा था। शायद वो भी समझ गई थीं, जब उन्होंने मेरे पैन्ट का निचला हिस्सा देखा जो ऊपर उठा हुआ था।

मैं उन्हें अपनी बातों में लपेटने की कोशिश करने लगा और उनकी तारीफ करने लगा कि चाची आज तो आप बहुत खूबसूरत लग रही हो और यह भी कहा कि आज तो आप बहुत सेक्सी लग रही हो।

यह सुनकर वे हँस दी और मुझे पूछने लगी- तुम्हारी कोई गर्ल-फ्रेंड है?

तो मैंने भी उनसे झूठ बोल दिया कि मैं तो अभी भी कुंवारा हूँ, मगर जिस के पास आप जैसी खूबसूरत आंटी होगी, उसको गर्ल-फ्रेंड की क्या जरूरत?

तो वो हँसने लगीं और मेरे गालों पर चिकोटी ली और कहा- सो क्यूट!

मेरा तो दिल कर रहा था कि उनकी चूची दबा कर बोल दूँ- सो सेक्सी !

मगर मैंने सोचा कहीं ये नाराज़ न हो जाएँ, सो मैंने बात को घुमा दिया।

फिर चाची ने मुझसे कहा- मैं नहाने जा रही हूँ, तुम बैठो, मैं अभी आती हूँ।

और सीधा बाथरूम में घुस गईं।

मैं सोचने लगा इसकी कैसे लूँ? और तभी मेरा ध्यान उनके टीवी के सामने रखा हुआ पैकेट पर पड़ा और मैंने चुपके से उसको खोला तो देखा कि उसमे ब्लू-फिल्म की सीडी रखी हुई हैं। मुझे हिम्मत मिल गई और मैंने ठान लिया कि आज चाहे कुछ भी हो जाए मगर आज तो चाची को चोद कर ही रहूँगा।

तभी चाची ने खुद मुझे आवाज़ दी- अमित, प्लीज मुझे तौलिया देना, मैं भूल गई हूँ।

और मैं तो इसी मौके के इंतज़ार में था। मैं तौलिया लेकर बाथरूम के पास गया, देखा दरवाज़ा खुला हुआ है और चाची बिल्कुल नंगी होकर नहा रही हैं।

मैंने देखा तो मेरी हालत ख़राब हो गई।

“क्या मस्त चूतड़ थे और चूची भी कमाल की थीं, बड़ीं और बिल्कुल गोल… एकदम तनी हुईं और चूत आय-हाय ! सफाचट चिकनी चमेली, गुलाबी, पाव सी फूली हुई!”

चाची ने मुझे देखा, तो मद भरी आवाज में कहा- अन्दर आ जाओ!

मैं अन्दर गया, मेरे नज़रें उन पर से हट ही नहीं रही थीं।

चाची मुस्कुरा कर मुझसे कहने लगी- क्या देख रहे हो?

मैंने कहा- आप ऐसे !!

तब उन्होंने कहा- कभी ऐसे नंगी औरत नहीं देखी क्या?

मैं तो चुपचाप बस सुन रहा था, फिर उन्होंने कहा- मुझे सब पता है, मेरी चूची देख कर तुम्हारा लण्ड खड़ा हो गया था ना ! अभी भी देखो खड़ा है।

मैं निःशब्द था।

उन्होंने कहा- अब इसको छुपाओ मत, मुझे दे दो जानू !

मेरी तो जैसे लॉटरी खुल गई और मैं तो बस टूट पड़ा। मुझे कुछ नहीं करना पड़ा। चाची ने खुद ही मुझे नंगा किया और हम लोग शॉवर के नीचे दोनों ही बिल्कुल नंगे, एक-दूसरे को पागलों की तरह चूम रहे थे। मैं उनको अपनी बाँहों में भर कर उनकी पीठ को सहला रहा था और उनकी पिछाड़ी को दबा रहा था।

चाची ने मुझे खुद से अलग किया और नीचे बैठ कर मेरे लण्ड को हाथों से ऊपर-नीचे करने लगीं और अपना मुँह खोल कर मेरा लण्ड चूसने लगीं। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। कभी तो चाची मेरा लण्ड अपने मुँह के बहुत अन्दर तक घुसा रही थीं, तो कभी गन्ने की तरह मेरे लण्ड को चूस रही थीं। मैं मजबूर था और मेरी पिचकारी छूट गई, मगर चाची ने लण्ड नहीं छोड़ा और चूस-चूस कर सारा रस पी गईं।

फिर उन्होंने मुझे अपने गले से लगा लिया और चूमने लगीं। कुछ देर बाद मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया। अब मैं नीचे था और चाची भी नीचे बैठ कर अपनी दोनों टाँगें फैला कर मुझे अपनी चूत चटवा रही थीं। मैं अपनी पूरी जुबान उनकी चूत के अन्दर डाल रहा था। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !

चाची मजे से ‘उह्ह उह्ह अहह अमित नहीं प्ल्ज्ज़ नहीं ! उफ़ उम्म्म…’ करने लगीं और अपने होंठ अपने दांतों से दबाने लगीं। मैं लगातार उनकी चूत चाट रहा था और उनकी चूची दबा रहा था।

वे मुझे अपनी तरफ खींच कर मेरे होंठों को चूसने लगीं और मेरा सर को सहलाते हुए कहने लगीं- जानू प्लीज़, मुझे चोदो, अब मुझसे सहा नहीं जाता।

अब मैं भी चोदना चाह रहा था। मैं चाची को जमीन पर लिटा कर उनकी टांगों के बीच में बैठ कर उनकी चूत में अपना लण्ड घुसाने लगा। पहले तो मेरा लण्ड घुसा ही नहीं, फिर मैंने चाची की चूत को चौड़ा खोल कर अपना लण्ड घुसाया, तो मेरा सुपाड़ा फंस गया और चाची चिल्ला पड़ीं।

मुझे थोड़ी हैरानी हुई, पर चाची की चूत बहुत संकरी थी, बहुत दिन न चुदाने की वज़ह से ऐसा हुआ था। मगर मुझे तो तब नशा चढ़ा हुआ था। मैंने जानबूझ कर चाची की चूत में लौड़े को और जोर से घुसा दिया।

चाची रोने लगी- प्लीज़ अमित निकालो, निकालो, बहुत दर्द हो रहा है।

मगर मैं था कि पूरा लण्ड अन्दर घुसा कर ही दम लिया और फिर चाची को बीस मिनट तक चोदा।

चाची तीन बार झड़ चुकी थीं। मैं भी आखिर में झड़ गया और चाची की चूत को अपने मक्खन से भर दिया। चाची बहुत खुश लग रही थीं। मैं चाची, को और चाची मुझे एक दूसरे को पकड़ कर लेटे रहे।

फिर उसके बाद मैंने चाची की गांड भी मारी।

और अब तो ऐसा हो गया है, मैं माँ, और बेटी दोनों को ही चोदता हूँ। वो किस्सा फिर कभी बताऊँगा कि मैंने उसकी बेटी सुनीता को कैसे चोदा?

मेरी कहानी आप सब को कैसी लगी? प्लीज़ मुझे मेल जरूर कीजियेगा।

What did you think of this story??

Click the links to read more stories from the category पड़ोसी or similar stories about

You may also like these sex stories

Comments

Scroll To Top