विधवा की कामवासना- 2

(Mera Nanga Sex)

दीपाली पाटिल 2021-03-30 Comments

इस कहानी में मेरा नंगा सेक्स है. मैंने अपनी अन्तर्वासना के चलते एक गैर मर्द को अपने चक्कर में लिया, उसे अपने घर बुलाकर उसके लंड से चुदाई का मजा लिया.

हैलो फ्रेंड्स, मैं दीपाली पाटिल एक बार फिर से अपनी चुदाई की कहानी में आप सभी का स्वागत कर रही हूँ.
मेरा नंगा सेक्स कहानी के पिछले भाग
गैरमर्द से चुदाई की लालसा
में अब तक आपने पढ़ा था कि एक गैरमर्द का मस्त लंड मेरी चुत में लार टपका रहा था.

अब आगे मेरा नंगा सेक्स:

इस कहानी को सुन कर मजा लें.

मैं तो उस खड़े लंड को अपनी चुत में लेने के लिए बेकरार हो उठी. मेरा कामातुर मन काबू में न रहा और मैंने खुद उठकर उसे सोफ़े पर बैठा दिया.

अब मैं खुद झुक कर उसके 8 इंच से भी बड़े मोटे लंड को बिना हाथ में पकड़े सीधे मुँह में भरने का प्रयास करने लगी.
उसके लिंगदेव उत्तेजना के कारण आसमान को ताक रहा था.

मैं उसके लंड के सुपारे को ही चूसने और चाटने लगी, लंड के नीचे गोलियों को सहलाने लगी.

मेरे हमले से बेचैन होकर उसने हाथ बढ़ा कर मेरी मांसल चुत को भींच लिया. मेरे मुँह से ‘आहह ..’ की आवाज निकल गई.
वो नीचे आकर सीधे मेरी चिकनी कामरस से भीगी चुत को सीधे खाने का प्रयास करने लगा.

उसकी इस हरकत से पहले से कामरस त्यागने को तैयार बैठी मैंने फिर से कामरस त्याग दिया. मैंने भी अपना मुँह खोलकर उसके लंड की अमृत बूंदों को ग्रहण करने का मन बना लिया.

वो एक शरीफ मर्द की तरह अपनी आह निकालता हुआ बोला- मेरा आने वाला है. मुँह हटा लो.
मगर मैं तो पहले से ही उसके लंड की रबड़ी खाने का मन बनाए बैठी थी. इतना शानदार लंड है तो रबड़ी भी मस्त ही होगी. मैं किसी भी सूरत में उसके लंड की रबड़ी को जाया नहीं देना चाहती थी.

मैंने आंखों से उसकी तरफ वासना से देखा और हाथ के इशारे से लंड रस मुँह में छोड़ देने का कह दिया.

उसने भी एक तेज आह के साथ अपने लंड से अमृत कलश छलका ही दिया, जिसे मैंने बड़े चाव से ग्रहण कर लिया.

उसके लंड से पिचकारी मारती धार निकली, जिसे मैंने मुँह खोलकर सीधे अन्दर ले लिया और लंड के रस को स्वाद के साथ चखने लगी.
एक के बाद एक सात आठ पिचकारी निकलने के बाद उसका लंड अपनी उत्तेजना को मेरे मुँह में खत्म कर चुका था.
मैंने उसके लंड के अमृत की कुछ बूंदें, जो इधर उधर मेरे मम्मों पर बिखर गई थीं, को अपनी उंगली से उठा कर चाट लिया.

वो निढाल सा कामवासना से भरी आंखों से मेरी तरफ देख रहा था.
मैंने अपनी मस्ती में उसके लंड को चाट-चाट कर साफ कर दिया.

अब मैं उसके सीने पर सर रखकर चौड़ी छाती पर उगे बालों को अपने होंठों से पुचकार रही थी; सीने पर हाथ फिराकर अपने प्रेम का लेपन कर रही थी. उसके हाथ मेरे मस्तक से होते हुए मेरे गेसुओं को सहला रहे थे. ऐसा उपक्रम कुछ लंबे समय तक चला.

फिर धीरे-धीरे उसके हाथ मेरे उरोजों तक पहुंचने लगे. वो मेरे निप्पलों पर उंगलियों से जादू सा करने लगा.

उसका लंड, जो अब तक अर्धमूर्छित था, फिर जोश में भर गया. अब उसका तना हुआ विशाल लंड मुझे चुभने लगा.

मैं भी अब चुदाई के लिए तैयार हो रही थी. मेरी गेहुंए रंग की चिकनी त्वचा और सुडौल काया उसे फिर से कामातुर कर गई.

मेरी कमर पर हाथ रखकर उसने मुझे उसकी ओर खींचा और सबसे पहले मेरी गर्दन पर चुंबन अंकित किया. फिर मेरे शानदार उरोजों पर मुँह लगाते हुए हाथ पीछे ले जाकर मांसल उभरे नितंबों को सहलाने लगा.
मैं उसका पूरा साथ देने लगी.

फिर मैंने उसके लंड को खुद ही संभाला और अपनी चिकनी चुत पर घिसने लगी.
चुत में कामरस का रिसाव पहले ही हो चुका था, जो लंड को चिकनाई प्रदान करने लगा था.

गर्म लंड चुत से लगा तो मेरी बेचैनी बढ़ गई थी.

उसने मेरे पैरों को उसके ऊपर खींचा, मुझे समझते देर नहीं लगी और मैंने अपने दोनों पैर उसके चेहरे के दोनों ओर डाल दिए और खिले हुए फूल की भांति सुंदर सांस लेती चुत को उसके मुँह पर टिका दिया.
उसने भी इस बार अलग सुख पहुंचाने के उद्देश्य से चुत में उंगली घुसेड़ दी और अपनी जीभ को चुत से लेकर गांड तक सैर करने लगा.

मेरे शरीर की थिरकन मेरे आनन्द की सीमा का बखान कर रही थी.

अब उसने मेरी चुत के दाने पर जीभ चलानी शुरू कर दी और मेरी चिकनी गांड पर दो चपत रसीद कर दीं. साथ ही चुत में दो उंगलियां डालकर मेरी वासना को और बढ़ाने का प्रयत्न करने लगा.
मेरा लंड चूसने का तरीका भी उग्र हो गया था.
हम दोनों की ही बेचैनी चुदाई के लिए चरम पर आ गई थी.

उसने मुझे जमीन पर लिटा दिया. उसने मेरे दोनों पैर हवा में उठाकर अपने हाथों में थाम लिए.

उसने लंड को चुत में सैट करने का कार्य मुझे सौंप दिया.
मैंने उसके मोटे अकड़ू लंड को अपनी चुत के छेद में सैट कर लिया.

मेरी चुत पहले ही रस बहाकर चिकनी और चिपचिपी हो चुकी थी, इसलिए चुत के मुहाने पर लंड का सुपारा रखते ही चुत ने मुँह खोलकर लंड का स्वागत किया.

मैंने ‘आहहह .. इह ..’ की मधुर ध्वनि के साथ लंड को अपने अन्दर समाहित करने का प्रयत्न किया. उसने झटके से लंड नहीं पेला .. बल्कि सिर्फ सुपारे को ही कुछ देर चुत के अन्दर बाहर किया, जिससे मैं और तड़प उठी.

मेरे मुख से स्वतः ही ‘ईस्स .. आहहह ..’ की मादक ध्वनि निकल पड़ी और मैं स्वयं कमर को उछालने का प्रयत्न करने लगी.

अब उसकी बेचैनी भी शवाब पर थी, तो उसने लंड को पूरा का पूरा एक साथ ही चुत की जड़ में बैठा दिया.
और ऐसा करते वक़्त हवा में उठे मेरे पैर मेरे ही चेहरे की ओर दबा दिए, जिससे चुत और भी उभर कर लंड लेने के लिए सामने आ गई.

लंबे मोटे लंड को पूरा ग्रहण कर मैं मजे और दर्द से कराह उठी.

मस्त चुदाई का दौर चल पड़ा.

मैंने चुदाई के झटकों से हिलते अपने नायाब स्तनों को स्वयं अपने हाथों से संभाल रखा था. मैं अपने निप्पल भी खुद ही उमेठ रही थी.

मेरी शानदार मखमली अनुभवी चुत पाकर लंड भी बावला हो गया और इसी बावलेपन ने बवाल ही मचा दिया.
उसने तेज़ धक्कों के साथ चुदाई की गति बढ़ा दी.

मेरे मुख से भी कामुक ध्वनियां निकल रही थीं.

दो अनुभवी बदन जैसे जैसे प्यास बुझाते रहे, त्यों त्यों प्यास भी बढ़ती चली गई. चुदाई का खेल चरम रोमांच पर था.
वो लंड को पहले चुत के मुहाने तक खींचता था, फिर उसी तेज़ी से जड़ तक समाहित कर देता था.
उस वक़्त हर धक्का, हम दोनों को ही खुशियों से सराबोर कर रहा था. चुदाई की रेल सरपट दौड़ने लगी थी.

‘आहहह .. उउउहह .. ईईईहहह .. मर गई रे .. चोद दे मुझे .. आह और चोद … यस फक मी हार्ड .. कम ऑन ..’
ऐसे अनेक शब्द मेरे मुख का शृंगार कर रहे थे.

हम दोनों की आंखें कामवासना से लाल हो चुकी थीं.
हम दोनों एक बार स्खलित हो चुके थे इसलिए अबकी बार कोई भी जंग को समाप्त नहीं करना चाहता था.

उसने घचाघच घचाघच चुदाई करते हुए मेरी चुत की बखिया उधेड़ दी.
मैंने अंग्रेजी में ‘फक मी हार्ड .. फक मी हार्ड ..’ की रात सी लगा दी.

‘ओहह आहह यू आर बेस्ट फकर ऑफ दी वर्ल्ड ..’ कहते हुए उसने मेरे उरोजों को ज़ोरों से भींच लिया.

मैं झड़कर शिथिल होने लगी. मैंने अपना अमृत बहा दिया था.
चुत से अब फच फच खच खच खच की आवाज आने लगी थी. उसने मेरे झड़ने के बाद भी चुदाई जारी रखी थी.

विकी ने अब मुझे अपने ऊपर बैठा लिया, मैंने खुद उसका लंड अपने चुत के ऊपर सैट कर लिया.
थोड़ी देर मैं लंड के ऊपर घोड़ी की तरह उठने बैठने लगी लेकिन उसकी जबरदस्त चुदाई के वजह से मेरी टांगों ने जल्द ही जवाब दे दिया.

वो अब भी जबरदस्त चुदाई में लगा हुआ था. उसने मेरे उछलते उरोजों को थाम लिया और दबाने लगा.

मैं तो जैसे सातवें आसमान में उड़ रही थी. एक हाथ से मेरी कमर को थामकर उसने मुझे उसके ऊपर झुका लिया.
उसकी मंशा को समझते हुए मैंने उसके होंठों पर चुबनों की बौछार लगा दी.
अब हम दोनों एक दूसरे की जीभ चूसते हुए डीप स्मूच करने लगे.

परिणाम वश उसका लंड और जबरदस्त चुदाई करने लगा, जो और अन्दर तक जाकर मुझे अपरिमित आनन्द का अनुभव दे रहा था. चुंबन के वजह से उसका लंड और विशालकाय हो गया था और उसे मैं पूरा महसूस कर पा रही थी.

मैं फिर से ‘आहह .. आउच .. आहह .. फक मी .. फक मी हार्डर ..’ कहने लगी.

मेरा धैर्य मेरा साथ छोड़ने लगा, शरीर में थिरकन के साथ अकड़न आने लगी.

मेरे शब्द उसे और वहशी बना रहे थे, उसका भी शरीर अकड़ने लगा, उसके पैरों के कंपनों को मैं महसूस कर रही थी. लंड सुरसुराने लगा और उसके लंड ने तेज़ पिचकारी छोड़ना चालू कर दिया.

‘आहह .. आहह …’

उसके वीर्य की हर एक बूंद को मैं महसूस कर पा रही थी. मुझे ऐसा लग रहा था, जैसे किसी बंजर खेत में बारिश हो रही थी.

मेरी चुत उसके वीर्य से लबालब भर गई. मैं थककर उसके ऊपर ही निढाल होकर गिर गई.

हम दोनों ने ही असीम आनन्द को प्राप्त कर लिया था और दोनों थक गए थे.

उसने मुझे अपने आगोश में भर लिया. मेरी चुचे उसकी छाती पर दब से गए.

थोड़ी देर बाद सांसों के सामान्य होने के बाद मैंने उसकी तरफ चेहरा उठाकर देखा, वो भी मेरी नजरों में नजर मिलाकर मुस्कुराने लगा.
हमारे होंठ आपस ही जुड़ गए और हम डीप स्मूच करने लगे.

मैंने उसका शुक्रिया अदा करते हुए कहा- बहुत सालों बाद मैं इतनी चुदी हूँ. थैंक्यू.
‘योर वेलकम डार्लिंग.’

फिर हम दोनों उठाकर वॉश लेने चले गए, जहां और एक बार अपने प्यार का इजहार कराते हुए डीप स्मूच किया.
वक़्त की नजाकत को देखकर हम दोनों फटाफट तैयार हुए और अपनी अपनी बेटियों की स्कूल से पिकअप करने एक के पीछे एक घर से निकल गए.

और हां जाते जाते फिर मिलने का एक दूसरे से वादा भी ले लिया.

पति के साथ तो मैंने उनके गुजर जाने के काफी पहले से ही चुदाई करना बंद कर दी थी.

दोस्तो, हम दोनों का प्रेम विवाह जरूर था, पर समय के चलते हमारा वैवाहिक जीवन निरंतर खराब होता चला गया था.
हमारी बेटी ही थी, जिसकी वजह से हम दोनों एक दूसरे का साथ निभा रहे थे.

आज उसने पश्चात किसी गैर मर्द से चुदाई करना कितना सही था .. और कितना गलत .. यह मैं समझ नहीं पा रही थी. शायद अपनी इच्छा को मैं पूर्णरूप दे रही थी.

अब तो हम दोनों मेरे घर पर कई बार मिलने लगे. कभी हफ्ते में 2 बार, तो कभी एक बार, कभी कभी लगातार.

उस सब चुदाई की कहानी के बारे में भी मैं अगली सेक्स कहानी में लिखना जारी रखूंगी.

दोस्तो, आपको मेरा नंगा सेक्स कैसा लगा? आप मुझे जरूर प्रतिक्रिया के रूप में या मेरी ईमेल आईडी पर जरूर बताना.
[email protected]

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