कार ड्राइवर और मालकिन की चुत चुदाई का खेल

(Naukar Malkin Sex Kahani)

विपिन पाठक 2021-10-14 Comments

नौकर मालकिन सेक्स कहानी में पढ़ें कि नौकर ने कैसे अपनी मालकिन के अकेलेपन को देखा, उसकी सेक्स की जरूरत को पहचाना. फिर उसकी वासना ठंडी की.

दोस्तो, यह नौकर मालकिन सेक्स कहानी जो मैं आपको सुना रहा हूँ. वो हमारी एक दोस्त सुम्मी पाठक की है. आप प्यार से पढ़िएगा और प्यार दीजिएगा.

सुम्मी की शादी के 5 साल गुजर चुके थे. सुम्मी 27 वर्ष की एक हसीन परी है.

उसके 34 के साइज के कड़क बूब्स, हाइट 5 फुट 2 इंच के, मस्त उठी हुई गांड, रेशम से बाल, रसगुल्ले से मीठे होंठ हैं.

वो अपनी लाइफ में काफी खुश है. उसने अपने पति के साथ ज़िन्दगी के कई अच्छे और बुरे पल देखे हैं.
फिर चाहे उसके पति के बिजनेस का बन्द होना हो या सफलता पर सफलता मिलने का अवसर हो.

चूंकि वक़्त एक जैसा नहीं रहता है. घड़ी की सुई छह पर भी आती है और बारह पर भी जाती है.

सुम्मी के साथ जो बात उसे हमेशा कष्टदायक थी, वो ये बात थी कि उसका पति उसे सारी खुशी दे रहा था लेकिन वक़्त नहीं देता था. सुम्मी भीतर ही भीतर अपने आप को अकेलेपन की गहरी खाई में जाती हुई महसूस कर रही थी.

उसकी तमाम ख्वाहिशें दम तोड़ रही थीं. उसका पति अपने काम में इतना व्यस्त हो गया था कि उसे बिल्कुल ही टाइम नहीं दे पाता था और साथ में वक़्त गुजारे तो महीनों बीत गए थे.

सुम्मी अपने आपको अकेलेपन से दूर रखने के लिए रोज रोज नए बहाने ढूंढती थी.
कभी वो अकेले ही घूमने चली जाती, अकेले ही फ़िल्म देखने चली जाती, घर में किताबें पढ़ती रहती … लेकिन उसके अन्दर की आग उसे चैन से जीने नहीं दे रही थी.

इसी बीच सुम्मी का पुराना ड्राइवर रमेश, जो कुछ महीनों से अपने गांव में था, वो काम पर वापस लौट आया.

हरीश एक बेहद की आकर्षक चॉकलेटी मर्द था. उसके कुछ लंबे से बाल, सांवला रंग था.
रोजाना कसरत करने के कारण उसका जिस्म एकदम टाइट था.
वो एक मस्त नौजवान था.

हरीश के आ जाने से सुम्मी को एक साथ मिल गया था.
वो दोनों रोज बातें करने लगे थे.

पति की गैरहाजरी में सुम्मी का समय हरीश के साथ गुजरने लगा था.
दोनों एक दूसरे से दिल की बातें शेयर करने लगे थे.

सुम्मी उसे अपने दोस्त की तरह रखती था … ना कि ड्राइवर के जैसे.

अब तक सुम्मी और हरीश के बीच कुछ भी न था.
मगर एक दिन सुबह सुबह सुम्मी अपने घर के गार्डन में टहल रही थी.
तभी उसकी नजर उसके ड्राइवर हरीश के बदन पर जा पड़ी.

हरीश इस समय एक लंगोट बांधें हुए दंड पेल रहा था. उसके कड़ियल शरीर से पसीना बह रहा था जो उसके सांवले बदन को चमका रहा था.

हरीश की घोड़े सी जांघें और बलिष्ठ भुजाओं की मछलियों को देख कर सुम्मी की चुत में चुनचुनी होने लगी.
उसके लौड़े पर लाल लंगोट देख कर सुम्मी उसके लंड की लम्बाई मोटाई का अंदाजा करने लगी.

फिर वो कुछ देर तक हरीश को कसरत करते देखती रही और वापस अपने कमरे के बाथरूम में आकर नंगी हो गई.
उसने हरीश को याद करके अपनी चुत में उंगली करना शुरू कर दी और कुछ ही समय में वो झड़ गई.

अब सुम्मी की नजरों में उसका ड्राइवर बस गया था.

फिर एक बार बिजनेस के किसी काम से सुम्मी के पति को दो दिन के लिए मुम्बई जाना पड़ा.

सुम्मी उदास थी … इसलिए नहीं कि पति दूर जा रहे हैं … बल्कि इसलिए कि अगले ही दिन उसका जन्मदिन था.
उसने इस दिन के लिए कितना कुछ सोच रखा था.

हरीश ये सब जानता था कि सुम्मी के दिल पर क्या गुजर रही थी.

जन्मदिन वाले दिन हरीश ने सुम्मी को सुबह सुबह सबसे पहले विश किया.
सुम्मी मुस्करा दी और उसने हरीश को थैंक्यू बोला.

पूरे दिन सुम्मी को कॉल और मैसेज पर लोगों ने शुभकामनाएं दीं लेकिन सुम्मी खुश नहीं थी.
उसके पति को उसका जन्मदिन याद ही नहीं था.

रात को करीब 9 बजे हरीश सुम्मी के पास आया और बोला कि आपको प्रॉब्लम नहीं हो तो मैं आपको कुछ खास चीज दिखाने के लिए ले जाना चाहता हूँ.

सुम्मी ने मना किया पर हरीश ज़िद पर अड़ा रहा.
तो उसने हां कर दी.

सुम्मी ने भी न जाने क्या सोचा और हरीश के साथ जाने के लिए बेहद नजाकत से तैयार होकर बाहर आ गई.

वो इस वक्त कयामत सी लग रही थी.
नीले रंग की साड़ी, उस पर लाल ब्लाउज, खुले बाल, कानों में गोल्डन बाली, होंठों पर लाल लिपस्टिक … सुम्मी मानो कहर बरसा रही थी.

हरीश सुम्मी को देखते ही ख्वाबों में खो गया.

फिर सुम्मी और हरीश दोनों कार में बैठकर शहर से दूर जंगल के बीच में बने सुम्मी ने पति के फार्महाउस में आ गए.

सुम्मी को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि हरीश उसे कहां ले आया है.
वो हरीश से यही सब पूछ रही थी, लेकिन हरीश ने कुछ नहीं बताया.

हरीश सुम्मी को अन्दर ले गया.
अन्दर का नज़ारा देख सुम्मी की आंखें खुली की खुली रह गईं.

फार्महाउस के अन्दर एक हॉल में उसने सुम्मी के बर्थडे सेलिब्रेशन की सारी तैयारी कर रखी थी.
एक बड़ा सा केक, गुब्बारे, मोमबत्तियां.

यह सब देख कर सुम्मी बेहद खुश हुई और उसने पहली बार हरीश को गले से लगाकर शुक्रिया अदा किया.

हरीश ने सुम्मी को एक गिफ्ट दिया और कहा- इसे अभी पहनो.

सुम्मी ने देखा, वो एक ब्लैक कलर की फैंसी ड्रेस थी.
इस तरह की ड्रेस उसने शादी के बाद पहनना छोड़ दी थी.

सुम्मी अन्दर गई और उसने वो ड्रेस पहनी तो वो शॉक हो गई.
वो ड्रेस उसे पूरी तरह से फिट आई थी.

फिर हरीश ने सुम्मी को चाकू दिया और केक कटवाया.
दोनों ने एक दूसरे को केक खिलाया.

उसके बाद हरीश ने सुम्मी को डांस के लिए ऑफर किया.
सुम्मी उसके साथ डांस करने लग गई.

थोड़ी देर बाद हरीश ने सुम्मी के दोनों हाथ पकड़कर उससे प्यार का इजहार किया.

सुम्मी को यह ठीक नहीं लगा. वो बोली- मैं शादीशुदा हूँ … यह सब ठीक नहीं है.
हरीश थोड़ी देर सुम्मी को देखता रहा.

फिर अचानक से हरीश ने सुम्मी के करीब आकर उसके गले से मंगलसूत्र को उतार दिया और कहा- लो आज मैंने तुम्हें आज़ाद कर दिया है. कब तक अकेलापन झेलती रहोगी.

सुम्मी अवाक होकर हरीश की तरफ देखने लगी.
उसके मन में भी हरीश के लिए प्यार उमड़ रहा था मगर वो कुछ हिचकिचा रही थी.

सुम्मी की इस हिचकिचाहट को हरीश ने समझ लिया था.
अगले ही पल हरीश ने सुम्मी के होंठों पर अपने होंठ लगा दिए और चुम्बन करने लगा.

सुम्मी भी जिस आग में इतने दिनों से तड़फ रही थी, वो आज बुझने वाली थी. सुम्मी हरीश का साथ देने लगी.

दोनों एक दूसरे को बेताबी से चूमने लगे थे.

हरीश कभी सुम्मी के गालों को चूमता, कभी उसके होंठों को, तो कभी उसके गले को. सुम्मी उसका पूरा साथ दे रही थी.

कुछ पल बाद हरीश सुम्मी के मम्मों को ड्रेस के ऊपर से ही दबाने लगा.
सुम्मी के दोनों हाथ हरीश की गांड पर जम गए थे.
वो हरीश को अपने जिस्म से चिपकाए हुई थी.

उन दोनों की वासना एक दूसरे के तन बदन से रगड़ खाती हुई भड़कती चली गई और उसी बीच हरीश ने सुम्मी की ड्रेस को कब उतार कर जमीन पर फेंक दी, कुछ पता ही नहीं चला.

अब हरीश सुम्मी को पूरी नंगी कर चुका था.
सुम्मी के बड़े बड़े चूचे हवा में तने हुए थे और छोटे छोटे बालों वाली मक्खन सी मुलायम चूत हरीश के सामने खुल गई थी.

हरीश सुम्मी के दोनों मम्मों को सहला रहा था और सुम्मी आंख बंद करके सिसकारियां भर रही थी.

हरीश सुम्मी के एक बूब को चूसने लगा.
वो उसके पिंक निप्पल को चूसता हुआ काट रहा था.

सुम्मी को आज अपने दूध चुसवाने में बेहद मजा आ रहा था.
उसके पति ने उसके साथ कभी भी ऐसा प्यार नहीं किया था.
वो तो हमेशा उसके ऊपर चढ़ता और लंड चुत में पेल कर कुछ धक्के देकर सो जाता था.

इसके बाद हरीश ने सुम्मी से बोला- तुम मेरा पैंट उतार दो.

सुम्मी ने जब हरीश की पैंट और चड्डी निकाली तो वो चौंक गई.
उसके सामने हरीश का लंबा, गहरे काले रंग का मूसल सा लंड आ गया था. हरीश का लंड बहुत बड़ा था.

सुम्मी ने इस तरह का हब्शी लंड आज तक नहीं देखा था.

हरीश ने सुम्मी के बाल पकड़कर अपना लंड सुम्मी के मुँह में दे दिया.

सुम्मी हरीश के लंड को चूसने लगी थी.
थोड़ी देर बाद हरीश सुम्मी को लेकर बेड पर आ गया और सुम्मी की हल्के बाल वाली चिकनी चूत पर अपना मुंह लगा दिया.

सुम्मी इस वक्त स्वर्ग का अहसास कर रही थी.
आज पहली बार कोई उसकी चूत चाट रहा था.

सुम्मी बेड पर जोर जोर से सिसकारियां भर रही थी और हरीश का नाम ले लेकर चिल्ला रही थी.

कुछ देर बाद हरीश उठा और सुम्मी को कुतिया बनाकर उसकी चूत पर थोड़ा सा अपना थूक लगाकर लंड अन्दर डाल दिया.

सुम्मी चिल्ला उठी.
उसने इतना मोटा लंड कभी अपनी चुत में लिया ही नहीं था.

मगर हरीश किसी कसाई की तरह सुम्मी की चुत को फाड़ता रहा और पूरा लौड़ा चुत में पेवस्त कर देने के बाद वो जोर जोर से झटके मारने लगा था.

सुम्मी किसी बकरी की तरह मिमिया रही थी.
उसकी चुत से हल्का खून भी निकल आया था.

कुछ देर की पीड़ा के बाद सुम्मी को भी हरीश के मोटे लम्बे लंड से चुदने में मजा आने लगा था.

अब हरीश मस्ती से सुम्मी के मम्मों को मसल रहा था और उसे धकाधक चोद रहा था.

सुम्मी भी इस आनन्द में खुद को भुला चुकी थी.
हरीश सुम्मी की गांड पर थप्पड़ मारे जा रहा था.
इससे सुम्मी दर्द और प्यार का अहसास एक साथ कर रही थी.

कुछ देर बाद हरीश बिस्तर पर चित लेट गया और सुम्मी उसके ऊपर बैठकर लंड को अपनी चुत में फंसा कर गांड हिलाने लगी थी.
हरीश उसकी चूचियों को दबा रहा था और बारी बारी से दोनों आम चूस रहा था.
वो दोनों चुदाई की मस्ती में एक दूसरे में खो गए थे.

कुछ देर बाद हरीश ने सुम्मी को अपने लौड़े से उठाया और उसे अपने नीचे लिटा कर फिर से चुदाई करने लगा.

थोड़ी देर बाद सुम्मी झड़ गई और वो निढाल हो गई.
उसके कुछ देर बाद हरीश भी झड़ने को आ गया.

उसने सुम्मी की चुत से लंड निकाला और उसके मम्मों पर अपना स्पर्म निकाल दिया.
फिर वो उसके होंठ पर चुम्मी करके बाजू में लेट गया.

आज की चुदाई से सुम्मी पूरी तरह से संतुष्ट हो गई थी. उसे हरीश का साथ अच्छा लगा था.

कुछ देर बाद फिर से चुदाई शुरू हो गई और सारी रात फार्म हाउस में सुम्मी ने हरीश के लौड़े से अपनी चुत की आग बुझवाई.

उसके बाद सुम्मी हरीश के लंड की दीवानी हो गई थी.
उसे अब अपने पति के समय न देने की कमी से कोई गिला शिकवा नहीं रह गया था.

दोस्तो, मेरी यह नौकर मालकिन सेक्स कहानी एकदम सच्ची घटना है. आपको मेरी सेक्स कहानी कैसी लगी, प्लीज़ मुझे मेल करें.
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