समन्दर किनारे दीदी की चुदाई का मजा-2

(Sea Beach Par Didi Ki Chudai Ka Maja- Part 2)

समन्दर किनारे दीदी की चुदाई का मजा-1

साथियो, अब तक आपने मेरी दीदी की चुदाई की कहानी में पढ़ा कि हम दोनों समन्दर के किनारे एक दूसरे के लंड चुत को चूसने की तैयारी में लग पड़े थे।
अब आगे..

मैंने दीदी को वहीं बालू पर ही लिटा दिया और उसकी चुची को मुँह से चूसने-काटने लगा। इसी के साथ मेरा हाथ दीदी की कैपरी के अन्दर चला गया। हाथ के स्पर्श से मालूम हुआ कि उसने नीचे चुत के बाल साफ कर रखे थे, मतलब वो चुदने का पूरा प्लान बना कर आई थी।

मैं उसकी चुत पर अपनी उंगली घुमाने लगा तो उसके मुँह से मादक सीत्कार निकलने लगी। फिर मैंने धीरे से एक उंगली को उसकी गीली होती हुई चुत में डाल दिया।

हालांकि मुझे पता था कि सुरभि दीदी जैसी चुदक्कड़ को अपनी चुत में एक उंगली से कोई फ़र्क तो पड़ने वाला नहीं था.. फिर भी मैंने चुत में खलबली मचाने के लिए उंगली को अन्दर डाल दिया और घुमाने लगा।
इधर दीदी ने भी मेरे लंड को बाहर निकाल लिया और हिलाने लगी।

कुछ देर ये सब चलता रहा.. फिर हम दोनों 69 पोज़िशन में आ गए। वो मेरे नीचे मुँह किए हुई दबी पड़ी थी.. मैं ऊपर था। उसने मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया था और मैं उसकी चुत को मुँह से चाटने लगा। अब दीदी भी मेरे लंड को आइसक्रीम की तरह चाट-चूस रही थी। कुछ देर ऐसे ही चुसाई कार्यक्रम चलता रहा। फिर मैं उसके नीचे हो गया और दीदी मेरे ऊपर हो गई। अभी भी 69 पोज़िशन ही थी.. मेरा लंड उसके मुँह के पास था और उसकी चुत मेरे मुँह में दबी थी।

हम दोनों एक-दूसरे के आइटम चूस-चाट रहे थे। मैंने अपना हाथ सुरभि की कमर पर रखा और उसकी नंगी पीठ को सहलाने लगा। फिर धीरे-धीरे पीछे से उसकी कैपरी में हाथ डाल दिया और उसके चूतड़ों को सहलाने लगा। फिर मैंने एक झटके में उसकी कैपरी को नीचे कर दिया। अब उसकी कैपरी उसके घुटनों पर पहुँच गई और उसके चूतड़ पूरे नंगे हो गए। मैं उसके नंगे चूतड़ों को मसलते हुए दबाने लगा।

वैसे तो सुरभि का पूरा बदन मस्त है लेकिन उसकी गांड और चुची की जितनी भी तारीफ करूँ, उतनी कम है। वो जैसा भी ड्रेस पहने, उसकी 38 की चुची और उठी हुई गांड के इलाके दूर से ही पता चल जाते हैं।

खैर.. कुछ देर मज़े करने के बाद हम दोनों वहीं झड़ गए। उसकी चुत का पूरा पानी मेरे चेहरे पर आ गया और मेरे लंड का सारा पानी उसने पी कर मेरे लंड को चाट-चाट कर साफ कर दिया।

उसके बाद हम दोनों अलग हुए.. तब तक अंधेरा भी होने लगा था या बोलें लगभग अंधेरा हो चुका था।

वो अपने कपड़े ऊपर करने लगी तो मैं बोला- अब तो अंधेरा हो ही गया है.. इसकी क्या ज़रूरत है।

ये बोलते हुए मैंने उसके टॉप को पूरा उतार दिया.. वो ऊपर से पूरी नंगी हो गई थी। वो मुझ से अपना टॉप माँगने लगी.. तो मैं टॉप ले कर भागने लगा। वो मेरे पीछे नंगी ही दौड़ी।

जब वो मेरे पीछे दौड़ रही थी तो उसकी चुची ऊपर-नीचे होते हुए बड़ा सेक्सी सीन बना रही थीं.. जिसके देखने में मुझे बहुत मजा आ रहा था। सो मैं जानबूझ कर और भी उसको अपने पीछे भगा रहा था।

कुछ दूर तक भगाने के बाद मैंने अपनी बनियान उतार कर दे दी और बोला- लो इसको पहन सकती हो, तो पहन लो।

अब हम दोनों भाई-बहन सी-बीच पर ऊपर से नंगे थे।

जब वो मेरे करीब आई तो उसको मैंने अपने सीने से लगा लिया.. उसकी नंगी चुची मेरे सीने पर मजा दे रही थीं।

मैं उसकी पीठ को सहलाते हुए बोला- एक राउंड यहीं हो जाए।
तो वो बोली- यहाँ?
मैं बोला- हाँ क्या प्राब्लम है.. अंधेरा तो हो ही गया है.. कोई तो इधर आएगा नहीं। बंद कमरे में तो हम लोग बहुत बार मज़े कर चुके हैं, कभी खुले आसमान में भी करके देखो.. कितना मजा आता है।
वो बोली- तो हो जाए.. रोका किसने है।

इतना सुनते ही मुझे मानो मुँह माँगी मुराद मिल गई हो।

मैं दीदी की चुदाई के इस मौके का फायदा उठाने में देर करने वाला नहीं था, मैंने सीधे सुरभि दीदी के होंठ पर अपने होंठ रख दिए और उसे लिपकिस शुरू कर दिया। अब तक मेरा हाथ उसकी कैपरी को भी नीचे कर चुका था।
कुछ देर लिपकिस करने के बाद हम दोनों पूरे नंगे हो गए और मैंने हम दोनों के कपड़ों को एक पत्थर से दबा दिया कि कहीं हवा में ना उड़ जाएं।

इसके बाद मैं सीधा सुरभि दीदी की चुत पर टूट पड़ा। मैंने उसके दोनों चूतड़ों को पकड़ कर अपने से चिपका लिया.. जिससे मेरा लंड उसकी चुत पर रगड़ने लगा। मेरे लंड ने भी अपने जाने का रास्ता देख लिया था, सो मैंने वहीं सुरभि डार्लिंग को बालू पर लिटा दिया और लंड को चुत के मुँह पर रख कर एक जोरदार झटका दे मारा। मेरा पूरा लंड एक बार में दीदी की चुत में घुसता चला गया।

उसके मुँह से जोर से ‘आअहह..’ की आवाज़ निकली, तो मैं उसकी चुत के पास अपनी हाथ से सहलाने लगा। थोड़ा देर यूं ही चुत को सहलाने के बाद मैं लंड को आधा बाहर निकाल कर चुत में अन्दर-बाहर करने लगा।

कुछ देर ऐसा करने के बाद मैं उससे घोड़ी बनने को बोला.. तो वो बन गई। मैं पीछे से उसकी चुत में लंड डाल के ‘घाप.. घाप..’ धक्के मारने लगा।

वो भी मजे से मादक सीत्कारों के साथ दीदी की चुत की चुदाई का मजा उठाने लगी। सुरभि ‘आआह.. ऊऊओहुउउ..’ की आवाज़ करने लगी। लेकिन उससे ज्यादा तेज आवाज़ समंदर की लहरों की थी। कुछ देर चुदाई का खेल चला.. फिर मैंने उसको गोद में उठा लिया तो दीदी ने अपने दोनों पैरों से मेरी कमर को जकड़ लिया। मैंने उसके चूतड़ों को अपने हाथों में सम्भाल रखे थे।

अब मेरा लंड उसकी चुत में फनफनाते हुए अन्दर जा रहा था.. फिर बाहर आ रहा था। इस खेल में उसकी चुची से मेरा सिर फुटबाल खेल रहा था। बीच-बीच में मैं उसके निप्पलों को भी चूस रहा था और चुत में झटके भी मार रहा था।

कुछ देर ऐसा करने के बाद हम दोनों अलग हुए और मैं समंदर के पानी के ठीक पास पीठ के बल लेट गया.. जिससे समंदर का पानी जब आता तो मेरे पैर तक छू कर लौट जाता था। मैं लेटा तो दीदी अपने मन से ही मेरे लंड पर बैठ गई और खुद से चुदने लगी।

मैं भी नीचे से लंड के झटके मार रहा था और सामने उसकी चुची उछाल मार रही थीं, जिनको देख कर मैं और भी जोर-जोर से झटके मारने लगा। वो भी जोर-जोर से आहें भरने लगी, ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ करने लगी जो कि वहाँ के पूरे वातावरण में गूँज रही थी।

उधर समुंदर का पानी भी जब आता था, तो हम दोनों भिगो कर चला जाता था। दरिया का ठंडा पानी और हम दोनों के गरम शरीर.. अह.. बहुत मजा आ रहा था।

कुछ देर उसी पोज़ में धकापेल चोदा चोदी हुई.. फिर 4-5 आसनों में और चुदाई की। फिर हम दोनों झड़ गए और कुछ देर वहीं लेटे रहे।

फिर कुछ देर बाद अपने शरीर से रेत झाड़ कर हम दोनों ने अपने-अपने कपड़े पहन लिए।

अब तक रात के 9 बज चुके थे.. हम दोनों होटल के कमरे में आए और यहीं फ्रेश हो कर खाना मंगा कर खाना खा कर बिस्तर पर आ गए।

वो बिस्तर पर आते ही मचल कर मेरी बांहों में आ गई और बोली- क्या बात है आज बहुत मूड में थे.. लगता है बहुत दिनों से कोई मिली नहीं है।
मैं बोला- तुम भी तो मूड में थीं। वैसे मुझे मिलती तो बहुत हैं.. लेकिन सब में वो बात नहीं है.. जो तुम में है। वैसे भी तुम मेरी बीवी हो.. तुमको जितना भी प्यार करता हूँ, कम ही लगता है। वैसे आज खुले आसमान के नीचे मज़े करके कैसा लगा?
वो बोली- पहले थोड़ा डर लगा, लेकिन मजा बहुत आया।
‘अब तुम कल का बताओ, क्या प्रोग्राम है?’
तो वो बोली- कल कहीं घूमने चलेंगे.. ओड़ीसा में घूमने की बहुत जगह हैं। कोणार्क मंदिर चलते हैं और बाकी कल सोचा जाएगा। अभी पहले रात का प्रोग्राम बनाते हैं।

ये बोल कर मैंने उसको अपने तरफ़ खींच लिया। उसके बाद क्या हुआ, दीदी की चुदाई हुई फ़िर से…
कहानी अच्छी लगी या नहीं, मेल जरूर करना।

[email protected]
आप मुझे फ़ेसबुक पर भी संपर्क कर सकते हैं.. मेरी फेसबुक का लिंक नीचे दिया है।
https://www.facebook.com/profile.php?id=100010396984039

What did you think of this story??

Comments

Scroll To Top