मेरी और मेरी गर्लफ्रेंड की दूसरी चुदाई

(Meri Aur Meri GF Ki Dusari Chudai)

दोस्तो उम्मीद करता हूँ कि आप लोग ठीक होंगे.
आपने मेरी पिछली कहानी
मेरी और मेरी गर्लफ्रेंड की पहली चुदाई
में पढ़ा कि कैसे मैंने अपने कॉलेज की एक गर्म जवान लड़की को पटा कर चोदा. कैसे मैंने और मेरी गर्लफ्रेंड ने मेरे ही घर में चुदाई की.

आज मैं आपको अपनी आगे की कहानी सुना रहा हूँ.

एक बार चूत चुदाई के बाद तो ये लगने लगा था कि अब हम दोनों रोज ही चुदाई के मज़े लें, पर ऐसा कोई भी मौका हमें नहीं मिल पा रहा था.

अब मैं आपको सुनाऊंगा कि कैसे मेरी गर्लफ्रेंड और मैंने अपने दोस्त के घर में चुदाई की.

अंशी और मेरा, हम दोनों का चुदाई करने का बहुत मन हो रहा था, पर कहीं मौका नहीं मिल रहा था. अब तो उसकी भी चुत में भी बहुत खुजली होने लगी थी. फिर मैंने दिमाग लगा कर अपने दोस्त से बात की. मेरे दोस्त को मेरे और अंशी के बारे में सब बात पता थी. वो मेरा बहुत ही अच्छा दोस्त है.

वो भी अपनी वाली को बुला कर खूब चुदाई करता है, वो नोएडा में अकेला रहता है न … इसलिए उसकी गर्लफ्रेंड खुल कर चुत चुदाई का मजा ले लेती है.

जब मैंने उससे कहा कि यार तू तो अपनी वाली के खूब मजे लेता रहता है, कभी मेरे लिए भी सोच.

वो बोला- मैं समझा नहीं कि क्या मतलब है तेरा? तेरे पास तेरी है तो, तू उससे मजा ले लिया कर न!

शायद वो समझ रहा था कि मैं उसकी वाली की चुदाई के लिए उससे कह रहा हूँ. लेकिन जब मैंने उससे अंशी और अपने लिए उसके कमरे की बात कही, तो वो राजी हो गया.

उसने बोल दिया कि ठीक है तू कभी भी उसे इधर ले आ और चुदाई कर लेना. मुझे कोई दिक्कत नहीं है.
मैंने उसको बोला- ठीक है भाई अगले दिन का रख लेता हूँ. कोई दिक्कत हो तो बता दे.
उसने ‘कोई दिक्कत नहीं है..’ की बात कह दी.

मैंने ये बात अपनी गर्ल फ्रेंड अंशी को बताई, तो वो एक बार तो खुश हो गई. पर उसकी इस ख़ुशी में मुझे वो बात नजर नहीं आ रही थी. इसलिए मुझे लगा कि वो कुछ सोच रही है.

जब मैंने उससे पूछा, तो उसने पूछा- कहीं तुम और तुम्हारा दोस्त दोनों मिल कर तो मेरे साथ नहीं करोगे? यदि तुम दोनों मेरे साथ सेक्स करने की सोच रहे हो, तो मैं बिल्कुल भी नहीं आऊंगी.
मैं बोला- अरे तू पागल है क्या … मैं अपने सामने तुझे और किसी के नीचे नहीं देख सकता हूँ … और अगर तुझे यकीन नहीं है … तो रहने दे. फिर कभी मेरे घर में कोई नहीं होगा, तो वहीं कर लेंगे … या तुझे ज्यादा खुजली हो रही हो तो तू जैसे चाहे कर सकती है.
वो थोड़ी देर बाद बोली- ठीक है … मैं तेरे दोस्त के कमरे पर चलने को तैयार हूं.

हम दोनों ने अगले दिन की तैयारी कर ली और ये तय हुआ कि दोनों एक साथ ही चलेंगे.

दूसरा दिन भी आ गया. हम दोनों अगले दिन सुबह मिले और साथ में ही निकले.
उसने कहा- छतरी ले ली?
मैं समझ गया कि बंदी कंडोम के लिए कह रही है.
मैंने उससे बोला कि साली लंड कवर कहने में गांड फटती है क्या.
वो हंसने लगी.

मैंने कहा- चल रास्ते से ही कंडोम ले लूंगा.

फिर थोड़ी दूर बाद रास्ते में एक मेडिकल स्टोर पड़ा, मैंने अंशी को रोका और उसे एक आइसक्रीम पार्लर के पास खड़ा कर दिया. मैं जाकर कंडोम ले आया. मैंने एक डिब्बी सिगरेट की भी ले ली. हम दोनों ही सिगेरट पीते हैं.

फिर हम दोनों थोड़ी देर में अपने दोस्त के कमरे पर आ पहुंचे. मैंने अंशी को अपने दोस्त से मिलवाया. उन दोनों ने बात की. फिर मैंने अंशी को अलग बैठा कर थोड़ी देर अपने दोस्त से बात की. उधर अंशी की भौंहें बन रही थीं.
मैंने दोस्त को इशारा किया कि अब तुम जाओ.

वो अगले पल ही चल दिया. मैंने गेट बंद कर दिया और अंशी को दूसरे रूम में ले गया.

जब हम दोनों दूसरे वाले रूम में पहुंचे, तो हम एक दूसरे को खूब किस करने लगे. हमें लिप किस करते करते 15 मिनट हो गए थे.
अंशी पूछने लगी- तुम अपने दोस्त से क्या बात कर रहे थे?
मैंने कहा- अबे यार उसका कमरा इस्तेमाल कर रहे हैं, तो वो बता रहा था कि ज्यादा शोर नहीं करना. बाथरूम में पानी की क्या दिक्कत है, यही सब मुझे बता रहा था.

ये सुनकर अंशी के चेहरे पर मुस्कान आ गई. वो मेरी बांहों में सिमट गई. मैंने फिर से उसके होंठों से होंठों को चिपका दिया.

मैं आपको बता दूँ कि मुझे लिप किस और चुत चाटना बहुत ही ज्यादा पसन्द है और चुत का पानी पीना तो बेहद पसंद है. मेरे लिए तो चुत रस एक अमृत जैसा है.
यह कहानी आप अन्तर्वासना पर पढ़ रहे हैं.

फिर हम दोनों ने एक दूसरे की एक एक कपड़े उतारे. उसने तो मुझे पूरा ही नंगा कर दिया था … जब कि मैंने उसकी ब्रा और पेंटी नहीं उतारी थी.

फिर अंशी ने नीचे बैठ कर मेरा लंड बहुत ही प्यार से चूमा और अगले ही पल वो बड़े प्यार से लंड चूसने लगी थी. आज की उसकी लंड चुसाई से लग रहा था जैसे वो कोई लॉलीपॉप चूस रही हो. मुझे आज लंड चुसवाने में इतना अधिक मज़ा आ रहा था कि बता ही नहीं सकता.

उसने भी जब तक लंड नहीं छोड़ा, जब तक लंड का पानी नहीं निकल गया.

अंशी मेरे लंड का पूरा पानी पीने के बाद बोली- तुमने मुझे लंड का पानी पीना सिखा ही दिया.
मैंने कहा- रानी इसको पानी नहीं अमृत समझ कर पिया करो … ये शरीर की कांति को बढ़ाता है.

वो हंसते हुए लंड को अपने माथे से लगा कर बोली- जी बाबा जी … आप अपने प्रवचन कभी हरिद्वार चल कर हर की पैड़ी पर दो … बहुत सी नारियां लाभ प्राप्त कर लेंगी.
मैं उसकी इस नाटकीय अदा पर हंस दिया और उसको अपनी बांहों में भरकर चूमने लगा.

अब मेरी बारी थी. मैंने उसे खड़ा करके पहले उसकी ब्रा उतारी और चूची दबा दबा कर खूब चूसीं. उसके निप्पलों को भी इतना काटा कि पूरे लाल हो गए. चूची चुसवाने से उसकी चुदास बढ़ती जा रही थी.
वो दूध चुसवाते हुए बोली- आह … यार अब अपना लंड पेल दो … रहा नहीं जा रहा है.

पर पता नहीं, मुझे उस दिन क्या हो गया था कि उसको तड़पाने में मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. मैंने उसकी पेंटी उतारी और उसकी चुत को, जो पहले ही गीली हो चुकी थी, उसको खूब चूसा. पूरी जीभ अन्दर डाल कर खूब मज़े लिए.

उसकी एक टांग मेरे कंधे पर थी और मैं अपने होंठों से उसकी चुत के दाने को खींच खींच कर चूसे जा रहा था. इससे वो ज्यादा देर तक नहीं टिक पाई और उसने अपना पानी मेरी मुँह में छोड़ दिया, जिसको मैं पूरा पी गया. बड़ा मस्त नमकीन स्वाद था. चुत झड़ते ही वो ढीली होकर लेट गई.

अब तक मेरा लंड फिर से खड़ा हो चुका था. मैंने कुछ मिनट रुक कर अंशी को गर्म किया. फिर पहले उसके मुँह में लंड दे दिया. जब मेरा लंड पूरा गीला हो गया, तो उसकी कमर के नीचे तकिया लगा कर लंड में कंडोम लगाने जा रहा था. उसने मना कर दिया.

वो बोली- आज तुम बिना कंडोम के करो … और अपना पानी मेरे अन्दर ही डाल देना.
मैं तैयार हो गया.

मैंने लंड उसकी चुत के सामने रख कर हल्का सा धक्का मारा, तो लंड का टोपा अन्दर चला गया. उसकी हल्की सी आह निकल गई. फिर मैंने एक तेजी से धक्का मारा, तो मेरा आधा लंड उसकी चुत के अन्दर घुस गया.

पता नहीं वो क्यों चिल्लाने लगी- आआह … लग रही है … जल्दी बाहर निकालो. मैं मरी जा रही हूँ.
मैंने उसकी आवाज नहीं सुनी और फिर एक बहुत तेजी से धक्का मार दिया. अब की बार में मेरा पूरा लंड चुत के अन्दर चला गया था.
वो जोर से चिल्लाने लगी और रोने लगी- बस करो … मुझे दर्द हो रहा है … उम्म्ह… अहह… हय… याह… आई माँ मर गई … आह बहुत दर्द हो रहा है निकालो अपना लंड.

पर मैंने लंड नहीं निकाला … मैं कुछ देर ऐसे ही लेटे रहा. कुछ देर बाद मैंने धक्के लगाने शुरू कर दिए. थोड़ी देर में उसको भी आराम मिलने लगा और वो भी लंड के मज़ा लेने लगी- आह फक मी मेरी जान … और तेज करो … फाड़ डालो आआह … मज़ा आ रहा है … और तेज.

हम दोनों ने पूरी तेजी से चुदाई चालू कर दी. मैं उसके मम्मों को भींचता हुआ बड़ी तेजी से अंशी को चोदे जा रहा था. थोड़ी देर में हम दोनों साथ ही झड़ गए. फिर थोड़ी देर लेटे रहे, एक सिगरेट जलाई और दोनों लोग पीने लगे.

फिर मैं उसको बाथरूम में लेकर गया. वहां मैंने उसकी चुत साफ की और उसने मेरा लंड साफ़ किया. हम दोनों कमरे में आ कर लेट गए, थोड़ी देर बात की.

अंशी ने मुझे बोला- कि एक बार फिर से मजा लेना है … दुबारा चोदा ना मुझे!
मैं कहा- ओके … एक बार करके फिर घर चलते हैं.
वो बोली- ठीक है.

अबकी बारी मैंने कंडोम लगा कर किया. इस बार वाली चुदाई 30 मिनट के भी ऊपर चली और खूब मजा आया. इस बार मेरा पानी कंडोम में ही निकल गया.

मैंने चुदाई के बाद उससे बोला- जान मेरी एक ख्वाहिश है … क्या तुम मेरे लिए उसे पूरा कर सकती हो?
अंशी बोली- हां बोलो क्या करना है?
मैंने उससे बोला- कंडोम से पानी निकाल कर अपने हाथों में लेकर उसको जीभ से चाट सकती हो.

अंशी मुस्कुरा कर आंख नचाते हुए नाटकीय अंदाज में बोली- हां, मैं तुम्हारी खुशी के लिए कुछ भी कर सकती हूं. तुम एक सिगरेट जलाओ, तब तक मैं तुम्हारा अमृत ग्रहण करती हूँ बाबा जी.
मुझे हंसी आ गई.

उसने लंड से कंडोम निकाला और उसमें भरे वीर्य को अपने हाथ में लेकर जीभ लगा कर पंचामृत जैसे चाट गई.

तब तक मैंने सिगरेट सुलगा दी थी. उसने वीर्य चाटा और चटखारा लेते हुए सिगरेट को अपने होंठों से लगा लिया.

उसी समय मैंने उससे कहा- जान, मेरी एक ख्वाहिश और पूरी कर दो, तो बस मन संतृप्त हो जाएगा.
उसने हाथ जोड़ कर कहा- अब क्या ख्वाहिश है बाबा जी?

मैंने भी इस बार उससे नाटकीय अंदाज में कहा- बच्ची अब बाबा जी को तेरे तीसरे छेद का आनन्द पाने की तमन्ना है. बाबा की इस इच्छा को पूरा कर दे … और पूरा आशीर्वाद पा ले.
वो तीसरे छेद यानि गांड मराने की बात सुन कर चटक गई और बोली- सुन बे भोसड़ी के बाबा … गांड की तरफ देखा भी, तो लंड काट लूंगी.
मैंने भी कहा- तो सुन मेरी जान, अब की बार लंड तेरी गांड में ही जाएगा … नहीं तो तुझे लंड नहीं मिलेगा.
वो डरते हुए कहने लगी कि यार गांड में कैसे ले पाऊंगी … तुम आगे ही कर लो.

मैंने उसे तरकीब बता दी कि कैसे गांड को ढीला करना है. वो अनमने मन से सुनती रही.

फिर कुछ देर बाद हम दोनों ने ही अलग अलग सिगरेट से मजा लिया और कपड़े पहन कर जाने को तैयार हो गए.

मैंने अपने दोस्त को कॉल करके बुला लिया. हम दोनों सिगरेट पी ही रहे थे कि तब तक वो भी आ गया. इसके बाद हम दोनों निकल आए.

उस दिन हम दोनों ही बहुत खुश थे और हम दोनों ने एक दूसरे को बहुत प्यार किया.

आपको मेरी सेक्स कहानी कैसी लगी … प्लीज़ मेल से जरूर बताना.

इसके बाद मैं आपको अपनी कहानी में बताऊंगा कि कैसे उसकी मैंने गांड मार कर मजा लिया है.

अपनी राय देने के लिए आप मेल से मुझे मैसेज भेज सकते हो. मेरी ईमेल आईडी है [email protected]
धन्यवाद जी.

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