रेलगाड़ी का मज़ेदार सफ़र -2

(Railgadi Ka Mazedar Safar-2)

स्वीट राज 2010-10-29 Comments

This story is part of a series:

सबसे पहले मैं अन्तर्वासना का धन्यवाद करूँगा जहाँ मेरी कहानी
रेलगाड़ी का मज़ेदार सफ़र-1
प्रकाशित हुई।

पहले तो मैंने सोचा था कि कहानी शायद प्रकाशित नहीं होगी, लेकिन एक दिन जब मैं अन्तर्वासना पर कहानियाँ पढ़ रहा था तो अपनी कहानी देखा।

उसके बाद मेरे पास काफी मेल आये, उसमे कुछ लड़कियों के और कुछ लड़कों के, सबने अपने अपने ढंग से प्रतिक्रिया भेजी। मैं उन सबका धन्यवाद करता हूँ जिन्होंने मेरी कहानी पढ़ी और प्रतिक्रिया भेजी और इन सबके लिए मैं अन्तर्वासना का एक बार फिर से धन्यवाद करता हूँ मेरी कहानी प्रकाशित करने के लिए।

जैसा मैंने अपनी कहानी में लिखा था कि आगे की कहानी मैं बाद में भेजूँगा।

ट्रेन का सफ़र में मैंने लिखा था कि ट्रेन में रश्मि की चूत चोदने के बाद दो बार और उसकी चूत चोदी, पर कहानी भेजने और प्रकाशित होने के बीच कई महीने का समय है इसलिए इस बीच हमारे बीच काफी कुछ हुआ जो मैंने आपके सामने धीरे धीरे लाता रहूँगा।

अब मैं अपनी कहानी को आगे बढ़ाता हूँ। जब रश्मि पटना से वापस दिल्ली आई तो उसने मुझे फ़ोन किया, वो सोमवार का दिन था जो कि ऑफिस का दिन होता है और उसके काम का भी दिन था।

इस तरह हम रात में नेट पर ऑनलाइन होकर बातें करते रहते। वो एक दूसरी लड़की के साथ रहती थी जो अगले सप्ताह अपने घर जा रही थी तो हमने अगले शुक्रवार को मिलने का कार्यक्रम बनाया। शुक्रवार को शाम 6 बजे हमें इंडिया गेट मिलना था, इस तरह हम दोनों 6 बजे वहाँ मिले।

वो जींस और गुलाबी टॉप में मस्त लग रही थी, मेरा तो लंड खड़ा हो गया उसे देख केर। फिर हम वहाँ पार्क में बैठे। दिसम्बर का महीना था और ठंड भी काफी थी, हम बैठे थे, लोगों का आना-जाना कुछ कम था। मैं जब मौका मिलता कभी उसकी चूचियाँ पकड़ लेता कभी उसकी जांघों पर हाथ फिराता।

कुछ देर के बाद हम वहाँ से निकले और ऑटो से उसके घर के चल दिए। हम उसके घर पहुँचे, उसने दरवाजा खोला, हम अंदर गए और उसने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया।

दरवाजा बंद करते ही मैंने उसको अपनी बाँहों में भर लिया और चूमने लगा। फिर धीरे धीरे उसकी चूचियाँ दबाने लगा वो मेरा लंड पैंट के ऊपर से दबाने लगी। मैं कभी उसकी गांड को मसलता कभी उसकी चूचियाँ !

मैंने उसे पूरी तरह नंगी देखा नहीं था इसलिए मैंने उसके जींस और टॉप उतार दिया। अब वो लाल ब्रा और पैंटी में थी, क्या मस्त माल थी । दूधिया चूचियाँ मैं तो पागल हो गया देख कर। चिकने चिकने पैर।

वो बोली- अपनी पैंट भी तो उतारो !

तो मैंने बोला- मैंने तेरे कपड़े उतारे हैं तो मेरे तुम उतारो।

फिर उसने मेरी पैंट उतारी और फिर मेरा जांघिया भी और मेरा लंड अपने हाथों में लेकर देखने लगी, मसलने लगी और बोली- इतना बड़ा लंड कैसे मेरी चूत में डाल दिया था तुमने?

अब मैं उसे अपनी बाँहों में उठा कर बेड पर ले गया और लिटा दिया। वो पेट के बल लेटी थी और मैं धीरे धीरे उसकी गांड को सहलाने लगा।

वो सिसकारियाँ लेने लगी। अब मैंने उसकी पैंटी उतार दी और उसे सीधा लिटा दिया। क्या मस्त चूत थी बिल्कुल चिकनी, उसने बताया कि सुबह ही अपनी चूत साफ की थी।अब मैंने उसकी चूत चाटना शुरू किया, फिर मैंने उसकी चूत को फैला कर अपनी जीभ अंदर डाल दिया और उसकी चूत अंदर चाटने लगा तो वो आह आह करने लगी।

फिर मैंने उसकी ब्रा उतार दी, अब उसकी मस्त चूचियाँ मेरे सामने थी, मैं उसकी चूचियों को सहला रहा था। फिर मैं अपने मुंह में लेकर उन्हें चूसने लगा और हाथों से उसकी चूत सहला रहा था।

कभी मेरे हाथ उसकी चूत पर कभी उसकी गांड पर !

फिर हम 69 के पोज में आ गए और मैंन उसकी चूत चाटने लगा, वो मेरा लंड चूसने लगी। काफी देर तक हम ऐसे ही करते रहे।

अब हम दोनों काफी गर्म हो गए थे, मेरा लंड भी चूत में जाने को बेक़रार हो रहा था तो मैंने उसे सीधा लिटाया और उसके पैर अपने कंधों पर रखे, इससे उसकी चूत थोड़ी ऊपर आ गई।

मैंने अपना 8 इंच का लंड उसकी चूत पर रखा और धीरे धीरे उसकी गीली चूत में डालने लगा, उसकी चूत एकदम कसी हुई थी। उसे थोड़ा दर्द हो रहा था इसलिए मैं धीरे धीरे डालने लगा और उसकी चूत में लंड पेल दिया। कुछ देर में धीरे धीरे अपने लंड उसकी चूत के अंदर-बाहर करता रहा तो उसकी चूत थोड़ी ढीली हुई और मेरा लंड आराम से जाने लगा।

अब मैंने अपनी गति बढ़ाई और उसकी चूत चोदने लगा। उसके पैर मेरे कंधो पर थे और मैं उसकी गांड पकड़ कर उसकी चूत चोद रहा था।

कुछ देर इसी तरह चोदने के बाद मैं नीचे आ गया और लेट गया और उसको ऊपर आने को कहा। मैंने नीचे लेट कर अपना लंड हाथ से पकड़ कर सीधा खड़ा किया और उसने मेरे ऊपर से आकर अपनी चूत को मेरे लंड के ऊपर रखा और धीरे धीरे मेरे लंड पर बैठने लगी और मेरा लंड उसकी चूत में पूरी तरह अन्दर चला गया।

अब वो उपर से खुद चुदाई करने लगी और मैं कभी उसकी गांड मसलता तो कभी उसकी चूचियाँ।

करीब दस मिनट वो ऊपर से चुदाई करती रही फिर मैं उसकी गांड पकड़ कर नीचे से धक्के मारने लगा, थोड़ी देर तक मैं उसकी चूत नीचे से चोदता रहा।

अब मैंने उसे घोड़ी बनाया, उसकी चूत मस्त लग रही थी पीछे से। मैंने अपना लंड उसकी चूत में पीछे से डाला और उसकी गांड पकड़ कर चुदाई करने लगा। काफी देर तक मैं उसे इसी पोज में चोदता रहा और वो झड़ गई।

फिर मैं जोर जोर से धक्के मारने लगा और उसकी चूत में वीर्य गिरा दिया और फिर हम दोनों रजाई में नंगे सो गए।

अगला दिन शनिवार था और हम दोनों की छुट्टी थी, सुबह जब नींद खुली तो रश्मि सोई हुई थी मैं उसकी चूचियाँ चूसने लगा तो वो जाग गई।

मैं उसकी चूत सहलाने लगा और उसकी गांड मसलने लगा। वो गर्म हो गई, मेरे ऊपर आ गई, मेरा भी लंड खड़ा था। एक हाथ से उसने मेरे लंड को सीधा किया और अपनी चूत में धीरे धीरे डालने लगी, जब लंड पूरी तरह अंदर चला गया तो वो उपर से धक्के मारने लगी। करीब दस मिनट तक वो ऊपर से मेरे लंड की चुदाई करती रही।
अब मैंने उसे उसे घोड़ी बनाया और करीब आधे घंटे तक उसकी चूत चोदी और फिर जब मेरा गिरने को हुआ तो मैंने अपना लंड निकाल कर अपना वीर्य उसकी गांड पर गिरा दिया।

हम शनिवार और रविवार साथ में थे। मुझे उसकी चिकनी और मस्त गांड मारने का मन हो रहा था, जब मैंने उसे बोला- मुझे तेरी गांड लेनी है !

तो उसने मना कर दिया। काफी मनाने के बाद वो तैयार हुई और बोली कि वो करने देगी पर जब दर्द होगा तो मैं निकाल लूँगा।

उसके पास क्रीम थी मैंने अपनी एक उंगली पर क्रीम लगाकर धीरे धीरे उसकी गांड में लगाई, जब क्रीम पूरी तरह उसकी गांड में लग गयी तो फिर मैं थोड़ी और क्रीम अपनी दो उँगलियों पर लगा कर उसकी गांड में दोनों उंगलियाँ डालने लगा। उसे थोड़ा दर्द हुआ पर थोड़ी देर में मैं अपनी दोनों उँगलियों को उसकी गांड की सैर करा दी।

अब उसकी गांड थोड़ी सी फ़ैल गई थी और मैंने अब अपने लंड पर क्रीम लगाई और उसकी गांड को एक हाथ से फैला कर अपने लंड को धीरे धीरे उसकी गांड में डालने लगा। मेरा लंड करीब तीन इंच उसकी गांड में गया होगा तो वो दर्द से चिल्लाने लगी और बोली- निकालो।

मैंने उसे बहुत मनाया, मैंने बोला- थोड़ा दर्द होगा, फिर मजा आएगा।

तो वो किसी तरह मानी।

अब मैं अपना लंड उसकी गांड में डाल रहा था, वो अपने होंठों को दबाये हुए किसी तरह दर्द को बर्दाश्त कर रही थी। अब मेरा लंड करीब 5 इंच उसकी गांड में था। मैंने अब एक जोरदार धक्का लगाया और मेरा लंड पूरी तरह उसकी गांड में चला गया और वो जोर से चिल्लाई।

मैंने अपने एक हाथ से उसके मुँह को बंद किया। उसकी आँखों में आंसू थे, जब वो थोड़ा शांत हुई तो मैंने अपना हाथ उसके मुँह से हटाया तो वो बोलने लगी- मुझे यह नहीं करना, बस निकाल लो।

मैंने उसे बहुत समझाया कि जो दर्द होना था वो हो गया, अब तो मजा आएगा बस थोड़ा सा और।

और फिर मैं अपने लंड को धीरे धीरे अंदर-बाहर करने लगा। करीब 5 मिनट तक धीरे धीरे करने के बाद उसकी गांड थोड़ी ढीली हुई और मेरा लण्ड अब आराम से जाने लगा तो मैंने अपनी गति बढ़ाई, अब उसे भी मजा आने लगा था और वो अपनी गांड उठा उठा कर मेरे धक्कों का जवाब दे रही थी।
यह कहानी आप अन्तर्वासना.कॉम पर पढ़ रहे हैं।

मैंने उसकी गांड काफी देर तक मारी, इस बीच मैंने देखा कि उसकी चूत गीली हो गई है, वो फिर से झड़ गई थी। अब मेरा गिरने वाला था, मैंने उसकी गांड में ही गिरा दिया और फिर हम वैसे ही काफी देर तक लेटे रहे।

हमने तीन रात और दो दिन पूरी मस्ती की।

हमें जब भी मौका मिलता है, हम मजे करते हैं, जब उसकी रूम-पार्टनर अपने घर चली जाती है तो हम पूरा वीकेंड साथ बिताते हैं और जम कर चुदाई होती है।

मैं रश्मि की चुदाई के पहले अपने कॉलेज के दिनों की चुदाई की दास्तान आपके सामने लेकर फिर आऊँगा।

उम्मीद है कि आप मेरी पिछली कहानी की तरह ही इस बार भी अपनी प्रतिक्रिया भेजेंगे। मैं आपकी प्रतिक्रियाओं का hellosweetgirls @gmail.com पर इंतजार करूँगा।

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