छोटे भाई की बीवी के साथ सुहागरात-1

(Chhote Bhai Ki Biwi Ke Sath Suhagrat- Part 1)

हाय दोस्तो, मेरा नाम राज है और मैं भोपाल का रहने वाला हूँ. इस कहानी की शुरूआत मेरे मामा के लड़के आनन्द की शादी से शुरू होती है.

मैं आनन्द की शादी में नहीं जा पाया था. इसलिए रिसेप्शन पार्टी में गया. उधर सब लोग स्टेज पर आ जा रहे थे. मैं भी स्टेज पर शादी की बधाई देने जाने लगा.

मैं जैसे ही स्टेज पर पहुंचा, तो मुझे शॉक लगा. मैंने देखा कि दुल्हन बनी लड़की 23-24 साल की एक गजब की शोला है. उसका रंग दूध सा गोरा, मानो संगमरमर हो, आंखें हिरणी जैसी, लम्बे बाल कमर तक, होंठों पर गुलाबी लिपस्टिक, पतली कमर, उस पर लाल लहंगा चुनरी, ब्लाउज़ डीप कट वाला, उस पर सर से पांव तक सोने के गहनों से लदी मेरे सामने मानो एक अप्सरा खड़ी थी.

उस समय उसका फिगर 32-26-34 का रहा होगा. उसका नाम ज्योति था. जैसा उसका नाम वैसी ही उसकी सूरत थी. मुझे तो यही लगा कि मानो कोई अप्सरा जैसी मेरे सामने खड़ी हो.

इतने में मुझे छोटे भाई आनन्द ने आवाज लगाई और मैं उन दोनों से मिलकर उन्हें शादी की बधाई दी.

तब ज्योति ने पहली बार नमस्ते कहते हुए मुझसे बात की. मैंने तो उसी समय ज्योति को अपने दिल में बसा लिया था. मैंने सोचा कि काश ज्योति कि शादी मुझसे हुई होती. मैं अपनी किस्मत को कोसता हुआ स्टेज से नीचे उतर आया.

लेकिन सारी पार्टी में मेरा ध्यान ज्योति पर ही था. उसकी अदा पर, उसके बात करने के तरीके पर. उस समय 4-5 बार ज्योति की नज़रें मुझसे मिलीं, पर मैंने नज़रें चुरा लीं. मुझे ऐसा भी लगा कि ज्योति ने मुझे उसे देखते हुए देख लिया है.

खैर पार्टी खत्म हुई, तो ज्योति स्टेज से नीचे उतरी. मैं भी उनके पीछे चल रहा था और ज्योति को चलते हुए देखकर जैसे आहें भर रहा था. मैं उसकी सुन्दरता के बारे में सोच रहा था, लेकिन क्या फायदा. आखिर ज्योति की शादी मामा के लड़के आनन्द से हुई थी.

उस रात घर जाकर मैं ठीक से सो भी नहीं पाया. सारी रात ज्योति के बारे में सोचता रहा.

खैर धीरे धीरे समय बीतता गया. ज्योति का जेठ होने के कारण उससे कभी डायरेक्ट बात तो नहीं होती थी, पर कभी फ़ोन उठा लेती, तो ‘नमस्ते भाईसाहब, देती हूँ इनको फोन..’ यही आवाज सुनने को मिल जाती.

मुझे उसकी आवाज सुनकर काफी अच्छा लगता था. वो कभी मेरे सामने भी आती, तो घूंघट में होती, जिसके कारण मेरा आकर्षण उसके प्रति बढ़ता जा रहा था. बस लगता कि घूंघट में कोई चांद है. हमेशा साड़ी में रहने वाली ज्योति की कमर देख कर मेरे दिल को मानो सुकून मिल जाता था. उसकी गोरी कमर मेरा दिल चीर देती थी.

जब वो बार बार सामने से आती जाती, तो उसकी पायल की आवाज मेरा ध्यान खींच लेती थी.

ऐसे ही समय बीतता गया, उनकी शादी को 6 महिने हो गए.

तभी गांव में किसी रिश्तेदार की शादी में सभी को भोपाल से 10 दिनों के लिए जाना पड़ा. घर में सिर्फ मैं अपने घर में और आनन्द, ज्योति उनके घर में रह गए.

हम बस तीन लोगों को छोड़कर सभी लोग चले गए. उसके एक दिन बाद आनन्द को भी बिज़नेस के काम के लिए अचानक 5 दिनों के लिए दिल्ली जाना पड़ा.

आनन्द ने मुझे फोन किया और पूरी बात बता दी. उसने बताया कि 5 दिनों तक सुबह शाम घर पर एक चक्कर लगा लिया कीजिएगा.

यह सुनकर मेरे मन में खुशी का ठिकाना नहीं रहा, लेकिन फिर भी मैंने ये बोलते हुए मना कर दिया कि ज्योति मेरी बहू है और मैं कैसे आकर बात करूंगा.
लेकिन आनन्द के बार बार बोलने पर मैं मान गया और उसे चिंता मुक्त होकर जाने को कहा.

शाम को 5:30 बजे कार लेकर आनन्द को ट्रेन पर छोड़ने भी गया. लेकिन ये क्या ज्योति भी तैयार थी स्टेशन जाने के लिए. मुझे लगा कि दोनों दिल्ली जा रहे हैं. लेकिन रास्ते में आनन्द ने बताया कि उसे स्टेशन छोड़कर ज्योति को मार्किट में थोड़ा काम है.
मुझे राहत मिली.

हम स्टेशन गए, अभी ट्रेन आने को 20 मिनट बाकी थे, तो आनन्द और ज्योति को अकेले बातचीत करने को छोड़ दिया और उनसे दूर आकर खड़ा हो गया.

ज्योति को देखते हुए मैं दूर से ही सुख लेने लगा. उस वक्त मैंने ज्योति को ध्यान से देखा, वो परी लग रही थी.

ज्योति ने उस दिन हरे रंग की साड़ी पहनी हुई थी और साथ ही बैकलेस ब्लाउज, जो कि उसकी सुंदरता पर चार चांद लगा रहा था. मैंने उसे इस रूप में पहले कभी नहीं देखा था. उसके बाल खुले हुए थे जो उसके चेहरे पर बार-बार आ रहे थे. उसके होंठों की लाली और आंखों का काजल मुझे मंत्र मुग्ध कर रहा था.

उसके शरीर में शादी से लेकर अब तक काफी बदलाव आ गया था. हां अब उसका फिगर में काफी बदलाव आया था अब उसका फिगर 36-28-36 का होकर पहले से बदल गया था.

मैं यह सब सोच रहा था कि ट्रेन आने की घोषणा हो गई. ट्रेन आते ही आनन्द उस पर चढ़ गया और कुछ समय बाद ट्रेन निकल गई.

इसके बाद मैं और ज्योति कार की ओर आए. इस तरह उस समय हम दोनों में किसी प्रकार का कोई भी बातचीत नहीं हुई. ज्योति ने अभी अपना चेहरा ढक रखा था.

मैं ज्योति को लेकर कार के पास पहुंच गया. मैंने पीछे का दरवाजा खोला, लेकिन ज्योति आगे का दरवाजा खोलकर बैठ गई. मैं भी गाड़ी खोल कर बैठ गया. तभी ज्योति ने एसी चालू करने के लिए कहा.
उसने कहा- मैं क्या आगे नहीं बैठ सकती?
मैंने कहा- क्यों? आगे ही बैठी हो?
उसने कहा- नहीं, आपने पीछे का दरवाजा खोला था न, इसलिए पूछा.

यह सुनकर मुझे काफी अच्छा लगा, मैंने भी ज्योति से फ्री होकर बैठने को कहा और घूंघट ना लेने के लिए कहा. मैं इस प्रथा का विरोध करता हूं, मैंने उससे इस बात की भी चर्चा की. इस पर ज्योति ने अपना घूंघट उठाते हुए मुझे धन्यवाद कहा.

घूंघट हटते ही चांद मेरी आंखों के सामने था और मैं एकटक उसके चांद से चेहरे को देखता रह गया.

इस पर कुछ पल बाद ज्योति ने मेरा ध्यान हटाया और कहा- चलेंगे नहीं … आप कहां खो गए?
मैंने कहा- बस तुम्हें देख रहा था.
ज्योति शर्मा गई.

मैंने कहा- कहां चलना है.
ज्योति ने कहा- लेडीजवियर की दुकान पर जाना है.
यह मौका सही है, यह सोच कर मैंने अपने दोस्त की दुकान की ओर गाड़ी मोड़ ली.

हम लोग जैसे ही दुकान के पास पहुंचे, तो मैंने उससे कहा- लो … आपके मतलब की दुकान आ गई.

इस बीच ज्योति और मैं थोड़ा बहुत बात भी कर रहे थे. हम दुकान में जैसे ही गए, मेरा दोस्त मुझे देखकर मेरे पास आया.

उसने कहा- बहुत सालों बाद मिले हो, वो भी भाभी के साथ … शादी कब कर ली, बुलाया भी नहीं.
इस पर मैं कुछ बोलता, तब तक ज्योति ने ही बोल दिया- नहीं भाईसाब, शादी गांव में हुई थी.

मुझे उसकी बात सुनकर शॉक सा लगा और सोचने लगा कि काश ये सच होता.

ऐसे ही बात करते करते हम दुकान में बैठ गए. दोस्त ने ज्योति से पूछा- क्या दिखाऊं भाभी?
इस पर ज्योति ने जवाब दिया- ब्रा पेंटी.

दोस्त ने ब्रा का सैट लाते हुए ज्योति को दिखाना चालू किया. ज्योति ने दो ब्रा और लोअर पसंद किए. उसने मुझसे पूछा अच्छे है ना?
मैंने भी हंसकर जवाब दिया- आप पर सब अच्छे लगते हैं.

ब्रा सैट पिंक और रेड कलर के थे. सामान लेकर हम दोनों दुकान से निकल आए और कार में आकर बैठ गए.

कार में बैठते ही ज्योति ने कहा कि आप अकेले में मुझे ज्योति नाम से ही बुलाइएगा.
मैंने कहा- आपको बुरा तो नहीं लगा?
ज्योति ने पूछा- किस बात का?
इस पर मैंने भी मौका देखते हुए कहा कि मेरे मित्र ने आपको मेरी पत्नी समझ कर बात की, इससे आपको बुरा तो नहीं लगा?

इस पर ज्योति की एक कातिलाना मुस्कान ने मुझे हरी झण्डी दे दी. कुछ ही समय में मैं और ज्योति काफी खुल गए थे.

अब मैंने पूछा- और कहां चलना है?
इस पर उसने कहा- किसी पार्क में चलते हैं.

हम दोनों एक पार्क की तरफ चल पड़े. जैसे ही हम लोग पार्क में पहुंचे, वहां एक और मित्र मिल गया. वो भी अपनी पत्नी के साथ था. मित्र के साथ काफी समय घूमने के बाद मित्र जिद करने लगा कि आज रात का खाना हम दोनों उनके साथ चलकर उनके घर खाएं.

मेरे काफी मना करने के बाद भी वह लोग नहीं माने. आखिर हमें उनकी जिद के आगे झुकना पड़ा. फिर हम दोस्त के घर की ओर निकल पड़े. उनके साथ घर जाकर काफी देर तक उनके साथ समय बिताया. फिर हमने साथ खाना खाया.

खाना खाने के दौरान मित्र ने मुझसे शादी के बारे में पूछा.

इस पर ज्योति ने फर्जी शादी को लेकर काफी मस्त किस्से सुनाए. मुझे सुन सुन कर हंसी आ रही थी. अच्छा भी लग रहा था. मैं सोच रहा था कि काश यह सच होता.

खाना खाने के बाद मैं और ज्योति वहां से रवाना हो गए. इस बार कार मैं ज्योति से पूछा- और कहां चलना है मैडम?
इस पर ज्योति ने कहा- एक लॉन्ग ड्राइव पर.

इस बार गाड़ी हाईवे की ओर मोड़ दी. हाईवे पर चलते चलते करीबन 10 किलोमीटर आगे चले गए थे. उसके बाद हम लोग अब भी नॉर्मल तरीके से बात कर रहे थे.

अचानक मैंने ज्योति से पूछा- आज की शाम आपको कैसी लग रही है?
लेकिन इस पर ज्योति का कोई जवाब नहीं दिया. वह शर्मा रही थी. मैं बार बार ज्योति को देख रहा था.

इस पर ज्योति की भी नज़र थी. बात करते करते मैंने ज्योति के हाथों पर हाथ रख दिया. इस पर ज्योति एकदम शान्त हो गई. मैंने भी कार रोड के किनारे लगाकर खड़ी कर दी. कार रुकते ही ज्योति कार से निकल कर बाहर खड़ी हो गई. मैं भी 5 मिनट रुक कर सोचता रहा कि गलती कर दी. मैं अपने आपको कोसने लगा.

कुछ समय बाद मैं कार से उतरा और ज्योति के पास आकर उससे सॉरी बोलने की सोचने लगा.

लेकिन ये क्या मैं ज्योति के पास जैसे ही पहुंचा, उसने मुझे पकड़ कर चूमना शुरू कर दिया. मैं भी सब कुछ भूलकर हाई-वे पर ही ज्योति के चुम्बन का जवाब देने लगा. कुछ समय बाद तो मैं ज्योति को बुरी तरह चूम रहा था. मैं सब भूल चुका था. किस करते करते मैंने ज्योति के होंठों को काट भी लिया. ज्योति को दर्द भी हो रहा था, पर मज़ा भी आ रहा था शायद इसलिए वो मेरा साथ दे रही थी. हम दोनों की जुबानें एक दूसरे से लिपट गई थीं. मानो कभी अलग ना होने वाली हों.

करीब 10 मिनट बाद ज्योति ने मुझे धक्का देकर दूर किया और कार का दरवाजा खोलकर बैठ गई. मैं भी कुछ समय बाहर रहकर कार में आया.

कार चालू करके सीधा ज्योति को घर छोड़ने निकल पड़ा. रास्ते भर हमने कोई बात नहीं. फिर ज्योति के घर पर कार रूकी, ज्योति उतर कर चली गई. मैंने भी कार मोड़ दी और अपने घर पर चल दिया. मैंने टाईम देखा तो 11 बज चुके थे.

मैं रात 11:20 पर घर पहुंचा, फ्रेश होकर बेड पर लेट कर ज्योति के साथ बिताए हुए समय के बारे में सोच रहा था. स्पेशली वो समूच किस के बारे में, जिसमें हम दोनों एक दूसरे में समा गए थे. किस के दौरान मेरा हाथ सिर्फ उसके चेहरे को पकड़े हुआ था और मैंने उसे कहीं नहीं छुआ था. लेकिन उस किस ने मुझे अन्दर से हल्ला दिया. ऐसे सोचते करते टाईम कब बीत गया, पता ही नहीं चला और यह सोचकर कि अब ज्योति मुझसे कभी बात भी नहीं करेगी. यही सोचते सोचते कब आंख लग गई, पता ही नहीं चला और मैं गहरी नींद में सो गया.

अगली सुबह राइट 7 बजे मेरे फोन की घटी बजी. मैंने भी अचानक जागते हुए बिना देखे फोन उठा लिया.
उधर से आवाज आई- गुड मॉर्निंग …

यह ज्योति की आवाज थी. सुनकर मैं कुछ बोल ही नहीं पाया.
इस पर ज्योति ने फिर से विश किया- गुड मॉर्निंग.
इस पर मैंने भी रिप्लाई में गुड मॉर्निंग कहा.

ज्योति ने कहा- आपकी चाय तैयार है अगर सोकर उठ गए हो जनाब, तो आ जाएं.
उसकी इस तरह की बोली पर मैं भी खुश हो गया और मैंने जल्दी ही आने को बोला- ओके अभी आता हूँ.

मैं जल्दी से फ्रेश होकर तैयार हुआ और मंजिल की ओर निकल पड़ा. रास्ते में मैंने फूलों का गुलदस्ता ले लिया और सोचा कि आज दिन सही है. आज ज्योति को प्रोपोज कर दूंगा.

यह सोचते हुए मैं उसके घर आ पहुंचा. मेरे डोरबेल बजाने पर ज्योति ने दरवाजा खोला. मैंने देखा, तो ज्योति अलग सी नज़र आ रही थी. उसने ब्लू कलर का 2 पीस गाउन पहना हुआ था और अपना सर भी नहीं ढका था. उसके बाल भी खुले थे, जो कि उसकी कमर तक आ रहे थे.

वो सामने खड़ी मुस्कुरा रही थी. ज्योति बोली- अब देखते ही रहेंगे या अन्दर भी आएंगे.

मैं अन्दर आ गया और सोफे पर बैठ गया. ज्योति भी किचन की ओर जाने लगी. मैं बस उसकी नागिन सी चाल को देख रहा था.

कुछ देर बाद ज्योति चाय के 2 कप ट्रे में लेकर आई. मैं और वो दोनों सोफे पर आमने सामने बैठे थे. हमने चाय पीते पीते बात करना शुरू की.

मैंने कहा- इतनी सुबह जल्दी चाय के लिए बुला लिया.
इस पर ज्योति बोली- क्यों हमारा इतना भी हक़ नहीं कि हम आपको बुला सकें.

वो अंगड़ाई लेते हुए मुझसे बात कर रही थी. मैंने सोचा कि समय सही है, प्रोपोज कर देता हूँ.

मैंने फूलों का गुलदस्ता निकाला, जो मैं एक बैग में रखकर लाया था. मैंने उसे ज्योति को देते हुए कहा- आई लाइक यू ज्योति!
उसने हंसते हुए फूलों के गुलदस्ते को लिया और कहा- मी टू. … मगर सब झूठ, अगर इतना ही लाइक करते, तो आज तक प्रोपोज क्यों नहीं किया.
मैं कुछ नहीं बोला.

वो बोली- मेरे बुद्धू बालम … ये बात बोलने में तुमने पूरे 6 महीने लगा दिए. मैंने तो शादी की पार्टी के दिन से ही तुम्हारी नज़र को पढ़ लिया था, जब तुम बार बार मेरे आगे पीछे घूम रहे थे. इसलिए तो मैं भी बार बार तुम्हें ही देख रही थी, बाद में जब भी तुम आते, तो तुम्हारे सामने से जानबूझ कर बार बार आती जाती … और हां तुम्हारा फोन भी मैं ही पिक करती. मैं सोचती कि तुम कभी तो इशारा समझोगे, पर तुम बुद्धू बॉलम, मेरी नजर को कभी नहीं समझे.

यह सुनकर मेरा तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा. मैं उठकर ज्योति की तरफ बढ़ा, तो ज्योति भी उठकर सोफे की आड़ लेकर भागी.
वो बोली- न न … अभी नहीं.

मैं रुक गया और अपनी जगह पर बैठ गया. ज्योति भी अपनी जगह पर बैठ गई.
वो मुझसे बोली- अपनी दुल्हन से सुहागरात की सेज पर ही मिलना … दुल्हन की मुँह दिखाई भी लूंगी.
मैं बोला- ज़रूर … पर कैसे?
ज्योति बोली- भोपाल से बाहर कहीं रिसार्ट में 3 दिनों के लिए एक रूम बुक कर लो.
मैं- ठीक है … लेकिन मेरी भी एक शर्त है. मुझे तुम वैसी ही दुल्हन के जोड़े में सजी हुई चाहिए, जब मैंने पहले बार तुम्हें देखा था. स्टेज पर सजी संवरी लहंगा चुनरी में.
वो बोली- ठीक है … मैं वैसी ही मिलूंगी.
मैं बोला- लेकिन तुम आओगी कैसे … वो भी 3 दिनों के लिए?
वो बोली- तुम बस देखते जाओ.

ज्योति ने आनन्द को फोन लगाया और स्पीकर ऑन किया.
आनन्द- हां जान बोलो.
ज्योति- हैलो … वो मेरी सहेली सुचिता के भाई की सगाई पक्की हो गई है और वो मुझे भी उसके साथ 3 दिन के लिए इंदौर के पास में चलने को बोल रही है. आप भी यहां नहीं हो, तो मैं सोच रही थी कि चली जाती, घूमना भी हो जाता.
आनन्द- ठीक है … मैं राज को बोल देता हूँ कि तुम जा रही हो.
ज्योति- ओके थैंक्यू एंड लव यू.
आनन्द- कब निकलना है?
ज्योति- आज दोपहर 4 बजे.
आनन्द- ओके बाई … मैं थोड़ा बिज़ी रहूँगा, तो फोन नहीं कर पाऊंगा.
ज्योति- ओके ठीक है … कोई बात नहीं, मैं भी थोड़ा पार्टी में रहूंगी, तो फोन नहीं हो पाएगा … बाई.

ज्योति ने मुझे आंख मारते हुए फोन काट दिया. फिर ज्योति ने अपनी सहेली सुचिता को फोन लगाकर उससे भी बात कर ली.

ज्योति मुझे एक बड़ी ही बिंदास लड़की लगी. उसकी हिम्मत देख कर मैं दंग रह गया.

अब आगे उसके साथ क्या हुआ, वो मैं आपको अगले भाग में लिखूंगा. मेरी ये सेक्स कहानी आपको कैसी लगी, प्लीज़ मुझे मेल करें.
[email protected]

कहानी का अगला भाग: छोटे भाई की बीवी के साथ सुहागरात-2

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