एक दिल चार राहें -15

(Young Hot Girl Sex Story)

This story is part of a series:

यंग हॉट गर्ल सेक्स स्टोरी में पढ़ें कि पहली बार अपनी कमसिन मेड की चुदाई करने के बाद अगले दिन जब वो काम पर आयी तो मैं उसे दोबारा चोदना चाहता था. लेकिन …

मेरी यंग हॉट गर्ल सेक्स स्टोरी में अब तक आपने पढ़ा:

सानिया खड़ी हो गई, उसने अपने हाथों से अपनी बुर को ढक सा लिया। फिर वह नल की ओर जाने लगी। चलते समय जिस प्रकार वह लंगड़ा रही थी मुझे लगता है अभी 1-2 दिन तो वह ठीक से नहीं चल पायेगी।

मेरी अंगुलियाँ सानिया के सु-सु से भीग गई थी। मैंने एक बार उन अँगुलियों को अपनी नाक के पास ले जाकर सूंघा। उसकी सु सु में उसकी कमसिन जवानी की गंध तो मदहोश कर देने वाली थी।

“छी …” सानिया ने नल के पास पहुँच कर पलटकर मेरी ओर देखने लगी।

दरअसल मेरा यह सब करने का मकसद यही था कि सानिया के मन में यह बैठा दूं कि प्रेम में कोई चीज गंदी नहीं होती और वह मेरे लिए बहुत ही स्पेशल है।

अब आगे की यंग हॉट गर्ल सेक्स स्टोरी:
भेनचोद ये जिन्दगी भी झांटों की तरह उलझी ही रहती है। दफ्तर पहुंचते ही पता चला कि अगले सोमवार को वो नया फतुरा ऑफिस ज्वाइन कर रहा है। और मुझे भी अगले हफ्ते ट्रेनिंग पर जाने के आदेश आ गए हैं।
सानिया के साथ तो अभी मन ही नहीं भरा था। और लैला ने जिस प्रकार दिल ही नहीं अपनी टांगें खोल कर चुदवाया था मन तो और ज्यादा मचलने लगा था।

3 दिन हो गए साली इस लैला ने तो फोन ही नहीं किया। दिन तो जैसे तैसे बीत ही गया पर सारी रात सानूजान की याद में करवटें लेते ही बीती। मन में थोड़ा डर भी था। हालांकि सानिया पर मुझे पूरा विश्वास था कि वह किसी से कल की घटना का जिक्र नहीं करेगी पर अगर ज़रा भी गड़बड़ हो गई तो गब्बर (सानिया का बापू) यही कहेगा अब तेरा क्या होगा प्रेम गुरु?

अगले दिन तय प्रोग्राम के मुताबिक़ सुबह सानिया जल्दी आ गई थी। मैं फ्रेश होकर हाल में बैठा उसका इंतज़ार ही कर रहा था। आज उसने वही जीन पेंट और टॉप पहना था जो मैंने कल उसे दिया था। मेरा अंदाज़ा है आज उसने वह झीनी नेट वाली ब्रा-पेंटी भी अन्दर जरूर पहनी होगी।

उसने आज दो चोटियाँ बना रखी थी और नये वाले जूते भी पहनकर आई थी। हे भगवान्! इस जीन पेंट में तो उसके गोल मटोल नितम्ब बहुत ही कसे हुए और खूबसूरत लग रहे थे।

वह दरवाजा बंद करके अन्दर आ गई और फिर उसने अपने जूते खोलकर चप्पल पहन ली। मैंने सोफे से उठकर अपनी बांहें उसकी ओर फैला दी।

सानिया शर्माते हुए अपनी मुंडी नीची किए धीरे-धीरे चलती हुई मेरी ओर आने लगी। उसकी चाल में थोड़ी लंगडाहट सी तो जरूर थी पर उसके चहरे पर अनोखी मुस्कान थी। जैसे ही वह मेरे पास आई मैंने उसे अपनी बांहों में भर लिया और एक चुम्बन उसके होंठों पर ले लिया।

“आईईई … क्या कर रहे हो?” सानिया ने कसमसाते हुए कहा।
“सानू कल रात मुझे ज़रा भी नींद नहीं आई.”
“क्यों?”
“मुझे तो नहीं पता पर मेरे दिल से पूछ लो?” मैंने हंसते हुए कहा।

“हम्म?”
“अच्छा तुम्हें भी नींद आई या नहीं?”
“किच्च”
“अरे … तुम्हें भला नींद क्यों नहीं आई?”
“आप भी मेले दिल से पूछ लो.” सानिया की कातिल मुस्कान तो जैसे मेरे कलेजे का चीर हरण ही कर दिया।

मैंने कसकर उसे अपनी बांहों में भर लिया और फिर कई चुम्बन उसके गालों और होंठों पर ले लिए।

“अब बस … करो … मुझे सफाई भी करनी है और कपड़े धोने हैं और आपके लिए नाश्ता बनाना है।”
“ओहो … ये सफाई तो होती रहेगी बस थोड़ी देर तुम मेरे पास बैठो।” कहते हुए मैं सानिया को अपने आगोश में लिए सोफे पर बैठ गया।

सानिया थोड़ा कसमसाई तो जरूर पर मैं थोड़ी मशक्कत के बाद उसे अपनी गोद में बैठा लेने में कामयाब हो गया। सानिया ने भी ज्यादा ऐतराज नहीं किया।

“सानू कल रात मुझे तुम्हारी बहुत याद आती रही? पता नहीं तुमने मुझे याद किया या नहीं?”
“मैंने भी सारी रात आपको कित्ता याद किया … मालूम?” उसने मेरी आँखों में झांकते हुए कहा।

मैंने अपने एक हाथ से उसकी बुर को टटोलना शुरू किया तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया।
“आपने तो अपने मन की कर ली … मालूम मुझे कित्ता दर्द हो रहा था?”
“ओह … सॉरी मेरी जान … अब भी हो रहा है क्या?”
“अब तो थोड़ा ठीक है पर कल सारे दिन बहुत दर्द होता रहा था.” उसने उलाहना देते हुए कहा।

“लाओ मैं उसपर क्रीम लगा देता हूँ.”
“ना … बाबा … ना … आप तो रहने ही दो … अब दुबारा मैं आपकी बातों में अब नहीं आने वाली.” सानिया की आवाज में विरोध कम और उलाहना ज्यादा था।
“सानू तुमने रात में पैरों पर वो क्रीम तो लगा ली थी ना?”
“हओ …”
“और वो ब्रा-पेंटी आज पहनी या नहीं?”
“हओ” कहते हुए सानिया शर्मा सी गई।
इस्स्स्स …

मैंने झुक कर उसके होंठों पर एक चुम्बन ले लिया और फिर उसके उरोजों को मसलने लगा। सानिया की साँसें अब गर्म होने लगी थी और दिल जोर-जोर से धड़कने लगा था। मेरा मन तो करने लगा था इसी सोफे पर आज सानू जान के हुस्न का मजा ले लिया जाए।
“ए जान …”
“हम्म?”
“वो … ब्रा पेंटी मुझे भी दिखाओ ना प्लीज?”
“हट! … मुझे शर्म आती है.”

“यार अब शर्म हया जाने दो … तुम तो मेरी जान हो … वो प्रीति अपने बॉयफ्रेंड को सब कुछ दिखा सकती है तो तुम क्यों नहीं?”
“मैं पहले सफाई कर लूं और आपके लिए नाश्ता बना दूं फिर दिखा दूंगी.”

“यार नाश्ते की चिंता मत करो मैं बाजार से आज तुम्हारे लिए गरमा गर्म जलेबी और खस्ता कचोरी ले आऊंगा.”
“ओह …”
“क्या हुआ? तुम्हें जलेबी पसंद नहीं है क्या?”
“नहीं मुझे तो बहुत अच्छी लगती है पर …”
“पर क्या?”

“वो और भी काम करने वाले हैं ना?”
“मुझे लगता है तुम्हें मेरे पास बैठना अच्छा नहीं लगता?”
“मैंने ऐसा कब बोला?” उसने सवालिया नज़रों से मेरी ओर देखा और फिर बोली “अच्छा ठीक है।”

“हाँ यह हुई ना अच्छी गर्ल फ्रेंड वाली बात!” कहते हुए मैंने फिर से सानिया को चूमना चालू कर दिया। सानिया मेरी नियत को अच्छी तरह जान चुकी थी।
“सानू … कल तुम्हें भी मज़ा आया ना?”
“कित्ता दर्द हुआ मालूम? मुझे तो लगा किसी ने चीर दिया है अन्दर से?”
“सॉरी … जान तुम्हारे जैसी प्रेयसी पाकर मैं धन्य हो गया।”

“और इस दर्द को मैंने घर वालों से कैसे छुपाया मैं ही जानती हूँ.” सानिया ने उलाहना दिया।
“थैंक यू मेरी जान … वैसे एक बात बोलूँ?”
“क्या?”
“सानू यार आज तो तुम इस पेंट-शर्ट में बहुत ही खूबसूरत लग रही हो.”
“अच्छा?”

“ए जान … एक बार वो ब्रा पेंटी दिखाओ ना … कैसी लग रही है तुम्हारे शरीर पर?” मैंने पेंट के ऊपर से उसकी बुर को मसलते हुए कहा।
“वो … मुझे शर्म आती है।“
“यार अब शर्म की क्या बात रह गई है?”
“आपने तो मुझे बिल्कुल ही बेशर्म बना दिया.”
“अपने बॉय फ्रेंड से कैसी शर्म? देखो वो प्रीति भी तो अपने बॉय फ्रेंड को सब कुछ दिखा देती है.”

सानिया पता नहीं क्या सोचे जा रही थी। थोड़े देर बाद वह बोली- आपको उसकी एक और बात बताऊँ?
“हाँ … बताओ?” मेरा दिल जोर जोर से धड़कने लगा था।
साली यह प्रीति नामक बला तो सच में हमारी सानूजान को कोकशास्त्र की पूरी ट्रेनिंग ही देकर छोड़ेगी।

हे भगवान्! जिस प्रकार सानिया उसका जिक्र करती है किसी दिन अगर मुझे मौक़ा मिल जाए तो खुदा कसम आगे और पीछे से ठोक कर उसके सरे कस बल निकाल दूं।
“वो … वो … अपने बॉयफ्रेंड का हाथ में पकड़कर मसलती भी है और मुंह में भी ले लेती है.”
“अरे वाह … जिओ मेरी जान … उसका बॉय फ्रेंड कितना भाग्यशाली है आह … क्या किस्मत है बन्दे की.”

सानिया ने आश्चर्य से मेरी ओर देखा। शायद उसे प्रीति और उसके बॉय फ्रेंड की तारीफ़ अच्छी नहीं लगी थी। नारी सुलभ ईर्ष्या के कारण ऐसा होना लाजमी था।

“मैंने बोला तो है घर का काम करने के बाद आपको दिखा दूंगी.”
“यार … देखो सारी रात तुम्हारा इंतज़ार किया और अब तुम और इंतज़ार करने का बोल रही हो … प्लीज!” मैंने उसकी मिन्नतें करने सफल अभिनय किया।
“ओह … आप भी पूरे जिद्दी हो.” उसने अपनी आँखें तरेरते हुए कहा।
“ओह … थैंक यू मेरी जान!” कहते हुए मैंने फिर से उसके गालों को चूम लिया।

अब मैंने उसे फिर से गोद में उठा लिया और बेड रूम में आ कर उसे ड्रेसिंग टेबल के सामने फर्श पर खड़ा कर दिया और मैं बेड पर बैठ गया। सानिया ने पहले तो अपने आप को ड्रेसिंग टेबल के शीशे में देखा और फिर थोड़ा झिझकते हुए पहले तो उसने अपना टॉप उतारा और फिर अपनी पेंट की जिप खोलने लगी।

मेरा लंड तो जैसे क़ुतुब मीनार ही बन गया था।

सानिया ने बिना किसी हूल हिज्जत के पेंट नीचे घुटनों तक कर दी। रेशम सी कोमल कमनीय काया, पतली कमर, गहरी नाभि और गोल कसे हुए नितम्ब … आह … जैसे हुस्न का खजाना सामने नुमाया हो गया था।

नेट वाली पेंटी में उसकी बुर के फूले हुए पपोटे आज कुछ ज्यादा ही मोटे लग रहे थे। और ब्रा के अन्दर कसी हुयी दो लम्बुतरी नारंगियाँ तो टेनिस की बॉल की तरह लग रही थी।

“वाह … अप्रतिम … बहुत खूबसूरत … सानू इस ब्रा पेंटी में तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो … ज़रा शीशे में अपने इस अनुपम सौंदर्य के अनमोल खजाने को एक बार देखो तो सही!”

सानिया तो मेरे बोलने से पहले ही रूपगर्विता बन चुकी थी। उसने अपने आप को एक बार शीशे में देखा और फिर शरमाकर अपनी मुंडी नीची कर ली।

अब मैं उठकर उसके पास आ गया। उसकी आँखों में लाल डोरे तैरने लगे थे और साँसें तेज चलने लगी थी। मेरे दिल की धड़कनें भी बहुत तेज हो गई थी और लंड तो उछल-उछल कर बावला ही हो रहा था।

मैं फर्श पर बैठ गया और हाथ बढ़ा कर सानिया के दोनों नितम्बों पर रखते हुए उसे अपनी ओर खींचा। अब तो उसकी बुर ठीक मेरे मुंह के सामने आ गई। उसकी बुर से आने वाली गंध ने तो मुझे और भी कामातुर बना दिया था।

मैंने एक चुम्बन पेंटी के ऊपर से ही उसकी बुर पर ले लिया। सानिया की एक किलकारी पूरे कमरे में गूँज गई।
“ईईईईई …” सानिया ने मेरे सिर के बालों को अपने हाथों में पकड़ लिया।
“आह … क्या कर रहे हो सर?”

मैंने उसकी बुर पर दो-तीन चुम्बन और लिए और ऊपर होते हुए उसके पेडू और नाभि को चूमते हुए उसके उरोजों, गले और होंठों को चूमता चला गया। सानिया की मीठी सित्कारें निकलने लगी थी।

“सानू मेरी जान … मैं तुम्हारे बिना अधूरा हूँ … जान आओ मुझे एक बार फिर से पूर्ण पुरुष बना दो.”

अब बेचारी सानू के पास बोलने के लिए ज्यादा क्या बचा था। मैंने उसे सहारा देते हुए उसे बेड पर लेटा दिया और पहले तो उसके पैरों में फंसी जीन पेंट को निकाला और फिर उसकी पेंटी को भी निकाल दिया। और फिर उसकी ब्रा की डोरी को खींच कर उसे भी निकाल दिया। अब मैंने भी अपने कपड़े उतार फेंके।
मैंने तकिये के नीचे से निरोध निकाला और उसे सानिया को पकड़ाते हुए कहा- जान आज तुम इसे अपने हाथों से पहनाओ ना प्लीज?

सानिया पहले तो थोड़ा झिझकी और फिर उसने निरोध को अपने हाथों में लेकर उसे मेरे लंड पर चढ़ा दिया। उसके कोमल हाथों में आते ही मेरा लंड तो उछलने ही लगा और बार-बार उसके हाथों से फिसलने लगा था।

अब मैंने पास में रखी क्रीम निकाल कर अपने लंड पर लगाई और फिर सानिया को अपनी जांघें चौड़ी करने का इशारा किया तो उसने थोड़ा शर्माते हुए अपने जांघें खोल दी पर अपनी बुर पर हाथ रखे रखा।

सानिया के पपोटे कल की चुदाई के कारण सूज से गए थे और आज तो थोड़े गुलाबी से लगने लगे थे। उसके ऊपर हल्के हल्के घुंघराले बाल तो रेशम से भी ज्यादा मुलायम थे। मुझे लगा अगर सानिया इन बालों को साफ़ कर ले तो बुर को चूसने में और भी ज्यादा मज़ा आ सकता है।
पर यह समय केश कर्तन का नहीं था। मैं एकबार तसल्ली से उसकी चुदाई कर लेना चाहता था।

अब मैंने सानिया का हाथ उसकी बुर से हटा दिया और उसके पपोटों को चौड़ा करके उसके चीरे के बीच में क्रीम लगाने लगा। जैसे ही मेरी अंगुलियाँ उसके गुलाबी लहसुन पर लगी सानिया तो आह.. ऊंह … करने लगी थी।

उसका चीरा तो कामराज से लबालब भरा दिख रहा था। चीरा अन्दर से इतना सुर्ख (रक्तिम) था कि किसी तरबूज की पतली सी फांक की मानिंद लगाने लगा था। और मदनमणि तो आज किशमिश के दाने की तरह लग रही थी।
मैंने एक चुम्बन उसके ऊपर लिया तो सानिया की मीठी किलकारी ही निकल गई। मुझे लगा उसकी बुर ने पानी छोड़ दिया है।

और फिर मैंने उसकी जाँघों और पेडू को चूमते हुए उसके उरोजों की घाटी को चूमा तो सानिया कसमसाने सी लगी। फिर मैंने उसे थोड़ा सा करवट के बल करते हुए उसकी पिंडलियों, जाँघों, पीठ और नितम्बों को चूमना शुरू कर दिया।

सानिया का तो सारा ही शरीर रोमांच और उत्तेजना के मारे लरजने सा लगा था। उसके शरीर के सारे रोयें खड़े से हो गए थे।

अब मैंने उसकी पीठ और कन्धों के ऊपर चुम्बन लिया और अपने हाथों को उसकी नितम्बों पर फिराया। रोमांच के मारे सानिया का पूरा शरीर ही लरजने लगा था। अब मैंने दोनों हाथों से उसके नितम्बों की खाई को थोड़ा सा खोला। कसे हुए नितम्ब और उनके बीच छोटा सा सांवले रंग का छेद जैसे मुझे ललचा रहा था।

मैंने पहले तो उस छेद पर अंगुली फिराई और बाद में नीचे होकर एक चुम्बन लेने की कोशिश की तो सानिया एक किलकारी सी मारते हुए जल्दी से पलटकर सीधी हो गई। उसकी साँसें बहुत तेज हो गई थी और आँखें भी लाल सी हो गई थी।

“सर … कुछ करो … नहीं तो मैं मर जाऊंगी … आह …” उसने अपनी मुट्ठिया जोर से भींच ली।

दोस्तो! अब देरी करना ठीक नहीं था। मैंने अपने लंड को उसकी बुर पर थोड़ा सा घिसा और फिर उसके पपोटों को हाथ के अंगूठे और तर्जनी अंगुली से खोलकर अपेने लंड को उसकी बुर के छेद पर लगा दिया।

अब मैं उसके ऊपर आ गया और जैसे ही मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर लगाए सानिया ने जल्दी से मेरे होंठों को चूमना चालू कर दिया और अपनी कमर उचकाने लगी। शायद उसे मेरे से भी ज्यादा जल्दी लग रही थी।

और फिर मैंने एक धक्के के साथ अपना लंड उसकी बुर में डाल दिया। सानिया के मुंह से ‘आईई’ की जगह ‘हुच्च’ की आवाज सी निकली। वह थोड़ा कसमसाई तो जरूर पर आज तो वह पहले से ही इसके लिए तैयार लग रही थी। मुझे लगता है सारी रात उसने आज के इस शुभ कार्य की योजना के बारे में ही चिंतन किया होगा।

कल मैंने बहुत ही संयम से काम लेते हुए इस क्रिया को संपन्न किया था पर आज तो मार्ग जैसे निष्कंटक था। मैंने पहले तो हल्के धक्के लगाए और बाद में थोड़े तेज कर दिए।

सानिया की चूत आज भी बहुत कसी हुई लग रही थी। हो सकता है कल की पहली चुदाई के कारण उसमें कुछ सूजन होने कारण ऐसा लग रहा है।
कोई बात नहीं अगले 5-4 दिनों में तो यह और भी रवां हो जायेगी फिर तो इसे बजाने में और भी आनंद आने वाला है।

सानिया मेरे हर धक्के के साथ अपने नितम्ब उचकाने लगी थी। उसके चहरे को देखकर तो कतई नहीं लग रहा था कि उसे कोई ज्यादा दर्द हो रहा है अलबता वह तो हर धक्कों के साथ आह … ऊंह … जरूर करती जा रही थी।

मैंने एक हाथ से उसके उरोज को पकड़कर मसलना चालू कर दिया और एक उरोज को मुंह में भर कर चूसने लगा। सानिया ने अब अपनी जांघें और भी ज्यादा खोल दी थी। अब तो लंड सरपट अन्दर बाहर होने लगा था। मैं बदल-बदल कर उसके उरोजों को चूसने लगा था और कभी कभी उसके चूचकों (स्तानाग्रों) को भी दांतों से काटने लगा था।

सानिया को शायद इन सब में बहुत ही आनंद आ रहा था। अब तो उसने अपने दोनों घुटने भी ऊपर उठा लिए थे।

अचानक वह मेरी कमर पकड़कर मुझे भींचने लगी थी। मुझे लगा उसका शरीर अकड़ने सा लगा है और उसकी बुर ने संकोचन करना चालू कर दिया है।

और फिर आआ … ईई … करते हुए उसने 2-3 लम्बी साँसें ली और फिर अपने शरीर को ढीला छोड़ दिया। लगता है उसका ओर्गास्म हो गया है। मैंने भी थोड़ी देर के लिए धक्के लगाने बंद कर दिए।

“सानू थक गई क्या?”
“किच्च?” उसने अपनी आंखें खोलते हुए कहा। उसकी आँखों में संतुष्टि की झलक साफ़ देखी जा सकती थी।

मैंने उसकी आँखों पर एक चुम्बन लिया और फिर से धक्के लगाने चालू कर दिए। मैं एक बार उसे डॉगी स्टाइल में करके चोदना चाहता था पर मैंने अपना यह ख्याल बदल दिया। दरअसल मैं आज बाथरूम में इस चिड़िया के साथ नहाते समय डॉगी या घोड़ी स्टाइल में करके करने के मूड में था। मुझे लगता है अगर इस समय मैंने इसे इस बात के लिए कहा तो हो सकता है वह मान भी जायेगी पर फिर बाथरूम में इस प्रकार चुहल करने की हिम्मत वह दुबारा नहीं जुटा पायेगी।

मैं अपने ख्यालों में खोया हुआ था कि मुझे अपने होंठों पर सानिया के दांतों की चुभन सी महसूस हुयी। शायद मेरे धक्कों के बंद हो जाने से सानिया ने ऐसा किया होगा। और फिर तो मैंने दनादन धक्के लगाने शुरू कर दिए।
सानिया इसमें पूरा साथ दे रही थी।

मैं कभी उसके गालों को चूमता कभी उसके उरोजों को। जैसे ही सानिया अपने नितम्बों को उचकाती मैं अपना एक हाथ नीचे ले जाता और उसके नितम्बों की खाई में उसकी गांड के छेद को टटोलने और उसपर अंगुली फिराने का प्रयास करने लग जाता।

“सानू जान अगर तुम ऊपर आ जाओ तो तुम्हें बहुत मज़ा आएगा.”
“आह … ऐसे ही ठीक है.” कहते हुए उसने मेरी पीठ पर अपनी बांहों की जकड़ और भी बढ़ा दी।

फिर मैंने एक हाथ उसकी गर्दन के नीचे किया और फिर उसकी कमर को पकड़ते हुए एक पलटी मारी तो सानिया आआईइ … करती हुयी मेरे ऊपर आ गई।

अब वह अपने घुटने थोड़े मोड़ कर मेरे ऊपर उकडू सी हो गई। अब तो सारी कमान उसे के हाथों में थी। मैंने अपने सिर को थोड़ा ऊपर उठाते हुए उसकी बुर को देखा। मेरा लंड पूरी गहराई तक उसकी बुर में समाया हुया था। ऐसा लग रहा था जैसे किसी बिल्ली के मुंह में कोई मोटा सा चूहा फंसा हो।

मैंने उसके कमर को अपने दोनों हाथों में पकड़ कर उसे थोड़ा ऊपर उठाने की कोशिश की। अब सानिया इतनी भी भोली नहीं थी कि मेरी मनसा ना समझ पाए। उसने शरमाकर अपनी आँखें बंद कर ली और फिर ऊपर नीचे होने लगी। इस समय उसकी बुर की कसावट बहुत ही ज्यादा महसूस होने लगी थी। उसकी बुर ने पानी छोड़ दिया था और अब तो उसकी बुर से निकला पानी मेरे अण्डकोष तक जाने लगा था।

सानिया ने थोड़ी देर धक्के लगाए और फिर उसने अपना सिर मेरे सीने पर रख दिया। ऐसा करने से उसके नितम्ब थोड़े ऊपर उठ गए। अब तो मेरा हाथ उसके नितम्बों और उसकी खाई में आराम से सैर कर सकता था। हे भगवान्! नितम्बों की पूरी दरार गीली सी लगने लगी थी। मैंने उसकी दरार में अपनी अंगुलियाँ फिराना चालू कर दिया और उसके एक उरोज को भी अपने मुंह में भरकर चूसने लगा।

हमें 20-25 मिनट हो ही गए थे। इस बीच सानिया दो बार और झड़ गई थी और अब तो मुझे भी लगने लगा था मेरा तोता उड़ने वाला है।

“अब आप ऊपर आ जाओ.” कहते हुए सानिया ने पलटी सी मारने की कोशिश की। अब तो मेरा ऊपर आना जरूरी था नहीं तो इस आपाधापी में मेरा लंड फिसलकर बाहर आ सकता था और मैं ऐसी गलती नहीं करना चाहता था।
अब मैं उसके ऊपर आ गया और धक्के लगाने लगा। सानिया ने अपने दोनों पैर ऊपर उठा दिए और मैंने भी 5-7 धक्कों के साथ अपनी पिचकारियाँ छोड़ दी।

सानिया आह … उईईइ … करती अपने जीवन के इन अनमोल पलों को भोगती रही।

आज के इस प्रेम युद्ध में तो खून खराबे (रक्तपात) का कोई काम नहीं था। थोड़ी देर बाद हम दोनों उठ कर खड़े हो गए।

मैं तो आज भी सानिया को अपनी गोद में उठाकर बाथरूम ले जाना चाहता था पर उसने मना कर दिया। वह अपने पेंट और शर्ट (टॉप) उठाकर बाथरूम में भाग गई।

बेड पर लेटा मैं अगले प्रोग्राम के बारे में सोचने लगा था। कल ऑफिस में छुट्टी है। सानिया को बोल दूंगा कल पूरे दिन नहीं तो कम से कम दोपहर तक तो जरूर यहाँ रुक जाए। उसके पास तो कपड़े धोने और दीपावली पूर्व घर की सफाई का बहाना भी है. घर वालों को इस बात पर शायद ही कोई ऐतराज हो।
और फिर तो सानिया के साथ दोपहर तक जी भर के मस्ती की जा सकती है।

मेरा मन तो कर रहा था कल सबसे पहले उसकी उसकी बुर की केशर क्यारी को साफ़ किया जाए और फिर उसे चूमा और चूसा जाए। मेरा मन एक बार उसे लंड चुसवाने का भी करने लगा था। और फिर उसे बाथरूम में नल के नीचे घोड़े बनाकर नहाने का आनंद तो यादगार बन जाएगा। और फिर रसोई में नंगे होकर नाश्ता बनाते समय उसे प्रेम के दूसरे सबक भी सिखाये जा सकते हैं। उसके कसे हुए नितम्बों को देखकर मेरा मन तो बेईमान ही बनता जा रहा है। मुझे लगता है थोड़ी मान मनोवल के बाद सानिया गांड देने के लिए भी तैयार हो जायेगी।

प्रिय पाठको और पाठिकाओ, आपको क्या लगता है? क्या सानिया आपनी गांड देने के लिए राजी हो जायेगी?
यंग हॉट गर्ल सेक्स स्टोरी कैसी लग रही है? मुझे बताएँगे ना?
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यंग हॉट गर्ल सेक्स स्टोरी जारी रहेगी.

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