मौसेरे, फुफेरे भाई बहनों की खुली चुदाई- 2

(Real Cousin Sex Story)

मनोज गुप्ता 2021-02-13 Comments

रियल कज़िन सेक्स स्टोरी में पढ़ें कि एक कमरे में दो फुफेरे भाइयों ने अपनी तीन मौसेरी और सगी बहनों के साथ मिल कर सेक्स का धमाल किया.

हैलो फ्रेंड्स, मैं आपका प्रिय भोगू अपनी सेक्स कहानी में आप सभ का स्वागत करता हूँ.

रियल कज़िन सेक्स स्टोरी के पिछले भाग
मेरी बुआ के बेटे ने मौसी की बेटी को चोदा
में अब तक आपने पढ़ा था कि एक कमरे में हम पांचों युवा भाई बहन चुदाई करने की शुरुआत करने जा रहे थे.

अब आगे की रियल कज़िन सेक्स स्टोरी:

अनु दीदी की आग लगाने वाली जवानी देख मुझसे रुका नहीं गया लेकिन वो दीपक के साथ थी तो मैं रीना दीदी पर टूट पड़ा. उनकी दोनों चूचियों को अपने हाथों से दबाने, उनकी चूचियों के निप्पल खींचते हुए नाभि के नीचे चुत पर मैंने आक्रमण कर दिया.

मेरे इस हमले से पहले से ही गर्म रीना के मुँह से मादक सीत्कारें फूटने लगीं.

मैं रीना की चुत के भीतर तक जीभ डाल रहा था, जिससे ‘ऊई माई … आईईईई मर गई आह्ह सी ..’ की मादक सीत्कारें भरते हुए रीना ऐंठी जा रही थी.

‘आह और जोर से चूस भैनचोद … आह … आह्ह अन्दर तक मुँह लगा लवड़े … मैं मर गई रे … हरामी … फिर से ये कैसी आग लगा दी है तूने … आह … ठीक से लगातार चुसाई कर कमीने … मैं फिर से आने वाली हूँ मुँह गड़ा दे कुत्ते.’

मैंने उसकी मालपुआ जैसी चुत को चाट चाट कर लाल कर दिया था. जिससे रीना के सब्र का बांध टूटने लगा.

परन्तु मैं जल्दबाजी नहीं करना चाह रहा था क्योंकि कई बार मैंने देखा था कि 22 साल की इस जवान मस्त लड़की के लिए दो मर्द कोई मायने नहीं रखते थे. आज तो तीन लौंडियों पर दो ही मर्दों का संग था.

मैंने दोनों टांगों को चौड़ा कर रीना दीदी की चुत में सर घुसा दिया और उनकी चुत को अन्दर से बाहर तक चूसने लगा.

मेरे सिर को अपनी बांहों से पकड़ कर चुत पर दबाव बनाती हुई, मछली की तरह छटपटाती हुई रीना दीदी झमाझम झड़ गईं.
उनकी चुत से बहुत सारा पानी बाहर निकल गया.
मैं चुत के पानी को सपड़ सपड़ करता हुआ सब चाट गया.

कुछ देर चुत चाटने के बाद मैंने रीना दीदी की दोनों टांगों को चौड़ा कर दिया. एक बार झड़ चुकी उनकी चुत में लंड को मैंने धीरे से पेल दिया और लंड चुत में अन्दर बाहर करने लगा.

अब रीना दीदी के मुख से अथाह आनन्द में कामुक सिसकारियां निकल रही थीं.
मैं अपनी दोनों टांगों को चौड़ा करके अतितीव्र गति से सधे हुए झटके लगाने लगा; साथ ही रीना बहन की दोनों चुचियों को मसलने लगा.

मेरे हर झटके में उनकी मदमस्त सफ़ेद गोल गोल मांसल चुंचियां … जैसे उड़ने के लिए फड़फड़ाने लगी थीं.

थोड़ी देर में ही रीना दीदी फिर से गर्म हो चुकी थीं … इसलिए वो मुझे पटक कर सीने पर सवार हो गईं और लंड पर चुत टिका कर उछलने-कूदने लगीं.

रीना दीदी के गुदाज़ चूतड़ों की थाप … और चुत की फट फचा हच-फच फच के मधुर संगीत की ध्वनि कमरे में गुंजायमान हो मेरी वासना बढ़ा रही थी.
अपनी कमर को नचा नचा कर रीना दीदी अपनी चुत के हर कोने में लंड की चोट लगवा रही थीं.
वो लंड चुत के हर झटके में अपनी चरम सीमा तक पहुंचने की कोशिश कर रही थीं.

करीब दस मिनट की भयंकर चुदाई के बाद अपनी दोनों टांगों को भींचते हुए चिहुंक कर रीना दीदी झड़ गईं और मेरे सीने पर निढाल होकर हांफने लगीं.

दूसरी तरफ बिना किसी संकोच के कमरे में दो सगे भाई बहन मिलकर अनु दीदी को बगल के बिस्तर पर बुरी तरह चोद रहे थे. रंजू और अनु दीदी आपस में एक-दूसरे के मुँह पर अपनी चूचियों की चुसाई का मजा ले रही थीं.

रंजू ज़मीन पर खड़ी होकर अनु दीदी को दोनों हाथों को ऊपर की ओर खींच रही थी और उनकी चूचियों को सिर के तरफ से झुक कर चूस रही थी.

इसी दौरान अनु दीदी अपने मुँह पर लटकती रंजू के चुचियों को दांतों से काट रही थीं. दीपक मस्त अनु दीदी को दोनों टांगों को चौड़ा कर हचक कर चोद रहा था और दीदी उसके हर झटके पर कराहती हुई चुत चुदाई के मज़े ले रही थीं.

दीपक का आठ इंच लंबा लंड अनु दीदी की चुत के भीतर तक झन्नाटेदार चोट दे रहा था … और दीदी मस्ती में अनाप शनाप बकने लगी थीं.

करीब पांच मिनट की घनघोर चुदाई से अनु दीदी दूसरी बार झड़ते हुए पीठ के बल तख्त के ऊपर गिर पड़ीं.

स्वर्ग की अप्सरा का ऐसा रुझान देख कर मैं मदहोश होने लगा था.

दीदी ने अपनी ढाई इंच की चुत के दोनों तरफ गदरायी जांघों को फैला कर रखा था.

उनकी हालत कोई उड़ने को तैयार पंछी सी लग रही थी. दीपक की पूरी ताकत से हुई चुदाई से अनु दीदी बहुत खुश नजर आ रही थीं.

अनु दीदी की खुशी में मैं भी अपने को रोक नहीं पाया और सीधे जमीन पर खड़ी रंजू के पीछे लंड टिका दिया.

अचानक हुए हमले से कांप गई रंजू के हाथ से अनु दीदी की बांहें छूट गई थीं.

अनु दीदी को अपनी बांहों के छूट जाने का मौका मिला, तो उन्होंने दीपक को धकेल कर तख्त पर गिरा दिया और फिर से उसके लंड पर अपनी चुत को सैट करके उछलने लगीं.

गजब की तेजी से उछलने में दीदी की चुचियां उनके चेहरे तक मार कर रही थीं.
मैंने आज़ तक कभी भी अनु दीदी का ऐसा विध्वंसक रूप नहीं देखा था.
दीदी, दीपक का आठ इंच लंबा लंड घपा घप जकड़कर अपनी चुत में अन्दर ले रही थीं.

अनु दीदी की मस्त जवान चुत से बाहर निकल रहे गर्म पानी को अपने हाथों में लेकर मैंने रंजू की गांड और चुत पर मल दिया, जिससे उसकी पानी छोड़ रही चुत में चिकनाई हो गई.

मैंने फिर एक बार कमर पीछे खींच कर पानी छोड़ चुकी रंजू की चुत में एक झटके से पूरा लंड उतार दिया.
रंजू कसमसा कर रह गई, क्योंकि पेट के बल तख्त पर लेटे हुए अपने दोनों पैरों से जमीन पर खड़ी थी.
इस समय रंजू हिल डुल भी नहीं पा रही थी.

मैंने अपने दोनों हाथों को आगे बढ़ा दिया और रंजू की दोनों चूचियों को पकड़ कर ज़ोर-ज़ोर से मसलते हुए उसकी पीठ पर होंठों से चूमने लगा. चौड़ी छाती, पतली कमर से होते हुए अपने मस्त गोल गोल चूतड़ों वाली इकहरी काया की रंजू के पैर जमीन से ऊपर उठ रहे थे.

ऐसा नजारा देखकर मेरा जोश और बढ़ गया. देखते ही देखते मैं उसकी चुत की फांकों में मोटा लौड़ा अन्दर तक पेल कर उसकी चुदाई करने लगा.

वो किसी नन्हीं सी जान सी अपने गले से घुटी-घुटी मस्त सिसकारियां निकाल रही थी.
रंजू मेरा ये तीव्र हमला झेल ही नहीं पाई और जल्द ही झड़ गई.

मैं अभी भी लगा था और उसकी चूचियों के निप्पलों को अपनी उंगलियों में पकड़ कर कभी जोर से मसल देता, तो वो छटपटा उठती. उसके निप्पल इस वक़्त अकड़ कर कड़े हो गए थे.

कुछ ही पलों बाद रंजू के गले से अजीब-अजीब सी आवाजें निकलने लगीं.

मैं लगातार अपनी कमर हिलाने लगा और धीरे धीरे चुदाई की अपनी गति बढ़ा देने से रंजू के गुदाज़ चूतड़ों से थप थप फट फट की धुन बजने लगी.

मात्र उन्नीस साल की कमसिन रंजू की चुत में लंड बहुत टाइट जा रहा था इसलिए रंजू अपनी टांगें और खोल दीं और दीवान को झुक कर मजबूती से पकड़ लिया.

मैंने भी धीरे से अपना लौड़ा थोड़ा सा बाहर खींचा और उसे फिर से रंजू की चूत में जबरदस्त झटके के साथ घुसेड़ दिया.
रंजू की चूत ने मेरा लंड कस कर पकड़ रखा था और इस वजह से मुझे लंड को अन्दर-बाहर करने में थोड़ी सी मेहनत करनी पड़ रही थी.

मैंने अपनी स्पीड बढ़ाना शुरू कर दी. रंजू भी मेरे साथ-साथ अपनी कमर नचा नचा कर मेरे हर धक्कों का जबाब बदस्तूर दे रही थी.
मैं चूत में रगड़-रगड़ कर लंड पेलने लगा और रंजू ने मस्ती में अपनी गांड उठा-उठा करके मेरे हर धक्के का माकूल ज़बाव देना शुरू कर दिया.

रंजू काम वासना में मतवाली कसमसा कर बोलने लगी- आह … मेरी चूत में चींटियां रेंग रही हैं. अपने लंड की रगड़ से मेरी खाज दूर कर दो … ओ माई गॉड चोदो … और ज़ोर-ज़ोर से चोदो मुझे.

मैं भी अपनी रौ में उसे गले देते हुए चोदने में लगा था- ले साली छिनाल … भैन की लौड़ी लंड खा ले हरामिन … आह.

वो भी मेरी गाली का जबाव देते हुए कहने लगी थी- हां चोद न भोसड़ी के … कितना दम है तुझमें … मेरी चुत फाड़ दे कुत्ते.

मैंने देखा कि पहले से ज्यादा माहिर हो चुकी किसी चुदक्कड़ रांड की तरह ‌उसकी चुत से कामरस टपक कर जांघों पर बह रहा था.
अब मेरा लंड उसकी बच्चेदानी में आराम से पूरा सात इंच अन्दर समाहित होकर ठोकर दे रहा था.
ये मेरी उत्तेजना को हर पल बढ़ा रहा था.

उधर मेरे लंड के हर झटके पर अपनी गांड को पीछे धकेल कर पूरा लंड अन्दर लेने को बेताब रंजू मुझे नशे से गाफिल किये हुए थी.

काफी देर तक चली इस जुझारू चुदाई के बाद हर एक झटके पर रंजू चीखते हुए भलभला कर ऐसे झड़ने लगी मानो महीनों से बचाई हुई दौलत आज शोहरत में लुटा रही थी.
उसकी चुत से जैसे जलधारा फूट पड़ी थी.
उसकी कमसिन चुत की जवानी के पानी की खुशबू कमरे में महकने लगी थी.

इधर मेरा चरमोत्कर्ष आते आते वापस रुक जाता … फिर दुगुने जोश से लबरेज, झटके पर झटके मारते हुए आखिरकार मैंने भी अपने लंड का गर्म कामरस रंजू की कमसिन चुत में छोड़ दिया.

रंजू बेसुध होकर तख्त पर पैर लटकाए औंधे पड़ी थी. उसकी निढाल काया की गर्म चुत ने मेरे लंड रस को पीना शुरू कर दिया था.

दूसरे तख्त पर अनु दीदी की दीपक के लंड की सवारी कर रही थीं.
उनके बाजू में ज़मीन पर पैर लटकाए, तख्त पर औंधे मुँह पड़ी रंजू की घनघोर चुदाई से कमरे में वासना का तूफान आया हुआ था.

रीना दीदी अपनी चुदी हुई चुत पर हाथ फेरते हुए इस तूफान का जीवंत गवाह बन, मंद मंद मुस्कुरा रही थीं.

अपने लाल सुर्ख चेहरे और बिखरे हुए बालों को समेटती हुई दीपक के लंड पर मस्ती में झड़ चुकी अनु दीदी भी अपनी मस्ती का इजहार कर रही थीं.

जवान तीन परियां आत्मतृप्त होकर मुस्कान बिखेरते हुए अपनी चुत सहला रही थीं.
चुत के पानी की गंध के साथ हम दोनों के लौड़े के पानी की खुशबू, कमरे में अद्भुत महक फैला रहा था, जो आजीवन हम पांचों नहीं भुला सकते थे.

हम सभी आज़ भी उस दिन को याद कर रोमांचित हो जाते हैं. एक दूसरे की जरूरत के हिसाब से अक्सर हम पांचों कभी भी सामूहिक चुदाई का आयोजन करते रहे, जिनमें नए चेहरे भी शामिल होते रहे.

दोस्तो … आगे फिर कभी रिश्तों में चुदाई जो कि सबसे सुरक्षित और सुविधाजनक होती है, के अगले भाग में न्यू ईयर पार्टी की मादक घटनाओं के साथ पुन: हाज़िर होऊँगा. तब तक के लिए नमस्कार. इस रियल कज़िन सेक्स स्टोरी पर आपके मेल मुझे प्रोत्साहित करेंगे.
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