चूतिया बॉयफ्रेंड की शानदार गर्लफ्रेंड चोदी- 1

(Sex Ki Hindi Story: Hot girlfriend Fuddu Boyfriend)

राजेश 784 2020-12-07 Comments

सेक्स की हिंदी कहानी में पढ़ें कि मैं पार्क में घूम रहा था कि कुछ लोग एक प्रेमी जोड़े को डांट रहे थे. उस जोड़े की मदद मैंने की और अपने रूम पर ले आया.

अपने बारे में मैं मेरी पिछली कहानियों में लिख चुका हूँ अतः मैं सीधा सेक्स की हिंदी कहानी पर ही आता हूँ.

उन दिनों मैं एक पार्क के पास बनी बड़ी कोठी के ऊपर एनेक्सी में रहता था. पार्क के एक ओर लड़कियों का कॉलेज था और दूसरी तरफ मार्केट थी.
पास वाले पार्क में लड़के लड़कियों के जोड़े आपस में लिपटे बैठे रहते थे, जो वहां सैर करने वाले बुजुर्ग आदमी और औरतों को पसंद नहीं था.

फरवरी का मस्त महीना था. शनिवार को मेरी छुट्टी होती थी. बड़े दिनों से चूत का कोई जुगाड़ नहीं हुआ था अतः मैं लगभग 11.00 बजे पार्क में घूमने निकल पड़ा.

जैसे ही मैं पार्क में अंदर पहुँचा तो देखा कि वहाँ दो तीन औरतें और दो बुजुर्ग आदमियों ने एक लड़का और लड़की को पकड़ रखा था और उन्हें जोर जोर से डांटने लग रहे थे.

लड़का लड़की अपने आपको छुड़ाने की कोशिश कर रहे थे.
लेकिन एक लेडी बोले जा रही थी कि अब तो तुम दोनों को पुलिस को ही सौंपेंगे.

जब मैंने एक बुजुर्ग से मामला पूछा तो उस बुजुर्ग ने मुझे बताया कि इस पार्क में लोग गलत हरकते करते हैं और ये लड़का और लड़की भी एक झाड़ी की ओट में बैठ कर गलत काम कर रहे थे.
मैंने जब उन दोनों को देखा तो पाया कि दोनों के हाथों में किताबें थीं.

लड़की तो गजब की पटाका थी लेकिन लड़का उसके सामने कुछ हल्का और कच्ची उम्र का लग रहा था.
लड़के का पतला और इकहरा शरीर था. दब्बू टाइप भी लग रहा था.

जबकि लड़की दूध जैसे गोरे रंग की थी, बहुत ही जवान और गदराया हुआ शरीर, बड़े बड़े उभरे हुए मम्मे, सुडौल पट, बहुत ही सुंदर नयननक्स, गोरे मोटे सेब जैसे गाल, पूरा मांसल शरीर, हाथ पाँव की उँगलियाँ सुंदर और गुदाज़ थीं.

लड़की का रूप, यौवन और साइज देखकर मेरा दिल उसको पाने के लिए बैचन हो उठा.

मैं आपको बता दूँ कि यदि लड़की के घुटनों के पीछे का भाग चौड़ा और मांसल है तो समझ लो कि वह बड़े से बड़ा लण्ड ले सकती है.

मैंने दोनों को उन बुजुर्गों के बीच फंसा जानकर उनकी हेल्प करने की सोची.

तो मैंने लड़के से पूछा कि वे क्या कर रहे थे.
लड़के ने जवाब दिया- सर, हम तो बस बैठे बातें कर रहे थे.

यह सुनते ही एक बुजुर्ग लेडी बोली- यह झूठ बोल रहा है, इसने अपनी पैंट खोली हुई थी और यह लड़की इसके साथ ग़लत हरकत कर रही थी.

मैंने उन दोनों से पूछा- तुम किस क्लास में पढ़ते हो?
लड़का- मैं बॉयज कॉलेज में फर्स्ट ईयर में पढ़ता हूँ और यह मेरी फ्रेंड है जो गर्ल्स कॉलेज में फर्स्ट ईयर में पढ़ती है.

मैंने लड़की से पूछा- तुम्हारी उम्र कितनी है?
लड़की बोली- 19 साल!

फिर मैंने लड़के से पूछा- तुम्हारी उम्र कितनी है?
लड़का बोला- मेरी भी 19 साल है.

मैंने लड़के से कहा- तुम झूठ बोल रहे हो, तुम तो छोटे लगते हो?
लड़का अपना आई का कार्ड दिखाने लगा.

मैंने कहा- ठीक है, रखो.
दरअसल लड़का लड़की से काफी हल्का लग रहा था.

तभी एक बुजुर्ग बोला- लो पुलिस आ गई. दरअसल उन लोगों ने पुलिस को फोन करके बुला लिया था.
लड़का लड़की दोनों पुलिस को देखकर रोने लगे.

पुलिस आते ही एक लेडी जोर जोर से उनकी शिकायत करने लगी.
सिपाहियों ने आते ही लड़का लड़की से कहा- थाने चलो.

मैंने पुलिस से पूछा- इनका अपराध क्या है?
पुलिस- ये सार्वजनिक स्थान पर अश्लील हरक़तें कर रहे थे.
मैंने पूछा- आपके पास सबूत है कोई?
पुलिस- इन लेडीज़ ने देखा था और फोन करके हमें बुलाया है.

तभी लेडी बोली- हाँ हमने देखा है और हमने पुलिस को बुलाया है।
मैंने कहा- ठीक है, आप भी थाने चलो और अपने नाम से रिपोर्ट लिखवाओ और फिर कोर्ट में भी गवाही देना.

थाने चलकर रिपोर्ट लिखवाने और कोर्ट का नाम सुनते ही वे औरतें एकदम बोली- हमें नहीं पड़ना कोर्ट कचहरी के चक्कर में!
और इतना बोलते ही वे सब खिसकने लगी.

मैं पुलिस वाले को एक साइड में ले गया और उससे कहा- हवलदार साहब, ये लड़के लड़कियों के चक्कर में आप न ही फंसो तो अच्छा है. पता नहीं कल को आप ही किसी मुसीबत में न फँस जाओ?

पुलिस वाले को बात समझ आ गई. वह कहने लगा- आप ऐसा करें, आप इन लड़का लड़की के साथ पार्क के बाहर तक आ जाओ, इन्हें इनके घर भेज देंगे और हम अपनी ड्यूटी पर चले जायेंगे. इस तरह इन बुजुर्गों के सामने हमारी भी इज्ज़त रह जायेगी और ये शांत हो जाएंगे.
मैंने कहा- ठीक है.

तभी उस हवलदार ने लड़का लड़की को कहा- चलो, हमारे साथ.
वे दोनों रोने लगे और मिन्नतें करने लगे.

मैंने कहा- तुम चिंता मत करो, मैं तुम्हारे साथ हूँ.

दोनों पुलिस वाले और हम तीनों पार्क के बाहर आ गए.
बाहर आ कर मैंने हवलदार से हाथ मिलाया और उनको कहा- आप जाओ, ये दुबारा पार्क में नहीं बैठेंगे.

इसके बाद पुलिस वाले चले गए और लड़का लड़की ने राहत की सांस ली.
लड़का- सर, ये तो हमें थाने ले कर जा रहे थे, फिर क्या हुआ?
मैं- कुछ नहीं, मैंने सब ठीक कर दिया है.
लड़का लड़की दोनों बोले- थैंक यू सर.

मैंने कहा- ऐसे नहीं, यहां साथ में ही एक कोठी के ऊपर मेरा रूम है, जब भी तुम चाहो पार्क की बजाए मेरे कमरे में मिल लिया करो. आओ मेरे साथ … वहाँ चलकर बात करते हैं, तुम कमरा भी देख लेना. अभी यदि मैं तुम्हें अकेला छोड़ दूंगा तो ये बुजुर्ग या पुलिस वाले फिर पकड़ लेंगे. तुम मेरे साथ आ जाओ और इन लोगों को यहाँ से जाने दो.

उन दोनों ने एक दूसरे की ओर देखा और मेरे साथ चल दिये.
लड़की- अब तो पुलिस नहीं आएगी न?
मैं- मेरा कमरा सेफ है तुम चिंता मत करो … लेकिन अब पार्क में नहीं मिलना है.

कॉर्नर की होने की वजह से कोठी में मेरा आने जाने के लिए अलग से पीछे वाला दरवाज़ा था.

हम तीनों आराम से मेरे कमरे में चले गए.
मेरा कमरा लम्बाई में बड़ा था जिसमें बेड और सोफे को मैंने एक पर्दे से अलग कर रखा था. पहले अंदर आते ही सोफा था, फिर पर्दे के पीछे मेरा बेड था. पर्दा पूरी लम्बाई में न होकर केवल बेड को ही ढके हुए था, अर्थात उसमें आने जाने के रास्ते में पर्दा नहीं था.

हम तीनों सोफे पर बैठ गए. मैंने कोल्ड ड्रिंक निकाले और उनको पीने को दे दिए.

लड़का लड़की पहले तो डरे हुए थे लेकिन बाद में नॉर्मल हो कर बात करने लगे.

मैंने उनके नाम पूछे तो लड़के ने अपना नाम रोहन तथा लड़की का बिन्नी बताया.

उन्होंने बताया कि उनके परिवारों में बहुत सालों से जान पहचान है जिसकी वजह से उनमें फ़्रेंडशिप हो गई.

तब मैंने ध्यान से लड़की को देखा.
सोफ़े पर बैठने से लड़की की स्कर्ट उसके घुटनों से ऊपर चली गई जिससे उसकी जाँघों का हिस्सा और मोटी गुदाज़ गोरी पिंडलियाँ दिखाई देने लगी थी.

बिन्नी का साइज 34-32-34 होगा. चूचियों पर से उसकी शर्ट के बटन बिल्कुल टूटने को थे. बटनों के खिंचाव से उसकी शर्ट से उसकी ब्रा दिखाई दे रही थी. बिन्नी की मोटी आँखों और सेब जैसे लाल गाल गजब ढ़हा रहे थे. बिन्नी का पूरा शरीर मांसल था.

जबकि रोहन था तो 19 साल का लेकिन कमज़ोर से होने के कारण कम उम्र का ही लगता था.
उसका चेहरा, टांगें और हाथ पतले पतले थे.

मेरे पूछने पर उन्होंने बताया कि उन दोनों की फ़्रेंडशिप कुछ ही दिन पहले हुई है और वे इस पार्क में ही मिलते हैं.

मैंने रोहन से कहा- रोहन, अब तुम लोगों को पार्क में मिलने की जरूरत नहीं है, जब दिल करे मेरे कमरे में मुझे फोन करके आ जाया करो.

फिर मैंने कहा- अब तुम अंदर बेड वाले पोर्शन में जाओ और एन्जॉय करो.
रोहन मना करने लगा लेकिन बिन्नी चुप रही.

मैंने रोहन से कहा- कोई बात नहीं, मैं यहीं बैठा रहूंगा तुम थोड़ी देर अकेले में मिल लो.

वे दोनों मेरे कहने के बाद उठे और अंदर बेड के पास पर्दे के पीछे चले गए.

मेरे बेड के सामने जो अलमारी थी उसके एक दरवाजे पर शीशा लगा हुआ था और वे दोनों मुझे उसमें से दिखाई दे रहे थे, परन्तु उन्हें इस बात का पता नहीं था.

अंदर जाते ही रोहन ने बिन्नी को अपनी बांहों में ले लिया. बिन्नी भी उससे लिपट गई और रोहन को चूमने लगी.

रोहन की बजाय बिन्नी अधिक जोर शोर से चूमा चाटी कर रही थी. बिन्नी बार बार अपनी चूचियों को रोहन के मुँह पर रगड़ रही थी.

बिन्नी ने रोहन का हाथ पकड़ा और अपनी चूचियों पर रख दिया लेकिन रोहन ने उन्हें दबाया नहीं.

तभी रोहन ने अपनी पैंट की जिप खोली और अपने लण्ड को बाहर निकाल लिया.

रोहन ने बिन्नी का हाथ पकड़ा और उसकी हथेली में अपना लण्ड पर रख दिया.

दरअसल रोहन का लण्ड अभी पूरा जवान नहीं हुआ था. उसका लण्ड लगभग 5 इंच की पतली काली डंडी ही थी जिसका टोपा भी कुछ खास नहीं था.
लेकिन जितना भी था पूरा अकड़ कर खड़ा था.

उसने बिन्नी को लण्ड चूसने को कहा तो बिन्नी ने मना कर दिया.
फिर रोहन कहने लगा- अपने हाथ से इसे आगे पीछे करो.

बिन्नी रोहन के लण्ड की मुठ मारने लगी. साथ ही वह अपनी जांघों को रोहन की साइड में रगड़ रही थी और अपने एक हाथ से अपने एक मम्मे को मसलने लगी.

उन दोनों का हाल ये था कि रोहन को कुछ करना नहीं आ रहा था औ र… बस केवल मुठ मरवाने में ही मज़ा ले रहा था.

जबकि बिन्नी चाहती थी कि रोहन उसके शरीर को जगह जगह से चूमे और मसले.

कुछ ही देर में रोहन का शरीर झटके खाने लगा और उसने तुरंत अपने जेब से अपना रूमाल निकाला और उसमें अपना माल छोड़ दिया.
वीर्य निकलते ही रोहन शांत हो गया और उसने अपनी लुल्ली को पैंट के अंदर डाल लिया.

रोहन ने बिन्नी से कहा- चलें?
बिन्नी- अभी नहीं, और अपने मम्मों की ओर इशारा करके बोली, थोड़ा इनको दबाओ.

परंतु रोहन की गर्मी निकल चुकी थी और उसका इंटरेस्ट खत्म हो गया था.
अतः वह सारा काम 3-4 मिनट में ही निबटा कर, बिन्नी को प्यासी ही छोड़ कर बाहर निकलने लगा.

तो बिन्नी उसे पकड़ने लगी.
लेकिन रोहन नहीं रुका और बाहर आकर सोफ़े पर बैठ गया.

कुछ देर बाद बिन्नी भी अपने कपड़े ठीक करके बाहर आ गई.

उसके चेहरे पर नाराजगी साफ झलक रही थी.
मुझे समझते देर नहीं लगी कि बिन्नी का काम अधूरा रह गया.

वह बाहर जाने लगी तो मैंने कहा- बिन्नी एक बार रुको.
मैंने कहा- तुम दोनों इकठ्ठे बाहर जाओगे तो किसी को शक हो जाएगा इसलिए एक एक करके बाहर जाओ.

मैंने रोहन से कहा- रोहन पहले तुम जाओ, बिन्नी बाद में आ जायेगी.
रोहन तुरन्त खड़ा हो गया.

मैंने कहा- रोहन, तुम नीचे खड़े हो कर बिन्नी का इंतजार मत करना, अपने घर चले जाना, ऐसा न हो कि पुलिस वाले आस पास हों और तुम दोनों को फिर तंग करें.
रोहन- ठीक है, मैं अपने घर जा रहा हूँ.
और फिर बिन्नी से बोला- बिन्नी, तुम ऑटो से चली जाना.

बिन्नी ने उसकी तरफ बुरा सा मुँह बनाया और अपनी गर्दन दूसरी तरफ कर ली.

प्यासी रहने के कारण बिन्नी उससे नाराज़ थी और मैं भी इसी बात का इंतजार कर रहा था.

रोहन ने अपना बुक्स का बैग उठाया और चला गया.
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