राजेश से शिवानी रंडी बनने तक का सफर

(Crossdresser Sex Story)

क्रॉसड्रेसर सेक्स स्टोरी में पढ़ें कि मेरे भीतर एक लड़की है. वह लड़की मर्दों के लिए प्यासी रहती है. मुझे चुदवाने का मन करता और मैंने खूब गांड मरवायी.

दोस्तो, मेरा नाम राजेश है. मैं 28 साल का हूं. मैं क्रॉसड्रेसर बॉटम हूं. मेरे भीतर एक लड़की है. वही लड़की मर्दों के लिए प्यासी रहती है और फिर मुझे चुदवाने का मन करता है.

मैं बॉटम हूं और मैंने खूब गांड मरवायी है. अब मैं शिवानी रंडी बन गई हूं. यानि जयपुर में मेरे चाहने वाले मुझे इसी नाम से जानते हैं.

मैं क्रॉसड्रेसर सेक्स तक कैसे पहुंची? आइए बताती हूं.
इससे आगे मैं लड़की की तरह ही लिखूंगी.

ये बात कोई 10 साल पहले की है जब मैं 19 साल की थी. दोस्तों के साथ रहते हुए मुझे मुठ मारने का ज्ञान मिल चुका था. एक दिन मैंने अखबार में सेक्स प्रश्नोत्तरी में एक पाठक की समस्या पढ़ी कि वो क्रॉसड्रेसिंग करता है और लड़कियों की तरह रहता है।

ये पढ़कर मुझे अपना भी ध्यान आया कि मैं भी ऐसा ही करना चाहती रही हूं. उसके बाद मेरी भी हिम्मत जागी. मैं छिप कर जब घर में कोई नहीं होता तो मेरी दीदी के कपड़े पहनती।

मुझे दीदी की ब्रा-पैन्टी पहनने में बहुत मजा आता। फिर वो फेंटेसी डेवलप होती रही. मैं जब भी सेक्सुअल एक्साईट होती, खुद को लड़के की बजाय लड़की के रूप में ही कल्पना करती और चुदने की सोचती।

फिर धीरे-धीरे मैंने कई चीजें मेरी गांड में डालनी शुरू कीं। पेन से शुरुआत की, फिर क्रिकेट बैट का हत्था, फिर शैंपू की बॉटल, फिर स्टील की ग्लास।

तकरीबन 4 इंच चौड़ा स्टील का गिलास आराम से गांड में तेल लगाकर मैं लेने लगी। खून भी आया, दर्द भी शुरू में हुआ, फिर आदत हो गई।

एक बार तो मैंने खुद का बच्चा जनने यानि डिलीवरी की कल्पना करके डाबर आवंला की बड़ी बॉटल जो तकरीबन 5 इंच चौड़ी होती है, वो भी मेरी गांड में डाल ली।

फिर धीरे-धीरे जैसे बच्चे को जन्म दे रही हूं, ऐसे निकाली। इससे मुझे खुद पर बहुत भरोसा हो गया कि मैं अब कितना भी बड़ा लंड ले सकती हूं गांड में … अफ्रीकन भी।

उसके बाद मैं जयपुर आ गई।
यहां मैं विस्पर चॉईस वगैरह पैड लगाकर भी कॉलेज जाती। नीचे अंडरवियर की बजाय पैंटी ही पहनती। यहां तक कि सर्दियों में तो ब्रा-पैंटी दोनों पहन के कॉलेज जाती, क्योंकि स्वेटर के नीचे से साफ नहीं दिखता किसी को।

फिर मैं सोचती कि काश कोई चोदे मुझे … कई बार खीरे- बैंगन ये सब लिए। एक बार ईमामदस्ते का मूसल भी लिया गांड में। बड़े मजे आते थे।
फिर मैंने इंटरनेट पर सर्च किया तो मालूम चला कि यहां भी कई आदमी हैं जो लड़के चोदते हैं या गांड मारते हैं।

वहां एक आदमी का नंबर मिला, मुदित नाम था उनका. मैंने मेल भेजा तो उनका रिप्लाई आया. फिर नंबर एक्सचेंज हुए। अगले दिन मिलने का प्रोग्राम बन गया.

मैंने चुपके से मेरी भाभी की ब्रा-पैंटी, लेगिंग, कुर्ती चुराई और पार्क में जाकर वो पहन लिये. चुपके से मैं वहां तैयार होकर उसका इंतजार करने लगी.

फिर कुछ देर के बाद उसकी कार आकर रुकी.
उसने फोन किया और कार में अंदर आने को कहा.
मैं कार में जाकर बैठ गयी.

मेरा दिल धक धक कर रहा था. पहली बार मैं लंड लेने के लिए किसी मर्द से मिली थी.

मगर मैंने मन बना लिया था कि अब तो मुझे चुदना ही है. अब तो मैं अपनी प्यासी गांड में लौड़ा लेकर ही रहूंगी.
उस बंदे ने कार कहीं दूर जाकर साईड में लगा ली। मेरा दिल धक-धक कर रहा था। मगर वो आदमी अनुभवी था।

उसने मुझे भरोसा दिलाया। फिर मैंने उसकी पैंट की चेन खोली और उसके खड़े लंड को हाथ में लिया। मैं लैगिंग कुर्ती पहन कर काफी सेक्सी लग रही थी।

मेरे हिप्स काफी बड़े थे तब भी. वो मेरे हिप्स को रब कर रहा था।
मैंने कहा- और जोर से रगड़ो मेरे हिप्स को।
वो और जोर से मेरे हिप्स को रगड़ने लगा.

उधर मैंने उसके लंड को मुंह में भर लिया।
मुदित जी का गोल गोल सुपाड़ा बहुत सुंदर लग रहा था. मेरी दिली तमन्ना पूरी हुई और मैंने पहली बार किसी मर्द का सुपाड़ा चखा।
बहुत स्वाद था. थोड़ी सी बूंदें प्रीकम की थीं।

मैंने उसके लंड से निकले कामरस को जीभ से चाटा. फिर पूरा लंड मुंह में ले लिया. मजे से मैं लॉलीपोप की तरह उसका लंड चूसने लगी।

इधर मुदित जी कार के बाहर खड़े, खिड़की की ओट लिए आहें भरे जा रहे थे।
बीच बीच में मैं उनके आंड भी सहला देती थी।

अब मैं मुदितजी का लंड चाटने लगी। उन्होंने बीच में अपना लंड बाहर निकाला और मेरे पूरे चेहरे पर फेरा।

यहां तक कि मेरी बंद आंखों पर भी लंड फिराया और फिर आंखें खुलवाकर आंखों में भी घुसाया।
मुझे आंखों में उनका सॉफ्ट टच फील हुआ।
मैंने भी उनकी ये फैंटेसी दिल से पूरी की। फिर मैं वापस लंड चूसने लगी।

अब वो मेरे बाल पकड़ कर पूरा गले तक अंदर ठूंस रहे थे।
मुझे बहुत मजा आ रहा था. मैं साथ-साथ अपने बूब्स भी दबाने लगी; जो लड़कियों के जैसे बड़े तो नहीं थे, लेकिन दबाए जा सकते थे, इतने जरूर थे।

बूब्स के दबाने से और भी उत्तेजना आ गई। फिर मैंने और अंदर लेना शुरु किया।

तकरीबन 15 मिनट तक मुदित जी ने मेरे मुंह को जबरदस्त तरीके से चोदा।
लंड से इतना मुंह चोदा कि मेरी साईड के मसूढे़, गाल और गला भी दर्द करने लगे.
मगर मजा बहुत आ रहा था.

बीच बीच में वो लंड को बाहर निकालते तो प्रीकम से सनी हुई लार मेरे मुंह और उनके लंड के बीच चाशनी की तार सी लटकती।

मेरे गालों, होंठों पर थूक और प्रीकम की चाशनी लगी हुई थी और मैं इससे और ज्यादा मदहोश होती जा रही थी।
मैं दीवानी की तरह उनका लंड चूसने लगी।

फिर उनके धक्कों की स्पीड बढ़ने लगी, उन्होंने पूछा कि पानी कहां निकालूं तो मैंने मुंह का इशारा कर दिया।
फिर लंड निकाल कर मैं बोली- जब निकलने लगे तो मेरे बाल खींच लेना हल्के से, ताकि मैं समझ जाऊं और पूरा गले तक लंड को अंदर ले लूं.

मैं नहीं चाहती थी कि वीर्य की एक भी बूंद बाहर जाये. सारा का सारा माल मैं अपने गले में लेना चाहती थी.

मुदित जी ने यही किया। मैंने लंड को पूरा गले के अंदर तक लिया और वो गले में पिचकारी छोड़ने लगे।

सच कहूं तो ये सबसे खूबसूरत अहसास था। मेरा गला उनके वीर्य से तर हो रहा था। मैं अंदर तक पिचकारी महसूस करके खुद को धन्य मान रही थी।

कई सारी पिचकारी छोड़ने के बाद उन्होंने लंड को बाहर निकालना चाहा मगर मैंने होंठों से रोक लिया। फिर मुंह के अंदर ही जीभ को गोल गोल घुमाकर पूरे सुपारे और लंड को साफ किया।

एकदम साफ करके मैंने वीर्य को पूरा चूस लिया। फिर सूखा हुआ लंड मुंह से बाहर निकाला।

वो बहुत खुश हुए। वो बोले- अभी लेट हो रहा हूं, अगले हफ्ते एक और लड़के के साथ आऊंगा। उसके साथ चुदाई और ओरल सेक्स दोनों करवाऊंगा। दोनों मिल कर तेरे को बजाएंगे। बहुत मस्त माल है तू!

मैंने आंखें नीची करते हुए उनका शुक्रिया अदा किया। मैं उनके चौड़े सीने से लिपट गई। मैं ये फील करने लगी कि मैं उनकी पत्नी हूं। उनमें अपनी सेफ्टी और सिक्योरिटी महसूस करने की कोशिश की.

मगर मैंने उनको जब ये बात बताई कि मैं उनकी पत्नी की तरह फील कर रही हूं; तो वे बोले कि मैं शादीशुदा हूं और इसलिए तुम मेरी रखैल हो।
ये सुनकर मुझे थोड़ा झटका सा लगा।

मैं रखैल नहीं पत्नी के सपने देख रही थी. मगर फिर सोचने लगी कि आया हुआ लंड हाथ से ना निकल जाए, इसलिए रखैल बनना भी मैंने खुशी खुशी स्वीकार कर लिया।
मैंने अपने स्वामी यानि मुदितजी से इजाजत ली।

उस दिन के बाद फिर मैं बेसब्री से अगले रविवार को इंतजार करने लगी क्योंकि मुदित जी को रविवार का ही समय मिलता है।

शनिवार को उनका कॉल आया और पूछा- बेबी रेडी हो क्या?
मैंने कहा- मैं तो मरी जा रही हूं लंड की चाह में!
वो ठहाका मारकर हंसने लगे और बोले- चिंता मत कर। तू मेरी रखैल है। तेरे को खुश करना मेरी जिम्मेदारी है। एक और बढ़िया लंड का इंतजाम किया है तेरे लिए। एक तेरा मुंह चोदेगा, दूसरा तेरी गांड। तेरे को सेंडविच बना कर चोदेंगे आज।

ये सुनते ही मेरे बदन में एक झुरझुरी सी छूटी। बरसों पुरानी तमन्ना आज पूरी होने जा रही था मेरी।

मैंने शर्माते हुए कहा- जैसी आपकी इच्छा मेरे स्वामी। मैं तो आपकी रखैल हूं, जब चाहें, जैसे चाहें, जो करें मेरे साथ!
इस पर मुदितजी बोले- तेरे को अपनी रखैल से अब रंडी भी बना दूंगा। मैंने तेरी आंखों में रंडी बनने की चाहत देखी है।

मैं मन ही मन सोचने लगी कि इनको मेरे मन की चाहत का कैसे पता लगा?

खैर मैंने फटाफट जाकर वैक्स करवाया, एक विग खरीदा, अच्छा सा ब्रा पैंटी सेट लिया, उसके साथ ही समीज, ईयररिंग्स, लिपस्टिक, बिंदी वगैरह भी खरीदे।

फिर जगह का पूछा तो वो बोले कि यार जगह का तो इंतजाम तुम्हें ही करना होगा।

मुझे एक बार तो गुस्सा आया। मैंने बोला- रंडी चुदने के लिए आ रही है, जगह का इंतजाम तो करो? मगर वो बड़े मर्द थे, उनको मालूम था कि उनके पास बॉटम गे, क्रॉसड्रेसर्स और लड़कियों की कमी नहीं है।
बल्कि उनको ये भी पता था कि मेरे पास लौड़ों की कमी है.

इसलिए वो बोले- देख ले तू, अगर चुदना है तो जगह का इंतजाम भी करना पड़ेगा. वरना रहने ही दो.

अब मैं तड़पने लगी। सोचने लगी कि कहीं हाथ आया हुआ लंड हाथ से ना निकल जाए। इसलिए जयपुर के सारे हॉटल्स का ब्यौरा लिया। संयोगवश मेरे पास एक आईडी गांव की थी।

उस आईडी पर मैंने एक ठीक ठाक सा होटल 400 रुपए में बुक करवाया। घर से मैं मेरे दोस्त के यहां जाने का कह कर निकली। मैं सुबह आने का बोलकर निकली थी.

मैंने सारा सामान लैपटॉप के बैग में भरा। फिर पड़ोस के पार्क में अंधेरा होता है, वहां साईड में जाकर कपड़े पहने। पैडेड ब्रा से मेरे बूब्स लगभग नेचुरल लग रहे थे।

फिर मैंने लैगिंग कुर्ती पहनी। विग और मेकअप अभी करना ठीक नहीं समझा। लैगिंग के ऊपर जींस पहन ली क्योंकि होटल में मेरी आईडी चेक होती जो लड़के के नाम से थी।

मेरे हल्के हल्के बूब्स दिख रहे थे। फिर थोड़ा कॉन्फिडेंस भी आया कि कोई पूछने से तो रहा कि लड़की हो कि क्या हो? और यदि पूछ भी ले तो बोल दूंगी कि क्रॉडड्रेसर हूं। लड़की बनने का इलाज चल रहा है, दिल्ली के क्लीनिक से।

फिर एक ख्याल ये भी आया कि शायद किसी को शक हो जाए और नया लंड मिल जाए मुझे!
यानि मेरे तो दोनों हाथों में लडडू थे। मैं स्कूटी पर निकली।

तभी रास्ते में उनका फोन आया कि कंडोम ले लेना, हम लेना भूल गए हैं।
यहां मुझे गुस्सा भी आया कि कार में घूमते हैं और 20 रूपए का कंडोम नहीं ले सकते?

इस बात को भी मैंने पॉजीटिव लिया। मैंने गाड़ी अंधेरी सी जगह में रोकी, बैग से विग निकाल कर लगाया। आंखों में काजल लगाया और मुंह पर चुन्नी बांधी और फिर आवाज़ पतली करके लड़कियों जैसी स्टाइल में मेडिकल से कॉन्डोम मांगा।

मेडिकल वाला देखने लगा कि लड़की कब से कंडोम मांगने लग गई?
खैर मैंने एक्स्ट्रा डॉट वाला कंडोम लिया और फिर पोलोविक्ट्री के एक होटल में चेकइन किया। जल्दी से रूम में आकर मेकअप किया और फिर विग लगाया।

फिर रिसेप्शन पर फोन करके बोला कि दो बंदे जिनमें से एक का नाम मुदित जी है, वो आए तो मेरे रूम में भेज देना।

थोड़ी देर बाद टेलीफोन पर घंटी आई और पूछा कि मुदितजी को ऊपर भेज दें क्या?
मैंने हां कर दी।

मैंने फटाफट खुद को शीशे में देखा तो मैं ईयररिंग्स में, नेकलेस में, सूट, चुन्नी, कुर्ती, विग, अंगूठी, लिपस्टिक, बिंदी, काजल, नेलपॉलिश इन सबमें एकदम लड़की लग रही थी।

जैसे ही दरवाजे पर नॉक हुई और मैंने खोला तो एक मुदितजी थे और दूसरा थोड़े छोटे कद का 30 साल का सा लड़का था। आपको बता दूं कि मेरी उम्र तब 19 साल की थी।

मुझे देखते ही वो शॉक्ड से हुए और बहुत आश्चर्य करने लगे कि मैं कितनी खूबसूरत हूं।
मैंने जल्दी से हाथ पकड़कर दोनों को अंदर किया।

मुदित जी तो मंझे हुए खिलाड़ी थे, तो आराम से करना चाह रहे थे।

उन्होंने मेरा परिचय उस दूसरे लड़के से करवाया. उसका नाम विजय था। मैंने उसको गले से लगाया। मेरे लगाए हुए लेडीज़ पर्फ्यूम की खुशबू से वो मस्त हो गया।

मैंने बिना कुछ सोचे समझे मुदित जी की पैंट पर धावा बोला और हुक व चेन खोलकर बड़ा सा लंड बाहर निकाल लिया।
मैं जोर जोर से चूसने लगी।

उधर विजय मेरे बालों पर हाथ फेरते हुए मेरे गालों को किस करने लगा.

उसने मेरे हुस्न की तारीफ की। फिर मेरे कपड़े उतारने लगा। फिर मेरे हिप्स पर चांटे लगाए।
फिर विजय ने मुझे लिपलॉक कर लिया और मेरे होंठ चूस डाले।
मेरे बूब्स उसने बुरी तरह मसलने शुरू कर दिये।

मैं मदहोश होती जा रही थी। दोनों को खड़ा करके मैं घुटनों के बल बैठ गई और बारी बारी से किसी पोर्न स्टार की तरह लंड चूसने लगी।
दोनों के लंड के प्रीकम से मेरा मुंह सन गया।

फिर मुदित जी ने मुझे उठाया और घोड़ी बनाया। मैंने कंडोम निकाल कर दिया तो उन्होंने कंडोम लगाया।

उधर से विजय सामने आया और मेरे मुंह के सामने लंड किया तो मैंने गप्प से मुंह में भरकर गले तक ले लिया।

अब मेरी गांड की पहली बार लंड से चुदाई होने वाली थी। दर्द होने का कोई डर नहीं था क्योंकि गिलास और डाबर आंवला की बोतल जो ले चुकी हो, उसके सामने लंड क्या चीज भला?

मगर फिर भी लंड का मज़ा लंड में ही होता है। मुदित जी ने थूक गिराकर मेरी गांड गीली की। फिर एक जोर से चांटा मेरे हिप्स पर मारा, जिससे मुझे और भी मजा आया।

फिर मेरे गांड में एक ही झटके में उन्होंने अपना लौड़ा घुसा दिया, जिससे मेरी आह … निकल गई।
अब वो दोनों ताल मिलाकर मेरी चुदाई करने लगे। मुदित जी के झटके से मैं आगे होती और विजय का लंड गले तक जाता।

इतने में ही विजय के झटके से वापस मुदितजी का लंड उनकी बॉल्स तक मेरी गांड में घुस जाता। इस तरह दोनों तरफ से चुदाई चल रही थी। मैं सच में सैंडविच बन गई और बहुत मजा आया।

इस बीच मुदित जी पीछे से मेरे बूब्स जोर जोर से मसलने लगे। मानो आटा गूंथ रहे हो, इससे मैं और भी उत्तेजित हो गई। तकरीबन 15 मिनट की ताबड़तोड़ चुदाई ने मेरा कचूमर निकाल दिया।

मेरा गला दर्द करने लगा। वहीं हिप्स पर लगातार चांटें पड़ने से वे भी लाल हो गए। गांड भी हल्की हल्की दर्द करने लगी और आखिरकार दोनों ने एक साथ पानी निकाल दिया।

विजय ने मेरे गले में ही पिचकारी छोड़ी जिसे मैं पूरा पी गई। वहीं मुदित जी गांड के अंदर कंडोम में झड़े। उसको बाद में मैंने निकाल कर कंडोम में से वीर्य निकाल कर मुंह में गटक लिया।

वे दोनों मेरी गांड चुदाई और मुंह चुदाई करके बहुत खुश हुए। दोनों मेरे रूम से निकल गए।

मैं निढाल होकर बेड पर नंगी ही गिर गई।
रात भर होटल में रुकने के बाद सुबह वापस अपने घर आ गई।

मैं अब क्रॉसड्रेसर रंडी बनने का पहला कदम ले चुकी थी. ये तो शुरूआत हुई थी. अभी मुझे आगे कई पड़ाव पार करने थे.
तो ये थी मेरी पहली चुदाई की कहानी। आगे भी मेरी चुदाई की कहानियां बताती रहूंगी।

ये क्रॉसड्रेसर सेक्स स्टोरी कैसी लगी और मेरी क्रॉसड्रेसिंग को लेकर आपके क्या खयाल हैं, ये बताने के लिए मुझे नीचे दी गयी ईमेल पर मैसेज करें. सभी लंडों को मेरा प्रणाम।
[email protected]

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