लॉकडाउन में चरमसुख की प्राप्ति- 1

(Lockdown Me Charam sukh Ki Prapti- Part 1)

यह कहानी लॉकडाउन में सेक्सुअल फीलिंग की है. लॉकडाउन में सब लोग अपने अपने घर में कैद होकर रह गए. एक अकेला मर्द जब घर में रहा तो उसे अपनी नौकरानी ही भा गयी.

दोस्तो, कैसे हैं? घर पर रह कर इस बार तो खूब मजे किये होंगे. शादीशुदा ने तो रोज दिन-रात सुहागरात मनाई होगी और कुंवारों ने रोज हाथ से बजाई होगी. किसी किसी के नसीब में तो दूसरे की अमानत भी मिल गयी.

चूंकि और कुछ ज्यादा करने को कुछ था नहीं तो इस बार नीचे के हिस्से की शामत आई रही.
बाहर निकल कर पुलिस से सुजवा कर आने से अच्छा था कि घर पर ही सुजा लो.

मुझे बहुल मेल मिले, जिनसे साफ़ जाहिर था कि भाभियों और लड़कियों ने सबसे ज्यादा मजे किये हैं इस बीच. मेरे पाठकों ने मेरी लिखी पुरानी कहानियां दुबारा पढ़ीं. मेरी पहले की सारी कहानियां पढ़ पढ़ कर जिसे जो मिला, जिसका मिला वही घुसा लिया. मुझे बहुत मजेदार किस्से मिले हैं, लिखने को.

आज का किस्सा लॉकडाउन में सेक्सुअल फीलिंग का है.

राजेश रजिस्ट्री ऑफिस में अधिकारी है. सरकारी तनख्वाह और ऊपरी कमाई हर किसी को मस्ताना बना देती है. राजेश 29 साल का बांका जवान है. बहन की शादी के कारण वो अभी तक कुंवारा है. अब बहन की शादी हो गयी है, तो उसका भी बाजा जल्दी ही बजेगा.

सुबह जल्दी उठकर वो आधा घंटे लॉन में योगा करता है, फिर साइकिल चला कर जिम जाता है. और एक घंटा पसीना बहा कर 8 बजे तक वापिस आ जाता है.

8 बजे शीला, उसकी कामवाली आ जाती है. शीला का काम घर की सफाई, कपड़ों की धुलाई और राजेश का नाश्ता-खाना बनाना होता है. शाम का खाना राजेश बाहर खाता है या कोई न कोई पार्टी दावत देती है.

राजेश से मिलने कोई न कोई पार्टी सुबह घर जरूर आती है. वो रूपये के साथ कभी फ़ल कभी मिठाई जरूर लाते हैं. राजेश अकेला, कितना खायेगा तो वो शीला को देता रहता है.

शीला को वो पैसे भी अच्छे देता है तो शीला सारा काम मन से करती है. शीला का पति कमजोर मरियल सा अफीमची है. किसी सरकारी कार्यालय में चपरासी है. शीला ने एक बच्चा तो उससे पैदा कर लिया. अब उसे पास भी नहीं फटकने देती.

शीला का बदन खूब गदराया हुआ है और हर समय बन-ठन के रहती है. वो पढ़ी लिखी और तहजीबदार थी. सुबह के नाश्ते में और खाने में एक से एक लजीज चीज बनाती थी.
राजेश ने उससे कह रखा था कि ज्यादा बना लो और तुम भी खा लेना.

उसे पैसे की तो कोई दिक्कत है ही नहीं क्योंकि राजेश उसे अच्छा वेतन और इनाम देता रहता है. शीला का बच्चा अपनी दादी के पास रहता है, पास के शहर में. राजेश ने उसका एडमीशन एक स्कूल में करा दिया था, फीस माफ़ करा दी थी.
इतना ही नहीं शीला के नाम से काशीराम आवास योजना में मकान भी दिलवा दिया था.

राजेश तबियत का रंगीन है. पर समाज में उसकी बहुत साफ़ छवि है. शीला को भी कभी कोई दिक्कत नहीं हुई. राजेश को पोर्न मूवी और अन्तर्वासना कहानियों का शौक है. आप जानते ही हैं कि कुंवारे लड़कों का इन सबका अंत मुठ मारने से होता है.

पर राजेश ने आज तक किसी औरत को हाथ नहीं लगाया था, अलबत्ता कॉलेज लाइफ में उसकी एक गर्लफ्रेंड थी जिससे उसके शारीरिक सम्बन्ध भी थे. पर अलग जाति की होने से बात शादी तक नहीं पहुंची और वे दोनों घर वालों के आगे झुक गए.

अचानक हुए लॉकडाउन में राजेश के सामने दिक्कत आ गयी. रात को ही प्रधानमन्त्री जी ने घोषणा की तो राजेश सोच में पड़ गया कि अब उसका घर कैसे चलेगा. वो तुरंत बाज़ार जाकर ढेर सारी ब्रेड, बन्स, चीज, और न जाने क्या क्या ले आया.

सुबह उठ कर उसने योग किया और बाहर लॉन में बैठ कर चाय पीने लगा. तभी गेट खोलकर शीला आई. उसे देखकर राजेश ऐसा खुश हुआ मानो उसकी घरवाली मायके से आ गयी हो.
अंदर आकर शीला ने बताया कि उसका शराबी आदमी कल सुबह उससे लड़कर अपने मां के शहर चला गया था और अब लॉक डाउन की वजह से दो चार दिन बाद ही आ पायेगा.

शीला ने राजेश को कहा कि अगर राजेश को कोरोना के डर के कारण कोई आपत्ति न हो तो शीला रोज की तरह उसका काम कर सकती है.
राजेश सोचने लगा कि कोरोना का डर तो है. अब ये रोज अपने मोहल्ले में जायेगी, इन लोगों के पास कोई ज्यादा बड़ा मकान तो होता नहीं. पता नहीं वहां कौन कौन कहाँ कहाँ से आएगा.
कहीं ये इन्फेक्शन ले आई तो?

उसने अंदर आकर शीला से कहा- तुम आज तो काम कर लो. पर कल से मत आना क्योंकि आने-जाने से इन्फेक्शन हो सकता है.
शीला ने ‘ठीक है’ कहा और काम में लग गयी.

आज उसने सब्जी ज्यादा बना दी, कुछ मठरी वगेराह सेक दी. बेड शीट भी उसने बदल दी.

बेड शीट धोते समय उसे एक जगह कड़ापन महसूस हुआ, वो समझ गयी कि राजेश ने मुठ मारा है. वो मन ही मन मुस्कुरा दी.

अब शीला भी खाना खाते समय सोच रही थी कि लॉक डाउन तक घर पर ही रूखा सूखा खाना पड़ेगा. मन भी नहीं लगेगा.

राजेश ने उसको मार्च की पूरी तनख्वाह दे दी और कहा- कोई दिक्कत हो तो बता देना.
शीला ने हिम्मत करके कहा- साब, मेरा मन भी घर पर नहीं लगेगा और मेरा कमरा बिलकुल अलग है. वहां कोई आता जाता नहीं. मुझे कोई इन्फेक्शन नहीं होगा. अगर आप कहें तो मैं रोज आ जाया करूं?

राजेश ने उससे कहा- एक काम करो. अगर तुमको कोई दिक्कत न हो तो अपने आदमी के आने तक यहीं बाहर वाले कमरे में रह लो.
शीला सोचने लगी कि कोई क्या कहेगा.
फिर उसने सोचा कि लोग तो यही समझेंगे कि वो अपने पति के साथ गयी है.

उसने वहीं से अपनी सास को फोन किया और उसकी राय ली.
उसकी सास की तो राजेश ने बहुत मदद की थी. तो उसने तुरंत हाँ कह दी और कहा कि जब शीला का पति यहाँ से जाएगा तो वो शीला को राजेश बाबू की कोठी से ले लेगा.

शीला तुरंत घर जाकर अपना सामान ले आई और बाहर वाले सर्वेंट क्वार्टर में रख दिया. अब यह तो तय था कि अगले हफ्ता दस दिन तो शीला को यहीं रहना था.

वो फटाफट नहाकर फिर अंदर कोठी में आ गयी. राजेश टी वी पर मूवी देख रहा था.
शीला ने उसको चाय बना कर दी.
आज दिन में घर की चाय राजेश को पहली बार मिल रही थी.

शीला के पास कुछ करने को ख़ास नहीं था तो उसने राजेश से कहा- साब आजकल में जब मौका मिले तो किराने का सामान मंगा देना. आपको बढ़िया बढ़िया चीजें बना कर खिलाऊँगी.
उसने इस ढंग से ये बात कही कि राजेश को भी हंसी आ गयी.

सही बात ये थी कि आज उसे अपनी कोठी घर सी लग रही थी. शीला भले ही नौकरानी थी, पर उसकी सुन्दरता और सलीका उसे घर के सदस्य जैसा ही आभास देते थे.

शीला ने राजेश से कहा- सुबह जो खाना बनाया था, वो मत खाना. वो मैं खा लूंगी. अभी और रात को आपके लिए गर्म गर्म पूरी आलू बना देती हूँ.
उसको मालूम था कि राजेश को पूरी आलू बहुत पसंद है.

राजेश बातों बातों में यह भूल ही गया कि वो जूली मूवी देख रहा है और अब बहुत ही सेक्सी सीन सामने था.

एक पल शीला की मौजूदगी में उसे अटपटा लगा. शीला समझ गयी, वो वहां से हट गयी.
पर राजेश ने महसूस किया कि दूसरे कमरे से परदे के पीछे से वो मूवी ही देख रही थी.

दोपहर को खाने के बाद राजेश अपने कमरे में सोने चला गया.
और शीला बोली- मैं अपने क्वार्टर में जाती हूँ, शाम को आ जाऊंगी.

राजेश जानता था कि क्वार्टर तो गन्दा पड़ा हुआ है. तो उसने कहा- तुम ड्राइंग रूम में सो जाओ, कोई बात नहीं.

अब राजेश को तो दोपहर में सोने की आदत नहीं थी. तो वो तीन बजे से उठ कर बाहर लॉन में गया.
तो वहां धूप थी.
वो वापस अंदर बारामदे की ओर आया जहां शीला सो रही थी.

शीला की उन्मुक्त जवानी इस समय फूट कर बिखरी पड़ी थी. उसकी साड़ी घुटनों तक उठी थी और पल्ला हट कर उसके उरोज दिखा रहा था. शीला के ब्लाउज का ऊपरी बटन खुला था तो दोनों संतरों की बीच की लाइन स्पष्ट दिख रही थी.

राजेश ने शीला को कभी इस निगाह से देखा नहीं था. पर आज शीला की जवानी ने उसे भटका दिया. वो एकटक शीला को देखता रहा.

शीला के गोर चिकने पांवों में पतली सी पायल थी पर नीचे तलुवे गंदे हो रहे थे. पर उसके गालों पर गर्मी के कारण लालिमा थी.

राजेश वहां से हट गया. वो भटकना नहीं चाहता था. पर उसके चाहने से होता क्या है. जो होना था वो तो हो चुका था. राजेश रसोई में गया और पानी पिया.

आहट सुन कर शीला जाग गयी और सीधे रसोई में आई और बोली- साब, मुझे आवाज दे देते. आप बैठिये, चाय बना देती हूँ.

उसने चाय के साथ पकोड़े बना दिए और साथ ही एक लिस्ट राजेश को दी कि किराने वाले को फोन कर दीजियेगा, वो भिजवा देगा.
राजेश ने हंस कर कहा- इतना राशन … कोई दावत है क्या?
तो शीला बोली- मुझे जितना भी आता है आपको सब बना कर खिलाउंगी.
कह कर वो खिलखिला कर हंस पड़ी.

राजेश ने पहली बार देखा कि वो हंसती है तो उसके गालों में गड्ढे पड़ते हैं. राजेश ने उससे कहा- तुम्हें अपने लिए भी कोई सामान चाहिए हो तो लिख देना. अब तो लगता है कि 10-15 दिन तुम्हें रुकना पड़ेगा.

शीला सोचती रही.
तो राजेश ने कहा- संकोच मत करो. तुम्हें अपने लिए तेल, साबुन लिपस्टिक कुछ चाहिए हो तो जनरल स्टोर वाले को बता देना, वो भिजवा देगा.
राजेश ने शीला को ही नंबर दे दिया कि वो ही दुकान को फोन कर दे.

शीला के लिए अपनी शादी के बाद पहला मौका था जब कोई आदमी उससे मेकअप का सामान लेने को कह रहा था. शीला ने दूकान पर फोन किया तो वो बोला कि आप सुबह 7 बजे दूकान के पीछे घर है, वहां आ जाना, वहीं से दूकान का अंदर का रास्ता है, सामान निकलवा लेना और फिर मैं भिजवा दूंगा.

राजेश ने शीला को जाने को कह दिया और उसे 1000 रूपये अलग से दिए कि तुम्हें अपने लिए कोई कपड़ा लेना हो तो ले लेना.
शीला खुश हो गयी.

रात को राजेश ने खाना जल्दी ही खा लिया और शीला से बोला- तुम खाना खाकर सो जाना. मैं अपना कमरा बंद कर रहा हूँ.

शीला समझ गयी कि बाबू का बाबू इन्हें परेशान कर रहा है. अब ये मलाई निकालेंगे.
राजेश ने कमरा बंद किया और अपने मोबाइल से टीवी पर पोर्न मूवी लगा दी.

आवाज कितनी भी धीमी कर लो हल्की आवाज तो बाहर जाती ही है.

जब सीत्कारें बाहर शीला के कान में आयीं तो वो दरवाजे में कोई छेद ढूँढने लगी अंदर झाँकने के लिए. नीचे तो कोई छेद नहीं दिखा पर ऊपर चौखट में एक तार अंदर जा रहा था. वहां से देखा जा सकता था.
शीला ने पास रखी कुर्सी सरकाई और चढ़ कर सुराख पर अपनी निगाह लगाई.

अंदर का नजारा साफ़ दिख गया. राजेश पूरा नंगा था. उसका औजार कम से कम 6 इंच का था. टीवी पर गुत्थम गुत्था चल रही थी. एक लड़की लड़के के ऊपर बैठ कर चुदाई कर रही थी और लड़का उसके मम्मे दबा रहा था.
राजेश ये देख देख कर अपना मूसल प्यार से सहला रहा था.

जवानी का ये नंगा नाच शीला ने पहली बार देखा. पूरा आधा घंटा उसने वो फिल्म देखी. कामसूत्र की ढेर सारी कलाएं सीखी और देखा कि राजेश ने कैसे एक झटके में अपना सारा माल वहीं बेड पर रखे एक तौलिये में गिरा दिया.

शीला ने फटाफट अपने को संभाला और किचन में घुस गयी.

वो काम निबटा कर निकल ही रही थी कि राजेश बाहर आया.
वो थका हुआ सा लग रहा था. शीला से उसने पानी माँगा.

शीला ने उसे पानी देते हुए पूछा- कॉफ़ी पियेंगे?
अब राजेश तो खुश हो गया. उसने चहक कर हाँ कह दी.

शीला ने उसे कॉफ़ी दी और कहा कि वो उसका बेड वगेरह ठीक कर देती है.
राजेश ने हाँ कह दी.

पर जैसे ही शीला कमरे में घुसी राजेश को ध्यान आया कि एक दो पोर्न मैगजीन बेड पर पड़ी हैं और बेड के नीचे टॉवल पड़ा है जिस पर उसने अपना माल निकाला था.
वो वहीं से बोला- नहीं रहने दो, कल कर लेना.

पर तब तक शीला नीचे पड़ा टॉवल उठाकर एक तरफ रख चुकी थी और बेडशीट ठीक कर रही थी. उसने बेड पर रखी दोनों मैगजीन को वहीं मेज पर रख दिया और बाहर आ गयी.
राजेश समझा कि शीला ने कुछ नहीं देखा.

शीला इधर उधर सामान रखती रही और राजेश कॉफ़ी पीता रहा. उसको नींद तो आ नहीं रही थी और दिमाग में फिल्म चल रही थी.
वो नीचे बैठ गयी और इधर उधर की बातें राजेश से करने लगी.

राजेश के दिमाग में दोपहर वाली शीला घूम रही थी. वो अब ब्लाउज के अंदर उसके मम्मों की मोटाई नाप रहा था.
शीला ने पूछ लिया- क्या देख रहे हैं साब?
तो राजेश सकपका के बोला- तुम्हारे तलुवे बहुत गंदे हो रहे हैं. अब तो तुम्हें नंगे पाँव गली में नहीं घूमना. तो सुबह अच्छे से साफ़ कर लेना.

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सेक्सुअल फीलिंग की कहानी का अगला भाग: लॉकडाउन में चरमसुख की प्राप्ति- 2

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