मामी को लंड चुसाया और गांड मारी- 1

(Lund Sex Kahani)

यह लंड सेक्स कहानी मामी को मेरा लंड चुसवाने की है. मैं मामी की चुत चुदाई कर चुका था पर उन्होंने मेरा लंड नहीं चूसा था अब तक. कैसे मनाया मैंने मामी को?

मित्रो, मैं राहुल पनवेल मुंबई से फिर से हाज़िर हूँ. ये लंड सेक्स कहानी आज फिर से लिख रहा हूँ क्योंकि मेरी कल्पना मामी और मामा 14 मार्च को मुंबई घूमने आए थे. मामा को किसी काम से दिल्ली जाना पड़ा और और मामी लॉकडाउन में 3 महीनों के लिए मेरे पास रह गईं.

इस लॉकडाउन में हम दोनों ने रोज़ जबरदस्त चुदाई की.
लॉकडाउन में मामी की चुदाई की कहानी को मैं बाद में कभी लिखूंगा.

आज मैं उस सेक्स कहानी को आगे लिख रहा हूँ, जिसे मैंने उनके घर पर रह कर उन्हें चोदा था.

हालांकि मैं कल्पना मामी की चुत चुदाई का मजा ले चुका था … मगर आज मैं वो लंड सेक्स कहानी लिख रहा हूँ जब मैंने कल्पना मामी से पहली बार अपना लंड चुसवाया था और उनकी गांड की ओपनिंग की थी.

मेरी पिछली सेक्स कहानी में मैंने कल्पना मामी की चुत चुदाई की थी.
उसमें आपने पढ़ा था कि कैसे मैंने मामी को रात को चोद कर खुश किया था.

मैं मामा के घर में ही अपने कमरे में सो रहा था. मैं सुबह देरी से उठा तो मैंने देखा कि मामी मेरे कमरे में झाड़ू लगा रही थीं. मैं उठा और मामी की जोर से चूमने लगा.

मामी ने मुझे धक्का दिया और बोलीं- आपके नाना नानी ऊपर दूसरे कमरे में हैं.

ये सुनकर मैंने उन्हें छोड़ दिया और बाथरूम में फ्रेश होने चला गया.

दस मिनट बाद जब मैं नहा कर बाहर निकला तो मामी बोलीं- नानी और नाना नीचे धूप में चले गए हैं.

जैसे ही मैंने ये बात सुनी, मैंने अपना तौलिया खोल दिया और कल्पना मामी के सामने नंगा हो गया; उनके पास जाकर मैं उन्हें किस करने लगा.

मामी ने जल्दी से नीचे से ऊपर आने वाले दरवाज़े को बंद किया और हमारी रासलीला चालू हो गयी.

मैं बोला- मामी चलो आज मैं आपको नहलाता हूँ.
मामी हंस कर बोलीं- नहीं, मैं खुद नहा लूंगी.

मैं कुछ नहीं बोला और चुपचाप उन्हें उठाया और बाथरूम में लेकर आ गया.
मैंने उन्हें पानी से भिगो दिया.
वो भी मस्ती करने लगीं.

मैंने धीरे धीरे उनके कपड़े खोल कर उन्हें पूरी नंगी कर दिया और उन्हें नहलाने लगा.
मैं मामी के नंगे जिस्म पर साबुन लगा कर उनकी चूत और गांड को रगड़ने लगा. उनके दोनों छेदों को एकदम साफ कर दिया.

उन्हें यूं ही साबुन लगाते हुए मैं उनकी चूत को रगड़ता रहा और वो मेरे लंड को हिलाती रहीं.
थोड़ी देर में मामी झड़ गईं और हांफने लगीं.

मामी ने मुझे रुकने को कहा.
मैं बोला- मामी, आपका तो एक बार हो गया. अब आप मुझे साबुन से साफ कीजिए.

मामी मुझे नहलाने लगीं और साबुन लंड पर लगा कर उसे अच्छे से साफ कर दिया.
फिर हम दोनों ने एक दूसरे के शरीर को पानी से साफ किया.

मैं बोला- मामी अब तो लंड साफ़ हो गया, अब इसको मुँह में ले लो.
मामी फिर से मना करने लगीं.

मैं बोला- ठीक है … मैं जा रहा हूँ.
तब मामी ने बोला- ठीक है, मैं कोशिश करूंगी लेकिन तुम पहले मेरी चूत को चाटो.

मैंने जल्दी से एक बाल्टी को उल्टा किया और मामी के एक पैर को बाल्टी के ऊपर रखवा कर मैं नीचे हो गया और उनकी चूत को चाटने लगा. मामी की सेक्सी सिसकारियां निकलने लगीं.

“आअहहा राहुल्ल ओह राआहुल्ल मुझे नहीं मालूम था कि चुसाई में इतना मज़ा आता है. कल रात से जब से तूने मेरी चूत को चाटा, तब से मन कर रहा था कि मैं अपनी चूत हमेशा तेरे मुँह पर रखी रहूँ. पहली बार मेरी चूत की रबड़ी को किसी ने अपने मुँह में लिया है … आहह राआहहुउउल्ल्ल और जोर से चुत चूस लो.”

मामी मेरे सिर को अपने दोनों हाथों से अपनी चूत पर दबाने लगीं और जल्दी ही झड़ गईं.
मैं उनका पूरा पानी पी गया लेकिन तब भी मैंने मामी की चुत को चाटना नहीं छोड़ा, मैंने अपना मुँह उनकी रसीली चुत पर लगाए रखा.

कल्पना मामी तड़पती हुई बोलीं- आह राहुउउल्ल छोड़ दे ना मुझे … क्यों तड़पा रहा जल्दी से चोद दे.
मैं बोला- साली रंडी … जब तक तू मेरे लंड को मुँह में नहीं लेती, तब तक तुझे नहीं चोदूंगा.

मामी- मैंने आज तक नहीं लिया … मुझसे नहीं हो पाएगा. राहुल एक बात बोलूं … मुझे गाली पसंद नहीं है.

मैं अपने मन में बोला ‘साली रंडी मादरचोदी … देखना एक दिन तू खुद मुझे गाली देगी और बोलेगी चोद साले भैनचोद चोद दे मुझे.’

सॉरी बोलकर मैं खड़ा हो गया और उन्हें ज़बरदस्ती नीचे बैठा कर उनके सिर को पकड़ कर बोला- लो लंड चूसो.

कल्पना मामी ने मेरे लंड को पकड़ा और और धीरे धीरे मेरे लंड के सुपारे को किस करने लगीं.
फिर मुँह में लंड लेकर चूसने लगीं.

उनके लंड चूसते ही मैं झड़ने को हो गया और मैंने अपने दोनों हाथों से उनके सिर को पकड़ कर अपना पूरा लंड मामी के गले तक उतार दिया.
वो इसे समझ नहीं पाईं और उनकी दोनों आंखें बड़ी हो गईं.
मैं पूरी बेरहमी से उनकी मुँह को चोदता रहा.

वो कुछ बोलना चाह रही थी लेकिन ‘गुऊु गुऊ ..’ की आवाज़ से ज्यादा कुछ नहीं निकल रहा था.

मामी की मुँह की चुदाई से बहुत देर नहीं टिक पाया और पूरा लंड रस मामी के मुँह में ही निकाल दिया … लेकिन अपना लंड नहीं निकाला.

तो मामी का मुँह पूरी तरह से भर गया था. कुछ उनके मुँह से बाहर आ रहा था और बाकी उन्हें निगलना पड़ा.

जैसे ही मामी के मुँह से लंड निकाला मामी बोलीं- साले कमीने … मेरी जान लेने का मन बनाया था क्या?

वो उल्टी जैसा करने लगीं, लेकिन उल्टी नहीं हुई.
मैं बोला- मामी आपको गाली पसंद नहीं है ना … अब आपने मुझे साले कमीने कह कर मेरा रास्ता साफ़ कर दिया है.

वो कुछ नहीं बोल रही थीं.

इधर मैंने अभी भी मामी को छोड़ा नहीं था. मामी थोड़ा गुस्सा लग रही थीं … तो मैंने उन्हें सॉरी बोला.

फिर नहा कर मैं उनके साथ नंगा ही उनके रूम में आ गया.

उनके रूम में एक बड़ा सा दर्पण लगा था.
उसमें देखते हुए मैंने बोला- कल्पना डार्लिंग तुमने कभी शीशे के सामने सेक्स किया है?
मामी दर्पण में देखते हुए बोलीं- नहीं.

मैंने मामी के दूध दबाए और कहा- आज आपको एक और मज़ा मिलने वाला है … देखती जाओ.
मामी अपने तने हुए चूचे देखती हुई बोलीं- कैसा मजा?

मैंने एक कुर्सी दर्पण के सामने रख दी और मामी को उस पर ऐसे बैठा दिया, जिससे उन्हें दर्पण में सब कुछ दिखे.

ये मामी के साथ पहली बार हो रहा था. उन्हें ये सब सोच कर ही जोश आ रहा था.

मैंने उनकी दोनों टांगे कुर्सी पर अलग कर दीं और उनकी चूत को चाटने लगा.
कल्पना मामी एक हाथ से अपनी चुचियों को दबा रही थीं और दूसरे हाथ से मेरे सिर को सहला रही थीं.
वो खुद को दर्पण में देख रही थी.

ये सब देखते हुए ही वो इतने जोश में आ गईं कि बस ‘आअहह ओह उउन्न्न ..’ की आवाजें निकाल रही थीं.

मैंने पूछा- मजा आ रहा है जान?
मामी- आह … राआहुउल्ल्ल तूने ये का कर दिया … अब चोद दे नाअ … बर्दाश्त नहीं हो रहा है.

मैंने उन्हें कुर्सी से उतारा और कुर्सी को घुमा कर कल्पना मामी को कुर्सी पर झुका दिया.
वो कुतिया बन गई थीं.

मैंने पीछे से एक ही बार में अपना पूरा 6 इंच का लंड मामी में चूत में डाल दिया.
वो बस ‘अया … मर गई.’ कह कर रह गईं.

अब तक मामी 3 बार झड़ चुकी थीं और मेरा भी एक बार माल निकल चुका था.

मैं शीशे के सामने मामी को धकापेल चोद रहा था. मामी भी खुद को दर्पण में चुदते हुए देख रही थीं. उनकी चुचियां पेड़ में लगे आम जैसे हिल रही थीं.

“आअहह राहुल्ल्ल … तू बड़ा मस्त चोदता है … तूने मेरे से पहले कितनी को चोदा है बता.?”
“साली रंडी … तू बस चुदने का मज़ा ले … बाद में सब बताता हूँ कि कहां से सीखा है.”

इस बार मामी ने मुझे गाली देने पर कुछ नहीं कहा. मैं जोर जोर से मामी को चोदता रहा.

थोड़ी देर में मेरा माल निकलने वाला था तो मैंने लंड बाहर निकाला और मामी को घुमा कर नीचे बैठा दिया.
मामी ने लंड को मुँह में नहीं लिया लेकिन हाथ से लंड को हिलाते हुए अपनी चुचियों पर रस गिरवा लिया.

हम दोनों हांफ़ रहे थे और पूरी तरह से थक चुके थे.

मामी- राहुल, मैं आज तक 24 घंटे में इतनी बार नहीं झड़ी थी. शादी के इतने साल बाद पता चला कि चुदाई में इतना मज़ा आता है. तू मुझे रंडी बोलता है ना … मैं तेरी रंडी बनने को तैयार हूँ … लेकिन तू मुझे छोड़ना मत. काश तू इसी घर में मेरा देवर होता और मैं तुझसे कभी अलग ना होती. चोद दे जब तक है … पूरी ताकत से चोद दे मुझे … मैं तुझसे रोज़ चुदूंगी.

मैं- मामी मुझे आपकी कुंवारी गांड चोदनी है … बताओ न कब चोदने दोगी?
मामी- उंह … वो नहीं हो पाएगा मुझसे.
मैं बोला- आपने तो आज तक मुँह में भी नहीं लिया था … मज़ा आया ना?

मामी बोलीं- हां मज़ा तो आया.
मैं- मामी आप जब गांड चुदवा लोगी न तो उसमें भी आपको मज़ा आएगा.

वो हंस दीं लेकिन उन्होंने गांड मरवाने के लिए हां नहीं कही.

हम दोनों ने खुद को साफ किया और जल्दी से मामी ने खाना बना कर मुझको खाना परोस दिया और मैं खाना खाकर मामा के लिए खाना ले कर चला गया.

अगले पांच दिन तक मामी जब मुझे तेल लगाने आतीं … तो वो चूड़ी और पायल पहन कर आती और मुझे और मेरे लंड की मालिश करके चली जातीं.
फिर अपने बच्चे के सोने के बाद रोज़ रात में एक बजे के बाद मेरे कहे अनुसार चूड़ी और पायल दोनों निकाल कर आ जातीं. रोज़ रात मैं उन्हें अलग अलग तरीकों से चोद देता.

मैं रोज़ रात में उनकी चुत का पानी झाड़ देता और मामी की चूत को चाटता.
मामी मेरी चूत चुसाई की दीवानी हो गयी थीं. अब तो मामी बिना चुत चटवाए रह ही नहीं पाती थीं.

पांच दिन बाद उनका पीरियड आ गया, तो मामी ने बोला- राहुल मेरा पीरियड चालू हो गया है. अभी मत चोदना. चार पांच दिन बाद करते हैं.

मैं- नहीं मामी, मैं तो आपको रोज चोदूंगा … इस समय मैं आपकी चूत नहीं, तो गांड मारूंगा.
मामी कुछ नहीं बोलीं.

मैंने कहा- मामी, आज रात को आपकी गांड की सील खुलने वाली है.
मामी मना कर रही थीं.

मैंने कहा- अच्छा आप तेल लगाने आना फिर बात करेंगे.
मामी ने हामी भर दी.

उस रात मामी तेल लगाने तो आईं लेकिन रात में एक बजे नहीं आई.
मुझे बहुत गुस्सा आया.

मैंने सुबह उठ कर जानबूझ कर उनसे बात करना कम कर दिया.
उस दिन मैंने मामी से सिर्फ एक बार बात की. मैं उन्हें इग्नोर करने लगा.

मेरा ये रवैया देख कर मामी बहुत कोशिश कर रही थीं कि मैं मान जाऊं.
वो मुझसे बात करने की कोशिश करती रहीं और मैं उन्हें नजरअंदाज करता रहा.

इसी तरह पूरा दिन कट गया.
रात में खाने के टाइम मैंने बोल दिया कि मेरा खाना मत बनाना … मुझे भूख नहीं है.

मैं नाना नानी के पास पास जाकर बैठ गया.

जब रात को मामी तेल लगाने आईं तो मैं नाना नानी के पास ही रह गया ताकि मुझे अकेले ना रहना पड़े.

नानी ने मामी से कहा- इसे भी तेल लगा दे.

मामी कुछ कर नहीं सकती थीं, तो वो मुझे वहीं तेल लगा कर वापस चली गईं.

मैं थोड़ी देर बाद अपने कमरे में आकर सो गया.

मामी की हालत देख समझ आ चुका था कि मामी आज रात कमरे में जरूर आएंगी.

वैसा ही हुआ.
रात के करीब दो बजे मामी मेरे कमरे में आईं. वो कमरे का दरवाजा बंद करके नंगी हो कर मेरे बगल में आकर लेट गईं और मेरे लंड को सहलाने लगीं.

मैं बोला- आ गई कमीनी … साली कल क्यों नहीं आई थी?
मामी- मुझे डर था कि तुम मेरी गांड मारोगे … मुझे बहुत डर लग रहा है.

मैं- साली गांड तो आज मैं मारूंगा ही.
मामी बोलीं- नहीं, आज नहीं … कल दोपहर में जब सब कोई नीचे रहेंगे … तब कर लेना.

उनके मुँह से ये सुनकर मेरी तो ख़ुशी का ठिकाना ही नहीं था.

मैं- मामी ठीक है … तुम कल गांड मरवाओगी … लेकिन आज रात कैसे कटेगी?
आज मामी खुद से बोलीं- आज तुम मेरे मुँह को चोद लो.
मैं खुश हो गया.

कल्पना मामी ने तुरंत मुझे नंगा किया और दोनों एक दूसरे के शरीर चाटने लगे. मामी मेरे लंड को मुँह में लेकर रंडी की तरह लंड को चूसने लगीं.

मैं कल्पना मामी के सिर को पकड़ कर उनके मुँह को चोदने लगा.
उनके मुँह की लार से मेरा लंड चिकना हो गया था.

लंड से लार चुचाते हुए उनकी चुचियों पर गिर रही थी. थोड़ी देर में मैं मामी के मुँह में ही झड़ गया.
लेकिन मैंने लंड बाहर नहीं निकाला. इस वजह से उन्हें मेरा माल पीना पड़ा.

फिर हम दोनों वैसे ही लेटे लेटे बात करने लगे. मैंने कल्पना मामी से बोला- चलो मामी, आज मैं आपकी मालिश कर देता हूँ.
मामी खुश हो गईं. वो बोलीं- मुझे बाथरूम हो आने दे, फिर मालिश कर देना.

मैं समझ गया कि मामी अपनी चुत से नैपकिन निकालने जा रही हैं.

दस मिनट बाद मामी कमरे में आ गईं.
मैंने मामी को बेड पर लेटा कर तेल लिया और उनकी पीठ पर गिरा दिया. फिर हल्के हाथों से पूरे पीठ की मालिश करने लगा.

मैं नंगा तो था ही … उनके चूतड़ों पर बैठ कर उनकी पीठ की मालिश कर रहा था.
फिर धीरे धीरे नीचे आते हुए मैं उनके चूतड़ों के मालिश करने लगा.

मामी अब वासना में गर्म हो रही थीं.

मैंने बहुत सारा तेल मामी की गांड पर गिरा दिया और मामी को घुटने मोड़ने को कहा.

मामी ने तुरंत घुटने मोड़ लिए, जिससे उनकी गांड बाहर की तरफ निकल आयी.
मैं उनकी गांड की मालिश करने लगा.

मैं रह रह कर उनकी गांड में एक उंगली डाल देता और वो चिहुंक जातीं.
मगर उन्होंने मुझे गांड में उंगली करने से मना नहीं किया.

ऐसे ही दस मिनट तक मैं मामी की गांड की मालिश करता रहा.

मैंने बीच बीच में अपनी दो उंगलियां उनकी चूत में भी डाल देता और अंगूठा उनकी गांड में करने लगता.

मामी इस तरह का मज़ा आज पहली बार ले रही थीं. हालांकि वो चुत में उंगली करने से मना कर रही थीं.

मैं लगा रहा.
मामी इस कामुक मजे को बर्दाश्त नहीं कर पाईं और वो कांपते हुए झड़ गईं.

मैंने मामी को पीठ के बल लेटा दिया और उनकी चुचियों और पेट पर तेल गिरा कर सामने से उनकी मालिश करने लगा.

मैं मामी की चुचियों की एक एक करके मालिश कर रहा था. इसी के साथ मैं मामी के होंठों को भी चूमता रहा.
कभी मामी की चुचियों को चूस लेता, कभी उनकी गर्दन पर चुम्बन कर देता … कभी उनके होंठों को काटने लगता.

यह सब मामी से सहन नहीं हो रहा था. मामी बस वासना में सिसकारियां ले रही थीं.

वो इतना ही कह रही रही थीं- आह राहुल, बहुत मज़ा आ रहा है … आज तक मेरी ऐसी मालिश कभी नहीं हुई.

मैं बोला- मेरी कप्पो रानी, तुमने आज तक बस टांग उठा कर मामा के लंड को चूत में लिया है और बच्चा पैदा करके अपनी चूत को ढीला कर लिया है.
मामी गाली देते हुए बोलीं- तेरा मामा भोसड़ी का है ही ऐसा. वो तो बस आता है और मेरी दोनों टांगें अलग करके अपना लंड मेरी चूत में डाल कर अपना पानी निकल कर सो जाता है. अब मेरी भी इच्छा है कि तू कल मेरी गांड मार ले. मैं तो तेरे साथ रंडी बन कर रहने को भी तैयार हूँ.

मैंने भी उनकी गाल की चुम्मी लेकर पूछा- और क्या करने को राजी है मेरी कप्पो रानी?
मामी- राहुल, तूने तो मुझे ऐसे ऐसे चीजें सिखा दी हैं कि मैं तो तेरी दीवानी हो गयी हूँ.

मैंने ऐसे ही उनकी चुचियों को चूसते हुए फिर से दो उंगलियां उनकी चूत में डाल दीं.

मैं जल्दी जल्दी मामी की चुत में उंगलियां चलाने लगा.
मामी बोलीं- राहुल चोद दे मुझे … अब बर्दाश्त नहीं होता.

मेरा लंड तो खड़ा ही था. लेकिन तभी मामी फिर से झड़ गईं. अब तक 3:45 हो चुके थे, सब लोगों के जागने का टाइम हो गया था.

मैंने समय बताया तो मामी बोलीं- ठीक है. अभी तो मैं चलती हूँ, तू तो 10-11 बजे तक उठेगा … लेकिन मुझे सारा काम करना है. तेरे उठने के बाद अपनी गांड तुझे खाने के लिए परोसूंगी … समझा.
मैं बोला- ठीक है मेरी कप्पो रानी … लेकिन आप कमरे से बिना कपड़ों के ही अपने कमरे में जाओ.

मामी बोलीं- पागल है क्या?
मैं- जैसा बोल रहा हूँ वैसा कर मेरी कप्पो रानी.

मैंने मामी की नाइटी अपने पास रख ली और उन्हें नंगी ही जाने के लिए बोला.
मामी ने कमरे की लाइट ऑफ की और धीरे से दरवाज़ा खोल कर बाहर झांका, फिर जल्दी से वो अपने कमरे में चली गईं.

मैं सो गया और दूसरे दिन कल्पना मामी की गांड मारने के मीठे सपने देखने लगा.

दोस्तो, कल मैं अपनी मामी की गांड चुदाई की कहानी लिखूंगा. आप मुझे मेल भेजना न भूलिए.
आपका राहुल कुमार
[email protected]

लंड सेक्स कहानी का अगला भाग: मामी को लंड चुसाया और गांड मारी- 2

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