एक उपहार ऐसा भी-17

(Ek Uphar Aisa Bhi- Part 17)

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साथियो, अब तक आपने पढ़ा था कि 3 कालगर्ल्स अनीता और भावना के साथ साथ काव्या को भी चुदाई के सुख से रूबरू करवाने के बाद मुझे प्रतिभा दास से मिलने की जल्दी होने लगी थी.

अब आगे की शादी में चुदाई की कहानी:

मैंने उनसे समय निकालकर फिर मिलने की बात कही और जल्दी से वैभव के पास चला गया.
फिर शादी के मंडप में पहुंचने की बात उससे कही, तो वैभव ने भी घड़ी देखते हुए कहा- हां तुम काफी लेट हो चुके हो. पर लंच करके जाते तो अच्छा रहता.

मैंने आंख मारते हुए कहा- अभी जो खाया है … उसी से पेट भर गया.
इस पर वैभव ने तंज कसा- किसी की जान तो नहीं निकाल दी है ना!
मैंने कहा- खुद जाकर पूछ लो … या प्रतिभा से पूछ लेना!

इस पर वैभव को प्रतिभा की याद आ गई.
उसने कहा- भाई, अब मेरी जान तुम्हारे हवाले है. उसका ख्याल रखना.

मैंने भी वैसा ही वाक्य दोहराया और मुस्कुराते हुए वहां से निकल आया. मैं यकीन से कह सकता हूँ कि वैभव मेरी बात नहीं समझा होगा.

मैं उसे खुशी का ख्याल रखने कह रहा था. फिर खुशी की ही याद में कब कुछ मिनट गाड़ी में गुजरे और मैं पहले वाले होटल में पहुंच गया, इसका पता ही नहीं चला.

उधर पहुंचकर देखा कि होटल के नीचे वाले बड़े हॉल में मंडप सज गया था और एक कोने पर खूबसूरत सा स्टेज भी तैयार था. ये सब सुबह नहीं था, पर आज से शादी शुरू हो रही थी, तो तैयारियां भी अंतिम रूप में होने लगी थीं.

वहां पहुंचते ही मेरी नजर सजावट और पंडाल के अलावा लाल रेग्जीन के सोफे पर बैठी खुशी पर पड़ी. उसने भी मुझे देख लिया और नाराज होने जैसा मुँह बनाने लगी.

शायद उसकी ये नाराजगी मेरे देर से पहुंचने की वजह से थी. सर से पांव तक हल्दी में नहाई अप्सरा का अंग-अग दमक रहा था. उसकी मुस्कुराहट और अदा बिजलियों पर भी बिजली गिरा रहे थीं.

खुशी ने सफेद रंग की छोटी कॉटन साड़ी और सफेद रंग की स्लीवलेस ब्लाउज पहन रखा था, जो अब हल्दी लग जाने से पूरी तरह पीले रंग की हो चुकी थी, साड़ी घुटनों तक ही थी. उसको जूड़े, हाथों और गले पर फूल के आभूषण पहनाये गए थे. ये आजकल ट्रेंड में है, इस तरह खुशी और भी प्यारी और निखरी हुई लग रही थी. मैं तो मन्त्र-मुग्ध होकर उसे निहार रहा था.

तभी दो बच्चे आए और मुझसे कोट उतार कर देने को कहा.
मैंने पूछा- क्यों?

तो सामने से पायल की बड़ी बहन आंचल ने कोट उतार कर देने का इशारा किया.

आंचल शरीफ थी. तो मैंने आंख मूंदकर भरोसा करते हुए अपना कोट उतार कर दे दिया … लेकिन आज तो आंचल भी साजिश में शामिल थी.

मेरे कोट उतारते ही पीछे से पायल ने मेरे गालों पर हल्दी लगानी चाही. पर उसके हाथ पूरी तरह पहुंच ना सके, तो हल्दी मेरे गले तक ही लग सकी.

फिर सुमन और प्रतिभा भी हमले पर उतर आईं. सुमन ने सामने से मेरा हाथ पकड़ कर नीचे खींच लिया.
और जब मैं थोड़ा झुका, तो प्रतिभा ने मेरे चेहरे पर जमकर हल्दी का लेप लगा दिया.

अचानक हमले से मैं हड़बड़ा गया, पर सभी खिलखिला कर हंसने लगे. अब मैंने भी हल्दी का लेप ढूंढना चाहा क्योंकि मुझे भी तो बदला लेना था.
पर हल्दी का लेप खुशी के पास ही था.

मैं पहले उसके पास गया और थोड़ा लेप खुशी पर लगाया. वैसे लेप लगाने के पहले मैंने आंचल की तरफ देख कर इशारों में ही स्वीकृति ले ली थी. मैंने खुशी के दोनों पैरों पर, फिर हाथों पर, फिर गालों पर थोड़ी थोड़ी हल्दी लगाई और धीरे से हैप्पी हल्दी बोलकर वहां से हटने लगा.

वहां पर एक बहुत बूढ़ी महिला बैठी थीं, जो शायद खुशी की दादी थीं. उन्होंने झट से आंचल से पूछा- ये कौन है?

तो आंचल ने उनके कान में कुछ बताया, इस पर दादी मुस्कुरा उठीं. उन्होंने मुझे पास बुलाया और जमके हल्दी लगा दी. मैंने भी उनको एक टीका लगाया और आशीर्वाद लिया.

ये सब देख कर आंचल कुछ ज्यादा ही हंस रही थी.
और मैंने देखा कि उसके ऊपर हल्दी भी कम लगी है.
तो मैंने बहुत सा लेप उठाया और उसे लगाने की कोशिश की.

पर आंचल बहुत फुर्तीली निकली. वो ‘आउउउच..’ की आवाज करते हुए वहां से भाग निकली.

मैंने उसे दौड़ाने का प्रयास किया, पर मेरे हाथों पायल आ गई. मैंने उसको रगड़ रगड़ कर हल्दी लगाई और इसी बहाने उसके कंधे गले और गालों को अच्छे से सहलाया भी.

आंचल दूर से मुझे जीभ दिखाकर चिढ़ा रही थी. अब तक गंभीर अंदाज में ही रहने वाली आंचल आज कैसे नटखट हरकतों पर उतर आई थी, ये समझ से परे था.

फिर मैंने सुमन को पकड़ा और वहीं मुझे प्राची भाभी भी नजर आईं, तो मैंने मौका नहीं गंवाते हुए उन्हें भी जम कर हल्दी लगाई और इसी बहाने उसके गोरे नाजूक बदन को अच्छे से सहलाया. भाभी ने मेरे ही हाथों से हल्दी लेकर मुझे लगाया और मुस्कुरा कर प्रेम वर्षा की.

मैंने प्राची भाभी की मदमस्त जवानी को पिछली रात चखा था, जिसका स्वाद मैं कभी नहीं भूल पाऊंगा, ये किस्सा भी इस कहानी के पिछले एक भाग में प्रकाशित है.

फिर अंत में प्रतिभा मेरे हाथ आई, मैंने प्रतिभा को भी खूब हल्दी लगाई और फिर बहाने से उसके बोबे भी दबा दिए. उसने ‘आउच्च…’ कहा और हंस कर चली गई.

तब तक आंचल अपने हाथों में हल्दी लेकर मेरे सामने आ गई और हाथ आगे बढ़ाते हुए कहा- लीजिए आप भी हल्दी लगा लीजिए.

मैं मुस्कुराते हुए हल्दी उठाने ही वाला था कि आंचल ने सारी हल्दी मेरे बालों और गालों पर लगाई और भागने लगी.

मैं उसक पीछे भागने लगा … पर पहुंच ना सका. वो भागते हुए हॉल से बाहर की ओर निकली. मैंने दरवाजे पर उसको दबोच लिया. पर आंचल तो बच निकली थी और मैंने अन्दर आती हुई नेहा को पकड़ लिया था.

नेहा होटल वाली वही लड़की थी, जिसका जिक्र मैंने चुदाई करते हुए पहले किया था. उसे मेरे कारण खुशी से डांट भी पड़ी थी.

नेहा अभी भी उदास थी और मैं खुशियों का जश्न मना रहा था. उसकी उदासी देख कर मैं शर्मिदा हो गया और मैंने नेहा को छोड़ दिया. नेहा तो चली गई और आंचल ने फिर मुझको चिढ़ाना शुरू कर दिया.

पर अबकी बार मैं मुस्कुरा कर रह गया. क्योंकि मेरा ध्यान अब नेहा पर चला गया था. पर भीड़-भाड़ वाली जगह पर आप किसी एक पर ध्यान केन्द्रित कर सको, ऐसा कहां संभव है.

दो पल में ही पायल आई. उसने मेरा कोट मुझे पकड़ाया और मेरा हाथ पकड़कर मुझे खाने की स्टॉल की तरफ ले जाने लगी. वो मुझसे ऐसे व्यवहार कर रही थी, जैसे मैं उसके बचपन का साथी हूं.

उसने कहा- चलिए, जल्दी से खाना खा लीजिए … शरीर में ताकत रहेगी तो काम आएगी. आज मैं आपको निचोड़ कर रख दूंगी.
मैंने कहा- आज ही निचोड़ डालोगी?
तो उसने माथा पीटते हुए कहा- कभी कभी तो बड़े भोले बन जाते हो और कभी कभी घटिया किस्म के ठरकी लगने लगते हो. अभी मेंहदी की रस्म के समय डांस की प्रैक्टिस करनी है. मैं उसकी बात कर रही थी.

मैंने हंस कर कहा- तो पूरी बात किया करो ना … अधूरी बातों में कफ्यूजन तो होगा ही!
इस पर उसने कहा- ठीक है आगे से ख्याल रखूंगी, पर अब चलो … वहां आंचल, सुमन और प्रतिभा दीदी खाने पर इंतजार कर रही हैं … और मुझे भी तो बहुत भूख लगी है.

हमने साथ खाना खाया और इस दौरान काफी विषयों पर चर्चा भी हुई, जिससे जान पहचान बढ़ने के अलावा एक दूसरे की रूचि, खासियत, कमजोरी जैसी चीजों को भी जानने का मौका मिला.

आंचल, जो अब तक सिर्फ एक पहेली थी, वो अब सुलझने लगी थी. सुमन बिंदास बाला बनी हुई थी, तो प्रतिभा आवश्यकतानुसार खुल रही थी. और पायल को तो अब तक आप समझ ही गए होंगे.

खाना समाप्त करने के बाद हमने कुछ देर आराम करके फिर हॉल में ही मिलने की बात कही.

सुमन प्रतिभा और मेरा कमरा लगा हुआ था, इसलिए हम एक साथ जाने लगे.
तो पायल ने फिर मेरे पास आकर कान में कहा- अपना कमरा नम्बर याद तो है ना, कहीं दूसरे के कमरे में नहीं चले जाना!

मैंने मुँह बनाकर एक्टिग करते हुए कहा- वैसे क्या है मेरा कमरा नम्बर?
पायल ने कहा- हा हा … जाओ जहां जाना है … वहां जाओ, मेरा दिल भी रखने के लिए कुछ अच्छा नहीं बोल सकते.

उसकी बचकानी हरकत मेरे दिल को और गुदगुदा गई. मैंने कहा- मुझ अपना कमरा भी याद है और पायल भी.
वो मुस्कुरा कर पलट गई और मैं कुछ कदम आगे बढ़ चुकी प्रतिभा सुमन के पीछे चुपचाप चल पड़ा.

कमरे तक पहुंचकर सुमन जल्दी से अन्दर चली गई, शायद उसे बाथरूम जाने की जल्दी थी.

प्रतिभा को अकेला पाकर मैंने कहा- तुम बहुत ही खूबसूरत हो प्रतिभा, मेरी किस्मत की लकीरों में तुम्हारा नाम भी लिखा होगा मैंने सोचा भी ना था. जब से तुम्हें देखा है, मैं भगवान को इस कृपा के लिए धन्यवाद ही दे रहा हूँ.
उसने कहा- आप बातें बहुत अच्छा बनाते हैं. वैसे मुझे भी बहुत कुछ कहना है, पर मैं मिलन के अनमोल क्षणों को और भी खुशनुमा होने देना चाहती हूं. आप प्रतिभा की प्रतीक्षा करो, वो निशा के साथ तुम्हारे पास आएगी.

अब मेरा दिमाग चकरा गया. मैंने कहा- उसका नाम तो सुमन है ना?
प्रतिभा ने मुस्कुरा कर कहा- सुमन तो बमौसम बारिश की शिकार हो गई है. वो नहीं आएगी.
तो मैंने दोहराया- फिर और कौन?

इस पर प्रतिभा ने एक लफ्ज भी नहीं कहा और मुस्कुरा कर अपने कमरे में चली गई.
मैं सोचता रहा और अपने कमरे में आकर फ्रेश होने लगा.

फ्रेश होने के बाद मैं यूं ही बिस्तर में लेट गया और पता नहीं कब मेरी नींद लग गई. फिर मेरे फोन की घंटी बजी, तब मेरी नींद खुली. ये फोन प्राची भाभी ने किया था.

फोन उठाने पर भाभी ने कहा- कहां हैं जनाब! नीचे हॉल में सभी पहुंच चुके हैं … बस एक आपकी ही कमी है.
मैंने कहा- मैं बस अभी तैयार होकर आता हूँ.

भाभी ने पूछा- क्या मुझे याद कर रहे थे.
मैंने मस्ती भरे स्वर में कहा- हां यार … वो क्या है, थोड़ी नींद लग गई थी और नींद में तुम्हारे सपने आने लगे थे.
प्राची भाभी ने कहा- चलो टाईम बे टाईम मस्का मत लगाओ, जल्दी से नीचे हॉल में आ जाओ.

मैंने ओके कहा और फोन रख कर तैयार होने लगा.

वैसे भी हम लड़कों को तैयार होने में कितना समय लगता है. कपड़े पहने, डियो लगाया, पावडर क्रीम लगाई, कोई जैल लगाता है, कोई नहीं लगाता. पर मैंने उस दिन लगाई थी … बाल संवारे और जूते पहन कर हो गए तैयार.

वैसे तो मुझे खुद की तारीफ बिल्कुल पसंद नहीं, पर यहां अपने बारे में मैं नहीं बताऊंगा … तो और कौन बताएगा. मेरी कद-काठी आकर्षक तो है ही और चेहरे से भी जेंटल लगता हूं. मुझे अपने हैंडसम होने का घमंड बिल्कुल भी नहीं है इसलिए मुझे तारीफ़ भी ज्यादा मिलती है.

फिर कोट सूट पहनने के बाद तो मैं बहुत ही आकर्षक हो जाता हूँ, साथ ही मेरी कातिल मुस्कान और सहज व्यवहार लोगों को बहुत जल्द मेरा नजदीकी बना देता है.

जब मैं तैयार होकर हॉल में पहुंचा, तो सब हंसी मजाक में लगे थे और सबका ध्यान स्टेज की ओर ही था. वहां कुछ लोग डांस की प्रैक्टिस कर रहे थे, बाकी सब स्टेज के नीचे सोफे चेयर पर बैठ कर मेंहदी लगवा रहे थे.

वैसे शादी में बच्चे और बहुत से अन्य मेहमान भी आए थे, जिनको मैं नहीं जानता था.

अभी तक जिनसे मेरा परिचय हो चुका था, मैं उन्हें ही ढूंढने की कोशिश करता था, पर जिस भी मेहमान की नजर मुझ पर पड़ती थी, वो मुझे नीचे से ऊपर तक जरूर निहारता था.

उसके दो कारण थे … मैं हैंडसम था और उनके लिए अजनबी भी. अगर मैं चाहता, तो शादी में एक दो लड़कियां या भाभियों को और पटा सकता था, पर अति सर्वत्र वर्जयेत …

मैं हौले कदमों से आगे बढ़ रहा था.
तभी आंचल ने मुझे देख लिया और मुझे देखते ही पायल को आवाज लगाई- पायल जल्दी इधर आ!

उस समय ऐसा लगा, जैसे अब तक मेरा ही इंतजार हो रहा था.
पायल लगभग भागती हुई मेरे पास आई और मेरा हाथ पकड़ कर सोफे तक ले गई. मुझे बिठाकर खुद पास वाली सीट पर बैठ गई. वहां पहले से ही कुछ लड़कियां मौजूद थीं, जिनके हाथ में डायरी और पेन थी.

अब पायल ने आंखें नचाते हुए कहा- हां तो समधी जी, कल संगीत पर आप किस गाने में परफार्म करेंगे.

अब तो मेरा गला ही सूख गया, हालत पतली होने लगी. इतनी डींगें मारने वाला संदीप नाच गाने से काफी दूर रहता है. नाचने के नाम पर मैंने आज तक केवल होली और बारातों में ही थोड़ा बहुत डांस किया है.

मैं तुरंत अपनी सीट से खड़ा हो गया और हाथ जोड़ कर कहा- माफ कीजिए … मुझसे ये नहीं होगा!
पर अब तो मैं पायल के कब्जे में था. उसने मेरा हाथ पकड़कर मुझे फिर बिठा लिया और कहा- कुछ तो करना ही होगा समधी जी, आपको ऐसे ही नहीं जाने देंगे.

मुझे तो पसीने आने लगे, तीन रंडियों को एक साथ पेलने की क्षमता रखने वाला संदीप डांस के नाम से कैसे कांप रहा था, ये आप देखते, तो आप लोगों की भी हंसी छूट जाती.

मगर अब तो पायल जिद में आ गई थी.

मैंने कहा- मुझे कुछ नहीं आता यकीन कीजिए … मैं स्टेज पर परफार्म नहीं कर सकता!

वहां बैठी सभी लड़कियां मेरी बेबसी का मजा ले रही थीं और मुस्कुरा कर तमाशा देख रही थीं.

मगर पायल मानने को तैयार नहीं थी. अगले भाग में आपको और भी रसदार सेक्स कहानी के दरिया में डुबकी लगवाने ले चलूंगा.
आप मेल करते रहिए.
[email protected]
शादी में चुदाई की कहानी जारी है.

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