एक उपहार ऐसा भी- 24

(Ek Uphar Aisa Bhi- Part 24)

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दोस्तो … अब तक आप मेरे और नेहा के बाथरूम सीन को पढ़ रहे थे. नेहा पूरी नंगी होकर मेरे साथ बाथटब में थी. मैं उसकी चुत देख रहा था.

अब आगे की सेक्सी नंगी चुदाई कहानी:

उसकी चूत के होंठ थोड़े बाहर की ओर खुले हुए से थे, जिसे देखकर लगा कि वो मुझे चुंबन का आमन्त्रण दे रहे हैं. ऐसा आमन्त्रण ठुकराने की गुस्ताखी भला मैं कैसे कर सकता था.

मैंने नेहा के दोनों पैरों को थोड़ा फैलाया, नेहा ने शरमा कर अपनी हथेलियों से चेहरा ढक लिया.

उसकी शर्मोहया ने आग में घी डालने का काम किया और मैंने लपक कर चूत की पप्पी ले ली. जी हां, मैंने चुंबन नहीं किया और ना ही किस किया. ऐसी जगह पर प्रेम से होंठों की छुअन, पप्पी ही कहलाती है.

मैंने उस वक्त उसकी प्यारी सी चूत को देखकर दुनिया भुला दी. मेरे बदन में गर्मी इस तरह बढ़ गई कि मेरी गर्मी से टब में भरा पानी भी गर्म होने लगा.

मैंने प्यार से उसकी जंघा पर हाथ फेरा और अपना मुँह उसकी चूत में टिका दिया. मैंने पहले ही वार में जीभ बाहर निकाली और चूत की पूरी लम्बाई, जीभ से ही नाप डाली.

ईस्स्स … की मधुर आवाज और बदन की सिहरन के साथ ही नेहा के रोम रोम का झंकार बाथटब के जल को तरंगित कर गया.

मैंने दूसरा तीसरा चौथा पांचवां और फिर कई प्रहार चूत पर कर डाले. कई बार पप्पी ली और उसके दाने को चुभला लिया. फिर जीभ से उसके होंठों को पूरा फैलाकर नीच से ऊपर तक मसाज दे डाली.

नेहा की तप्त देह उसके संकोच पर भारी पड़ने लगी. नेहा ने अपने एक हाथ से वक्ष का भूगोल संभाल लिया और दूसरे हाथ से मेरे बालों को सहलाने लगी.

मैंने चूत चाटने की अपनी कला का पूरा और उग्र प्रदर्शन किया और जीभ को नुकीला बनाकर उसकी चूत के अन्दर तक धकेलने लगा.

आहह … उहहह … की आवाज स्वतः गूंजाएमान होने लगी.

कुछ देर तक मेरे इस स्नेहिल चूत चुसाई के बाद नेहा अकड़कने थरथराने लगी. उसके तन की कंपन और बड़बड़ाहट ने संकेत कर दिया कि नेहा झड़ने वाली है.

मैंने भी अपनी जिह्वा की गति तेज कर दी और नेहा के अमृत कलश को अपने मुँह में खाली करवाने लगा. नेहा मेरे बालों पर ऐसे हाथ फिरा रही थी, मानो मेरा अहसान उतारने का प्रयत्न कर रही हो.

नेहा ने जरूर अपना रस त्यागा था, पर चुदाई का समापन नहीं था … ये तो शुरूआत थी.

उसको डिस्चार्ज के बाद थोड़ी शांति और थोड़े विश्राम की आवश्यकता थी, तो मैंने उसे बाथटब में अपने साथ खींच लिया.

अब नेहा और मैं दोनों ही पानी में थे. नेहा ने मेरे सीने पर अपना सर रख दिया और इत्मिनान से आंखें मूंद ली. नेहा से वार्तालाप का मेरा बहुत मन था, पर मैंने उसे शांति से लेटे रहने दिया.

किन्तु कुछ ही देर ऐसे लेटे रहने के बाद नेहा ने मेरे फौलादी सीने और उसमें आच्छादित बालों को सहलाते हुए कहा- मैं एक बात पूछूँ?
मैंने भी कहा- हां पूछो न!
नेहा ने कहा- क्या तुम सभी को इसी तरह संतुष्ट करते हो … या फिर तुम्हारे लिए मैं कुछ खास हूँ?

अब अगर मैं कहता कि सारी महिलाएं मेरे लिए खास हैं, तो उसे बुरा लगता और मैं उससे झूठ बोलना नहीं चाहता था. सो मैं खामोश रहा.

फिर नेहा ने ही कहा- उन्हहह सॉरी … मैं भी क्या पूछ बैठी. खैर छोड़ो इस बात को. लेकिन एक बात तो सच है कि तुम्हारा अनुभवी प्यार किसी का भी दिल जीत सकता है.
मैंने मजाक से कहा- सिर्फ दिल जीत सकता है? और चूत नहीं जीत सकता क्या?

तो नेहा ने मेरे सीने को चूम कर कहा- हां सिर्फ दिल जीत सकता है. क्योंकि तुम्हारा प्यार पाकर चूत तो हार जीत छोड़कर तुम्हारी गुलामी करने लगेगी.
मैंने हंस दिया और कहा- तो मेरी गुलाम चूत को कहो कि अभी मेरे लंड महाराज की सेवा बाकी है.
नेहा ने कहा- अरे हां … मैं और मेरी चूत तो स्वार्थी हो गए थे.

उसने ऐसा कहते हुए पानी के भीतर ही मेरा लंड सहलाना शुरू कर दिया.

उसने लंड को मुट्ठी बांध कर पकड़ा और मेरी आंखों में देखकर कहा- सच में संदीप … तुम और तुम्हारे लंड पर मैं अपना पूरा जीवन वार दूँ … तब भी कम है.

मैंने जवाब में उसको प्यार से चूम लिया. और थोड़ा नीच को सरक कर उसके होंठों पर अपने होंठ लगा दिए.

हम दोनों लिपलॉक फ्रेंच किस में मग्न हो गए और साथ ही एक दूसरे के पानी में भीगे बदन को सहलाने लगे.

मेरे लिए बाथटब में रोमांस करना भी एक नया अनुभव था, नेहा किसी जलपरी की भांति मुझसे लिपटकर छटपटा रही थी.

पानी भी इस तरह के छिपक छपाक में हमारे संग मदहोश होकर नृत्य करने लगा था … मानो उसे भी मजा आ रहा हो.

मैं इस सुहाने पल में उस जलपरी के चिकने बदन के हर हिस्से को छूकर उसके मखमली अहसास को अपनी अंतरात्मा में बसा लेना चाहता था.

मैं तो उत्तेजित था ही और अब नेहा की उत्तेजना भी फिर से पूरे शवाब पर थी.

मेरा लंड अकड़ और तनाव में दर्द करने लगा, तो मैंने नेहा को थोड़ी देर के लिए खुद से अलग किया और खुद बाथटब के किनारे पर, जहां पहले नेहा बैठी थी, जाकर बैठ गया.

नेहा भी अनुभवी थी. उसे समझते देर ना लगी और वो मेरे सामने बैठ कर विशालकाय लंड के गुलाबी सुपारे को चूमने और चाटने लगी.

उसकी हरकत में अनुभव से ज्यादा बेचैनी झलक रही थी, जो उसके लंबे समय से प्यासी होने का सुबूत थी.

नेहा लंड चाटते हुए नीचे जाकर मेरी गोलियों तक पहुंच जाती और उसे भी चूस चाट रही थी. मैंने मदहोशी में अपनी उंगलियों को नेहा के बालों में फंसा लिया और उसे खींचते सहलाते हुए नेहा का भी सपोर्ट करने का प्रयत्न करने लगा.

सेक्सी नंगी चुदाई

नेहा ने बड़ी बेचैनी से लिंग को कुछ देर और चूसने के बाद मुझे हाथ खींचकर बाथटब के अन्दर बिठा लिया.

मैं बाथटब के अन्दर एक कोने से टिक कर बैठ गया. जिससे मेरा आधा शरीर पानी के अन्दर चला गया और मेरा आधा शरीर पानी के बाहर ही रह गया.

अब नेहा ने अपनी नशीली आंखों को मेरी आंखों से मिला दिया और खुद मेरी गोद में बैठ गई. फिर उसने अपनी कमर को थोड़ा उठा कर अपनी प्यारी चूत के छेद पर लंड का सुपारा सैट किया और आंख मूंद कर लंड पर बैठती चली गई.

हम दोनों कमर तक पानी के अन्दर थे, तो जाहिर है लंड चूत का मिलन अंडरवाटर ही हो रहा था. आप सबको ये जान लेना चाहिए कि चूत जब पानी में हो, तो उसकी चिकनाई धुल जाती है और इस वजह से चूत बहुत टाईट हो जाती है.

नेहा की चूत भी बहुत टाईट हो गई, नेहा ने कमर को नीचे करते हुए लंड तो जड़ तक निगल लिया, लेकिन दर्द और मजे से दोहरी हुई नेहा ने अपने होंठों को अपने ही दांतों से काट लिया.

उसके इस मादक अंदाज ने मुझे भी आनन्द की नई हदों से रूबरू कराया. और मैंने अपने चेहरे के सामने लहराते उसके उठे हुए एक निप्पल को अपने मुँह में भर लिया.

अब चुदाई की शुरूआत हो चुकी थी, नेहा उछल-उछल कर लंड ले रही थी और टब का पानी उसके साथ ताल मिलाते हुए उसके सर के ऊपर तक उछल रहा था.

चुदाई तो बहुत ही शानदार और मजेदार हो रही थी, पर इस चुदाई में गति प्राप्त कर पाना संभव ना था. इसलिए मैंने नेहा को कुछ देर के लिए रोक कर टब के अन्दर ही खड़े होकर किनारे पर पैर रखकर खड़े होने के लिए कहा.

फिर मैंने उसके पीछे खड़े होकर उसकी चूत में लंड पेल दिया. पहले झटके में आधा लंड चूत में पेवस्त हो गया. अगले झटके में गोलियां तक चूत के ऊपर टकरा गईं.

‘ईस्स्सस और उई मां …’ की मधुर ध्वनि आलीशान बाथरूम में हमारी शानदार चुदाई की कहानी कह गई.

अगले कुछ लम्हे, मैंने गति नहीं बढ़ाई और उसकी पीठ कंधे सहलाते हुए और कूल्हों को दबाकर नेहा उत्तेजना बढ़ाता रहा.

जब नेहा ने खुद कमर को पीछे धकेलना शुरू कर दिया, तो मैंने भी उसकी बेचैनी समझकर चुदाई की गति बढ़ा दी.

मैंने नेहा की सुडौल और आकर्षित करने वाली कमर को कसके पकड़ लिया और लंड को चूत से पूरा बाहर खींच कर पूरा अन्दर तक धकेलने लगा.

हम दोनों के ही मुख से आनन्द और तृप्ति की ध्वनि लय बद्ध बहने लगी थी. चुदाई के दौरान उसकी जंघा और कूल्हों से मेरी जंघा और शरीर के टकराने वाली थाप और भी मनमोहक लग रही थी.

सामने लगे आईने पर नेहा के निरंतर लयबद्ध हिलते स्तनों ने मेरी कामवासना को और बढ़ा दिया.

इस शानदार चुदाई से हमारे बदन का पानी वाष्प बनकर उड़ चुका था. अब बाथरूम में काम काम और काम वासना के अलावा कुछ और नहीं था.

पर हमारी शानदार जानदार चुदाई को नेहा की प्यासी जवानी ज्यादा देर तक बर्दाश्त नहीं कर सकी.

नेहा बहकने लगी. बड़बड़ाने लगी … कांपने लगी. थरथराने लगी. और उसने अपना कामरस त्याग दिया.

पर मैं कहां रूकने वाला था, मैंने चुदाई को निरंतर जारी रखी. जब नेहा झड़ रही थी, तब भी मैं नियमित गति से चुदाई कर रहा था. मेरे लंड में दर्द हो रहा था, पर मैं झड़ने का नाम नहीं ले रहा था.

कुछ देर मैंने और प्रयत्न किया … पर झड़ ही ना सका. तब मैंने अपनी बेबसी नेहा के सामने रखी.

मैं- यार, मेरा हो ही नहीं रहा है … मैं क्या करूं?

तब नेहा ने मुझे रोका और मुझे टब से बाहर निकाल कर किनारे में बैठ जाने को कहा. वो खुद सामने बैठ गई.

उसने मेरी आंखों में देखकर कहा- दिन-रात चुदाई करोगे तो गगरी भी खाली हो ही जाएगी.

मैंने शर्म से नजरें झुका लीं, क्योंकि नेहा को मैं वफा देना चाहता था. पर उसने मेरी बेवफाई जान ली थी.

मेरा उतरा हुआ चेहरा देखकर उसने कहा- आप शर्मिदा ना हों. होटल में रहकर मैंने बहुत कुछ देखा सीखा है. संदीप आप बहुत अच्छे हैं. आपकी मजबूरी या खुशी ये आप जानें. मैं तो बस आपका साथ पाकर ही निहाल हो गई हूँ. और अब देखो मैं इस शैतान को कैसे शांत करती हूँ.

ये कहते हुए उसने मेरे लंड के सुपारे को लॉलीपॉप की तरह चूसना शुरू किया. साथ ही उसने लंड को जड़ से पकड़ कर जर्क करना शुरू कर दिया.

उसने लंड को बहुत स्पीड से हिलाना जारी रखा. मेरे आनन्द में और इजाफा हो गया, जब उसने जर्क करते हुए लंड में अपने मुँह से बहुत सारा थूक उड़ेल दिया और मेरी गोलियों को चूस लिया.

मैं उसके इस तरह के प्रहार से भी बड़ी मुश्किल से झड़ने की कगार पर पहुंचा. फिर मैंने नेहा के सर को थाम कर लंड जड़ तक उसके मुँह में ठेलने की कशिश की. नेहा ने भी पूरा साथ दिया.

शायद वो मेरी इस हरकत से दर्द और तकलीफ में थी, जिसका अनुमान मुझे झड़ने के बाद उसकी आंखों में आंसू देखकर हुआ.

मैंने अपना कामरस उसके मुँह में ही त्याग दिया था, जो सीधे ही उसके हलक से नीचे उतर गया और जो बचा हुआ अमृत उसके चेहरे पर फैला था, उसे उसने हाथों से पौंछ लिया.

नेहा की शानदार चुदाई से मैं पूर्ण तृप्त था. नेहा ने खुद को साफ किया और मैंने भी खुद पर पानी डालकर स्नान को अंतिम रूप दिया. फिर दोनों कमर में आ गए.

हम कुछ देर एक दूसरे से चिपके रहे. इस तरह से सेक्सी नंगी चुदाई का समापन हुआ.

पर नेहा को समय का पूरा ख्याल था, उसने कहा- बहुत देर हो गई है. अब मुझे चलना चाहिए … और आपको भी तो संगीत कार्यक्रम में शामिल होना है ना!

उसने अपने कपड़े पहने और लंबा चुंबन देने के बाद अपनी जेब से लिपस्टिक निकाल कर लगाई. फिर वो मिलने का वादा करके और वादा लेकर ऐसे चली गई जैसे कुछ हुआ ही ना हो.

अब मैंने आधे घंटे की हल्की झपकी ली. और फिर संगीत में जाने के लिए तैयार होने लगा.

कामुक और वासना भरे इस खेल में कई मुकाम आने बाकी हैं. सेक्सी नंगी चुदाई स्टोरी जारी रहेगी आप अन्तर्वासना के साथ बन रहें.

प्रेम हदें नहीं जानता रिश्ते नहीं मानता, मैंने भी नहीं सोचा था कि मुझे प्रेम करने का इतना अवसर मिलेगा और इतनी खूबसूरत प्रेमिकाएं मिलेंगी, खैर किस्मत और ईश्वर की मर्जी को कौन जानता है. कब चमक जाए. आप सबको मेरी किस्मत कैसी लग रही है, आप अपनी राय मुझे इस पते पर दे सकते हैं.
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सेक्सी नंगी चुदाई कहानी जारी है.

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